Nepal Flood: इस हफ़्ते की शुरुआत में नेपाल में आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है. 178 भारतीयों समेत 1,400 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं. नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को इस बड़ी त्रासदी में मरने वालों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि की.नेपाल पुलिस ने कहा कि भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के पास पानी में बह गए या फंसे सैकड़ों लोगों को ढूंढने के लिए बचाव अभियान जारी है. चीन ने पुष्टि की है कि तिब्बती तरफ तीन लोगों की मौत हो गई है.रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 1,176 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया है. इस अभियान में नेपाली सेना के 6 और निजी कंपनियों के 9 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं. कुल 15 हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम कर रहे हैं.
इस जिले में सबसे ज्यादा मौत
नेपाल पुलिस ने बताया कि नेपाल के रसुवा जिले में आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई, वहीं, 1,545 लोग घायल हुए और उन्हें बचाया गया. चितवन जिले में सबसे ज्यादा मौतें हुईं, जहां 178 शव बरामद किए गए. इसके बाद एनपी ईस्ट में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धाडिंग में 33, तनहुन में 28, एनपी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 मौतें दर्ज की गईं. अधिकारियों ने रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धाडिंग से तीन लोगों को बचाया है.
288 भारतीय नागरिक भी लापता
नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताज़ा डेटा के मुताबिक, नेपाल में 910 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. इसमें भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) का यह अंदाज़ा भी शामिल है कि गुरुवार देर शाम तक 288 भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर थे.नेपाल ने अभी तक राष्ट्रीयता के हिसाब से मरने वालों की लिस्ट जारी नहीं की है, जिससे यह साफ़ नहीं है कि मरने वालों में कोई भारतीय है या नहीं.
13,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कुल 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाल आर्मी के 4,200 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 1,845 जवान शामिल हैं. राहत और बचाव ऑपरेशन के साथ-साथ घायलों के इलाज पर भी ध्यान दिया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 130 घायल लोगों का इलाज किया गया है. इनमें से 67 का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 48 को छुट्टी दे दी गई है. चौदह लोगों को आगे के इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है. एक व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया.
रणधीर जायसवाल ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल में 288 लापता भारतीय नागरिकों में से 73 त्रिशूली-1 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के कर्मचारी हैं.सड़कों की कमी के कारण बचाव टीमों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
लापता लोगों में तिब्बत में कैलाश पर्वत की यात्रा करने या वहां से लौटने वाले टूरिस्ट और तीर्थयात्रियों के ग्रुप शामिल हैं. इनमें से कई लोग तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के हैं.
गुरुवार दोपहर 1 बजे तक, तमिलनाडु के 21 टूरिस्ट को सुरक्षित बचा लिया गया था और उन्हें काठमांडू लाया जा रहा था. तिब्बती इलाके में फंसे 200 और भारतीयों ने भी अलग से भारतीय अधिकारियों से मदद की अपील की है.
नेपाल टूरिज्म बोर्ड की लिस्ट में आंकड़े थोड़े अलग हैं. इसमें 178 भारतीयों को लापता या संपर्क से बाहर बताया गया है. यह अंतर इसलिए है क्योंकि भारत द्वारा जारी 288 के आंकड़े में हाइड्रोइलेक्ट्रिक वर्कर और दूसरे ग्रुप शामिल हैं जो नेपाल की टूरिज्म लिस्ट में शामिल नहीं हैं. नेपाल की टूरिस्ट लिस्ट में सबसे बड़ा ग्रुप भारतीयों का है.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि गुरुवार को 69 हवाई उड़ानों से 573 लोगों को बचाया गया. सेना और प्राइवेट कंपनियों के हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं.