Sleep shaming: कितना सो रहे हो? हर समय सोते ही रहते हो, सूरज निकल आया, लेकिन तुम अभी तक नहीं उठे, दोपहर में भी कोई सोता है? अगर आपके आसपास भी लोग अक्सर इस तरह की बातें कहते हैं, तो इसे महज मजाक या ताना समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. किसी व्यक्ति को उसकी नींद के लिए बार-बार शर्मिंदा करना या उसे कम सोने के लिए दबाव देना स्लीप शेमिंग कहलाता है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां कम सोने को मेहनत और ज्यादा सोने को आलस से जोड़ दिया जाता है, वहीं यह सोच लोगों की नींद को प्रभावित कर सकती है. कई बार व्यक्ति दूसरों के दबाव में अपनी जरूरत के मुताबिक नींद पूरी नहीं करता और धीरे-धीरे नींद की कमी उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है.
जब नींद को लेकर बनाया जाने लगे दबाव
स्लीप शेमिंग हमेशा सीधे तौर पर “सोना बंद करो” कहने तक सीमित नहीं होती. कई बार परिवार, दोस्त या आसपास के लोग मजाक-मजाक में ऐसी बातें कहते हैं, जिनसे व्यक्ति अपनी नींद को लेकर अपराधबोध महसूस करने लगता है. अगर कोई व्यक्ति बार-बार आपकी नींद पर सवाल उठाता है, आपको दूसरों से कम सोने की तुलना करने को कहता है या यह जताता है कि ज्यादा सोना आपकी कमजोरी है, तो यह भी स्लीप शेमिंग का हिस्सा हो सकता है. कई बार लोग यह कहकर खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश करते हैं कि वे सिर्फ चार या पांच घंटे सोते हैं और फिर भी पूरा दिन काम करते हैं. ऐसी तुलना दूसरे व्यक्ति पर भी कम सोने का दबाव बना सकती है. जबकि हर इंसान की नींद की जरूरत एक जैसी नहीं होती.
नींद में खलल डालना भी स्लीप शेमिंग का संकेत
स्लीप शेमिंग का एक रूप वह भी है, जब किसी व्यक्ति की नींद को जानबूझकर बाधित किया जाता है. उदाहरण के लिए, परिवार के लोग बार-बार कमरे का दरवाजा खोलकर या जोर से बंद करके किसी को जगाएं, लाइट या पंखा बंद कर दें या उसकी नींद पूरी होने से पहले उसे उठाने का दबाव बनाएं. इसी तरह दोस्तों या परिवार के सदस्य अगर यह जानते हुए भी कि आप आराम कर रहे हैं, आपकी नींद की जरूरत को नजरअंदाज करके लगातार योजनाएं बनाते हैं और आपके शामिल न होने पर आपको दोषी महसूस कराते हैं, तो यह भी नींद के प्रति असंवेदनशील व्यवहार माना जा सकता है.
नींद पूरी न होने से बढ़ सकती हैं परेशानियां
बार-बार नींद में बाधा पड़ने या पर्याप्त नींद न लेने से व्यक्ति दिनभर थकान महसूस कर सकता है. नींद की कमी का असर मूड, एकाग्रता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है. लगातार नींद पूरी न होने पर तनाव बढ़ सकता है और व्यक्ति चिड़चिड़ापन महसूस कर सकता है. लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलने की स्थिति में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है. फोकस में कमी आने से पढ़ाई, नौकरी या अन्य जरूरी कामों पर भी असर पड़ सकता है.
हर व्यक्ति के लिए नींद की जरूरत अलग होती है
नींद को लेकर सबसे जरूरी बात यह समझना है कि हर व्यक्ति की जरूरत एक जैसी नहीं होती. किसी व्यक्ति को अपेक्षाकृत कम नींद में भी आराम महसूस हो सकता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति को अधिक समय तक सोने की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए सिर्फ इसलिए अपनी नींद कम करना सही नहीं है क्योंकि कोई दूसरा व्यक्ति कम घंटे सोता है. अपनी दिनचर्या, शरीर की जरूरत और नींद के बाद महसूस होने वाली ताजगी को ध्यान में रखना जरूरी है.
नींद को भी दें अपनी जिंदगी में प्राथमिकता
स्लीप शेमिंग से बचने के लिए सबसे पहले अपनी नींद की जरूरत को समझना जरूरी है. अगर आपको पर्याप्त नींद लेने के बाद ही शरीर और दिमाग आराम महसूस करते हैं, तो केवल दूसरों की बातों के कारण अपनी नींद कम करने से बचें. अपनी नींद के लिए एक स्पष्ट सीमा तय करना भी जरूरी है. परिवार और दोस्तों को यह समझाना चाहिए कि पर्याप्त नींद आलस नहीं है, बल्कि स्वस्थ दिनचर्या का जरूरी हिस्सा है. अगर किसी व्यक्ति को लगातार नींद से जुड़ी समस्या, अत्यधिक नींद, अनिद्रा या दिनभर असामान्य थकान रहती है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर हो सकता है. आखिरकार, नींद को लेकर दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने शरीर की जरूरत को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है. पूरी और गुणवत्तापूर्ण नींद व्यक्ति को अगले दिन बेहतर ऊर्जा, ध्यान और कार्यक्षमता के साथ आगे बढ़ने में मदद कर सकती है.