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वैज्ञानिकों में उत्साह का माहौल! जीवन में एक बार भी इस जीव का दिखना होता है दुर्लभ

Rare White Whale: ह्वेल आमतौर पर ग्रे या स्लेटी रंग की होती है, लेकिन इन दिनों एक ह्वेल अपने विशेष रंग को लेकर चर्चा में है. इस ह्वेल का रंग दूधिया सफेद रंग का है. इसका नाम सियाले है. हाल ही में आर्कटिक क्षेत्र में यह मछली देखी गई है.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 15, 2026 13:48:53 IST

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Rare White Whale: ह्वेल आमतौर पर ग्रे या स्लेटी रंग की होती है, लेकिन इन दिनों एक ह्वेल अपने विशेष रंग को लेकर चर्चा में है. इस ह्वेल का रंग दूधिया सफेद रंग का है. इसका नाम सियाले है. हाल ही में आर्कटिक क्षेत्र में यह मछली देखी गई है.

फ़िरोज़ी पानी में चमकता उसका शानदार सफ़ेद शरीर, पानी से बाहर उसकी हर छलांग को ज़िंदगी में एक बार दिखने वाले अद्भुत नज़ारे में बदल देता है. बेहद दुर्लभ, बेहद मनमोहक और अविस्मरणीय सियाले अब तक कैमरे में कैद हुई सबसे असाधारण व्हेल दृश्यों में से एक है, जिसने समुद्री शोधकर्ताओं और समुद्र प्रेमियों, दोनों का ही वैश्विक ध्यान अपनी ओर खींचा है.

सफेद ह्वेल के बारे में

सफेद व्हेल आमतौर पर आर्कटिक बेलुगा व्हेल (डेल्फ़िनैप्टेरस ल्यूकस) होती है , जो अपनी सफेद त्वचा और 35-50 साल के जीवनकाल के लिए जानी जाती है.   इन्हें “सफेद व्हेल” या “मेलनहेड” के नाम से जाना जाता है। ये छोटे, दांतों वाले समुद्री स्तनधारी जीव हैं जो आर्कटिक और उप-आर्कटिक क्षेत्रों में रहते हैं और मछली और क्रस्टेशियन खाते हैं. वास्तविक जीवन में पाई जाने वाली सफेद हंपबैक व्हेल अत्यंत दुर्लभ होती हैं (लगभग 40,000 में से एक) और समुद्री अनुसंधान में इनका विशेष महत्व है. बेलुगा व्हेल का शरीर डॉल्फ़िन और ट्रूज़ बीक्ड व्हेल के बीच का होता है , नर 5.5 मीटर (18 फीट) तक लंबे और 1,600 किलोग्राम (3,530 पाउंड) तक वजनी हो सकते हैं.

आर्कटिक क्षेत्र में मिलती है ये दुर्लभ मछली

बेलुगा व्हेल आर्कटिक क्षेत्र में जीवन के लिए अनुकूलित है, और इसकी शारीरिक और क्रियात्मक विशेषताएं इसे अन्य व्हेल से अलग करती हैं. इनमें इसका पूर्णतः सफेद रंग और पृष्ठीय पंख की अनुपस्थिति शामिल है , जो इसे बर्फ के नीचे आसानी से तैरने में सक्षम बनाती है. इसके सिर के अग्रभाग पर एक विशिष्ट उभार होता है जिसमें मेलन नामक एक प्रतिध्वनि अंग होता है , जो इस प्रजाति में बड़ा और लचीला होता है.

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Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 15, 2026 13:48:53 IST

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Rare White Whale: ह्वेल आमतौर पर ग्रे या स्लेटी रंग की होती है, लेकिन इन दिनों एक ह्वेल अपने विशेष रंग को लेकर चर्चा में है. इस ह्वेल का रंग दूधिया सफेद रंग का है. इसका नाम सियाले है. हाल ही में आर्कटिक क्षेत्र में यह मछली देखी गई है.

फ़िरोज़ी पानी में चमकता उसका शानदार सफ़ेद शरीर, पानी से बाहर उसकी हर छलांग को ज़िंदगी में एक बार दिखने वाले अद्भुत नज़ारे में बदल देता है. बेहद दुर्लभ, बेहद मनमोहक और अविस्मरणीय सियाले अब तक कैमरे में कैद हुई सबसे असाधारण व्हेल दृश्यों में से एक है, जिसने समुद्री शोधकर्ताओं और समुद्र प्रेमियों, दोनों का ही वैश्विक ध्यान अपनी ओर खींचा है.

सफेद ह्वेल के बारे में

सफेद व्हेल आमतौर पर आर्कटिक बेलुगा व्हेल (डेल्फ़िनैप्टेरस ल्यूकस) होती है , जो अपनी सफेद त्वचा और 35-50 साल के जीवनकाल के लिए जानी जाती है.   इन्हें “सफेद व्हेल” या “मेलनहेड” के नाम से जाना जाता है। ये छोटे, दांतों वाले समुद्री स्तनधारी जीव हैं जो आर्कटिक और उप-आर्कटिक क्षेत्रों में रहते हैं और मछली और क्रस्टेशियन खाते हैं. वास्तविक जीवन में पाई जाने वाली सफेद हंपबैक व्हेल अत्यंत दुर्लभ होती हैं (लगभग 40,000 में से एक) और समुद्री अनुसंधान में इनका विशेष महत्व है. बेलुगा व्हेल का शरीर डॉल्फ़िन और ट्रूज़ बीक्ड व्हेल के बीच का होता है , नर 5.5 मीटर (18 फीट) तक लंबे और 1,600 किलोग्राम (3,530 पाउंड) तक वजनी हो सकते हैं.

आर्कटिक क्षेत्र में मिलती है ये दुर्लभ मछली

बेलुगा व्हेल आर्कटिक क्षेत्र में जीवन के लिए अनुकूलित है, और इसकी शारीरिक और क्रियात्मक विशेषताएं इसे अन्य व्हेल से अलग करती हैं. इनमें इसका पूर्णतः सफेद रंग और पृष्ठीय पंख की अनुपस्थिति शामिल है , जो इसे बर्फ के नीचे आसानी से तैरने में सक्षम बनाती है. इसके सिर के अग्रभाग पर एक विशिष्ट उभार होता है जिसमें मेलन नामक एक प्रतिध्वनि अंग होता है , जो इस प्रजाति में बड़ा और लचीला होता है.

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