कभी बजाते थे तबला, होटल में गाकर जुटाए पैसे, किशोर कुमार की नकल का लगा आरोप; ऐसे बने 90s के रोमांटिक सिंगर
Kumar Sanu: कुमार शानू के नाम से मशहूर केदारनाथ भट्टाचार्य ने शुरुआत में सिंगर बनने का सपना देखा ही नहीं था. उनके पिता पशुपति भट्टाचार्य खुद संगीत से जुड़े थे और घर में शास्त्रीय संगीत का माहौल रहता था. शानू तबला बजाते थे और इसी दौरान धीरे-धीरे उनका झुकाव गायकी की तरफ बढ़ने लगा. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि घर में उनके कानों को शास्त्रीय संगीत सुनाई देता था लेकिन दिल कमर्शियल हिंदी फिल्मों के गानों में लगता था. लगभग 16 साल की उम्र में उन्होंने स्टेज शो शुरू किए.
मुंबई आकर होटल में गाए गाने
बॉलीवुड में जगह बनाने के लिए शानू मुंबई पहुंचे. यहां गायकी की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुंबई आने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने होटलों में गाना शुरू कर दिया था. लगभग छह-सात साल तक वह होटल में गाते रहे और जो पैसे मिलते, उन्हें अपने डेमो कैसेट बनाने में लगाते थे. फिर वही कैसेट लेकर वह संगीतकारों के पास जाते थे.
जगजीत सिंह ने दिखाई मुंबई की राह
कुमार शानू की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह ने उनकी आवाज सुनी. उन्होंने शानू को संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी से मिलवाया. इसके बाद उन्हें फिल्म जादूगर में गाना गाने का मौका मिला. इसी दौर में उनका नाम केदारनाथ भट्टाचार्य से बदलकर कुमार शानू हुआ.
किशोर कुमार की नकल का आरोप
किशोर कुमार हमेशा कुमार शानू के लिए प्रेरणा रहे. वह उनके गाने गाकर ही लोगों के बीच पहचाने जाने लगे थे. आगे चलकर ये उनके लिए परेशानी बन गई. लोगों ने उनकी आवाज को किशोर कुमार से मिलता-जुलता बताते हुए उन्हें 'किशोर कुमार का क्लोन' और नकल करने वाला तक कह दिया.
फिल्म आशिकी से बदली किस्मत
साल 1990 में आशिकी फिल्म रिलीज हुई. ये कुमार शानू की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा. फिल्म के ज्यादातर पुरुष सोलो गाने उनकी आवाज में थे. फिल्म में सांसों की जरूरत है जैसे, तू मेरी जिंदगी है, धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना और अब तेरे बिन जैसे गाने दिए. इन गानों ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई. इस फिल्म के गानों से किशोर कुमार के साथ ही संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण के करियर को भी नई ऊंचाई मिली.
इन फिल्मों में दिए बेहतरीन गाने
आशिकी फिल्म के बाद किशोर कुमार का दौर आया. उन्होंने साजन, दीवाना, बाजीगर, दिलवाले दुलहनियां ले जाएंगे, 1942: ए लव स्टोरी, राजा हिंदुस्तानी, परदेस और कुछ-कुछ होता है, जैसी फिल्मों के लिए गाने गाए. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में लगातार पांच साल फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड जीतना शामिल है. उन्होंने 1991 से 1995 तक लगातार यह पुरस्कार जीता.
एक दिन में रिकॉर्ड किए 28 गाने
कुमार शानू के काम करने की रफ्तार ने लोगों को हैरान कर दिया था. 1993 में उन्होंने एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड किए थे. इसके लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ. 90 के दशक में कुमार सानू की तगड़ी फैन फॉलोइंग बनी थी, जो आज तक कायम है.