15 August Special: आजादी के 50 साल बाद भी आम लोगों के लिए गैर-कानूनी था तिरंगा फहराना! जानिए किस शख्स ने सरकार से लड़कर बदला कानून?
Naveen Jindal: 15 अगस्त पर पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंगने जा रहा है. हर घर, हर गली में तिरंगा फहराया जाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब आजादी के 50 साल बाद भी आम नागरिकों के लिए साल के 365 दिन अपनी निजी संपत्ति पर राष्ट्रध्वज फहराना कानूनी रूप से आसान नहीं था? जानिए उस 7 साल लंबी कानूनी जंग और ऐतिहासिक फैसले की कहानी, जिसने हर भारतीय को अपने सीने से तिरंगा लगाने और 365 दिन इसे गर्व से फहराने का मौलिक अधिकार दिलाया.
15 अगस्त पर देशप्रेम और तिरंगे का गौरव
15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर की तैयारी पुरे देश में जोर शोर से हो रही है. इस दिन फहराए जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव और अखंडता का प्रतीक है, जिसके नीचे देश का हर नागरिक समान है, चाहे वह अमीर हो या गरीब.
साल के 365 दिन तिरंगा फहराने का अधिकार किसने दिया?
अक्सर लोग स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर ही तिरंगा फहराते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम नागरिकों को साल के 365 दिन अपनी निजी संपत्ति पर तिरंगा फहराने का अधिकार किसने दिलाया? यह ऐतिहासिक अधिकार उद्योगपति और पूर्व सांसद नवीन जिंदल की बदौलत मिला है.
अमेरिका के छात्र जीवन से जगा था तिरंगे का जुनून
नवीन जिंदल के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति यह अटूट प्रेम संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान जगा था. 1992 में भारत लौटने के बाद उन्होंने देशभक्ति का परिचय देते हुए अपनी फैक्ट्री में रोजाना (365 दिन) तिरंगा फहराना शुरू कर दिया था.
जब प्रशासन ने लगाई रोक और दी चेतावनी
उस समय देश के पुराने फ्लैग कोड के तहत आम नागरिकों को रोजाना तिरंगा फहराने की अनुमति नहीं थी. इस वजह से स्थानीय जिला प्रशासन ने नवीन जिंदल को अपनी फैक्ट्री में तिरंगा फहराने से रोक दिया और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई व दण्डित करने की चेतावनी दी.
कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
प्रशासन की रोक से पीछे हटने के बजाय नवीन जिंदल ने इसे हर भारतवासी के स्वाभिमान से जोड़ा. उन्होंने तर्क दिया कि अपने देश के ध्वज को सम्मानपूर्वक फहराना हर नागरिक का मौलिक अधिकार होना चाहिए. इसके लिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
7 साल की लंबी कानूनी जंग
यह लड़ाई आसान नहीं थी. आम नागरिकों को हर दिन तिरंगा फहराने का हक दिलाने के लिए नवीन जिंदल को 7 साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. उन्होंने अदालत के सामने मजबूती से देशवासियों के राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान का पक्ष रखा.
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
7 साल की कानूनी जंग के बाद 23 जनवरी 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत सम्मानपूर्वक राष्ट्र ध्वज फहराना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. इस फैसले ने देश के हर आम आदमी को 365 दिन तिरंगा फहराने की आजादी दी.
अखंड ज्योति की तरह दिन-रात फहराने की छूट
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और बाद में फ्लैग कोड में हुए संशोधनों के बाद, अब नागरिक न सिर्फ 365 दिन बल्कि इसे 'अखंड ज्योति' की तरह दिन हो या रात, कभी भी गर्व और सम्मान के साथ फहरा सकते हैं.