नेपाल में बाढ़ ने तबाही मचा दी है. इसी बाढ़ के दौरान त्रिशुली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशुली माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य की एक छोटी-सी सूझ-बूझ ने हजारों बच्चों की जान बचा ली.
बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था और 47 वर्षीय अंग्रेजी शिक्षक दावड़ी के पास कार्रवाई करने के लिए कुछ ही मिनट बचे थे. इस दौरान उन्होंने शीघ्रता से एक समझदारी भरा निर्णय लिया और बच्चों को बड़े संकट से बचा लिया.
दोस्त ने दी जानकारी
बुधवार सुबह 9:20 बजे नेपाल की त्रिशुली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशुली माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी को उनके एक मित्र ने बाढ़ के बारे में चेतावनी दी. दवाड़ी ने कहा, “उसने कहा कि गांव तबाह हो गया है: नदी उसे बहा ले गई है. उसने मुझे भागने को कहा.” बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था और 47 वर्षीय अंग्रेजी शिक्षक दावड़ी के पास कार्रवाई करने के लिए कुछ ही मिनट बचे थे. उस सुबह बाढ़ प्रभावित नुवाकोट के स्कूल में बच्चों की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी और उनकी सुरक्षा अब उनके फैसले पर निर्भर थी.
दावड़ी को शुरू में लगा था कि स्कूल सुरक्षित है. द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंक्रीट से बना और नदी से लगभग 60 मीटर ऊपर स्थित यह स्कूल, गांव को पूर्वी तट से जोड़ने वाले स्टील के पुल के समान स्तर पर था. तभी एक अभिभावक और भी चिंताजनक संदेश लेकर अंदर आया: पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा था. दवाड़ी ने तुरंत स्कूल की घंटी बजाई और शिक्षकों को कक्षाओं को खाली करने का आदेश दिया. उन्होंने स्कूल बस चालकों को बुलाया और एक को छोड़कर बाकी सभी को वापस लौटने के लिए कहा. तभी उन्होंने उस बस को पुल पार करते देखा, जिस तक वे नहीं पहुँच पा रहे थे. तब तक बच्चों को यह एहसास होने लगा था कि वे खतरे में हैं. द टाइम्स के अनुसार, बाकी बच्चे पैदल ही भाग गए और दावड़ी उनके पीछे-पीछे गया. बाढ़ के पानी में स्कूल की इमारतें बह जाने के बाद बच्चे अंततः एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण लेने चले गए.
लोग कर रहे तारीफ
स्थानीय लोगों ने दवाड़ी को बच्चों की जान बचाने के लिए हीरो कहा है. लेकिन वह खुद इससे सहमत नहीं हैं. “मैं और क्या कर सकता था?”, उन्होंने उस कीचड़ भरे खंडहर का जायजा लेते हुए कहा, जहां कभी स्कूल हुआ करता था. यह अचानक आई बाढ़ लांगटांग लिरुंग चोटी से टूटकर अलग हुए बर्फ और चट्टान के एक विशाल टुकड़े के कारण हुई, जो तिब्बत सीमा के पास ल्हेन्डे खोला नदी की खड़ी ऊपरी घाटी में लगभग 1,200 मीटर नीचे गिर गया. कैलगरी विश्वविद्यालय के भू-आकृति विज्ञानी डैनियल शुगार ने अनुमान लगाया कि यह भू-भाग लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ था, जो लंदन के ग्रीन पार्क के आकार के लगभग बराबर है.
इस क्षेत्र ने पहले भी त्रासदी झेली है. अप्रैल 2015 में, दक्षिण एशिया में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने 8,962 लोगों की जान ले ली थी और इसके बाद हिमस्खलन हुआ था जिसमें बाढ़ से तबाह रसुवा जिले में स्थित लांगटांग के सभी 300 निवासी दब गए थे. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में लगभग 2,498 लोग लापता हैं, जबकि तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 546 लोग लापता हैं.