19 Minute Viral Video: 19 मिनट वायरल वीडियो को लेकर हर तरफ अब भी चर्चा तेज है. 19 Minute 34 Second Viral Video के वीडियो इंटरनेट सुरक्षा को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं. लोग इस वीडियो को इंटरनेट पर खोज रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे देखने का अपना अनुभव भी साझा कर रहे हैं; लेकिन, इस वीडियो के अस्तित्व का कोई भी पुख्ता सबूत मौजूद नहीं है. यह विषय अब एक व्यापक चर्चा का विषय बन गया है, जिसका फायदा उठाकर जालसाज़ उन लोगों को ठग रहे हैं जो इस बारे में और अधिक जानना चाहते हैं. वहीं अब लोग इस वीडियो के पार्ट 2 और पार्ट 3 को भी खोजना शुरू कर चुके हैं.
क्या आ गया 19 Minute Viral Video का पार्ट 2-3 ?
हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि 19 Minute Viral Video के “भाग 2” और “भाग 3” की खोज भी काफी बढ़ गई है, जबकि इस बात का भी कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है कि इसके पार्ट वास्तव में मौजूद भी हैं या नहीं. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक सामान्य तरीका है, जिसके माध्यम से कई तरह की नकली सामग्री तैयार की जाती है; इस सामग्री का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुँचाना और उन्हें ठगना है. इसके अलावा अन्य वेब सामग्री की ओर भटकाना भी इसका एक मकसद है.
ऐसे धोखाधड़ी में शामिल कर रहे जालसाज
इस बात की भी पूरी संभावना है कि इंटरनेट पर साझा किए जा रहे कुछ वीडियो में ‘डीपफेक’ (deepfake) तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो. यह AI-आधारित तकनीक ऐसे गंदी वीडियो तैयार करती है, जो देखने में तो बिल्कुल असली लगते हैं, लेकिन वास्तव में वो पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे होते हैं. जालसाज़ इस तरह की सामग्री का उपयोग करके झूठी खबरें फैलाते हैं, ताकि वो लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर सकें और अपनी धोखाधड़ी की गतिविधियों को अंजाम दे सकें.
19 Minute Viral Video की तरह के वायरल विवाद यह दर्शाते हैं कि किस तेज़ी से इंटरनेट पर फैलने वाली गतिविधियाँ लोगों के लिए एक जाल बन जाती हैं. लोगों की जिज्ञासा उन्हें खतरनाक स्थितियों में फँसा देती है, जिसकी वजह से वो अनजाने में असुरक्षित वेबसाइटों को खोल लेते हैं और अपनी निजी जानकारी (डेटा) साझा कर बैठते हैं.