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कहीं समुद्र में गायब होता है शिवलिंग तो कहीं बिजली गिरने से टूटता है, ये हैं शिव के रहस्यमयी मंदिर

Mysterious Shiva temple: भारत में कई ऐसे शिव मंदिर हैं जो अपनी अनोखी प्राकृतिक परिस्थितियों और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास हैं. गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव और निष्कलंक महादेव समुद्र के ज्वार-भाटा से जुड़े हैं, राजस्थान के अचलेश्वर महादेव में शिवलिंग के रंग बदलने की मान्यता है, छत्तीसगढ़ के लक्ष्मणेश्वर महादेव में लक्षलिंग और हिमाचल के बिजली महादेव में आकाशीय बिजली से जुड़ी परंपरा प्रसिद्ध है.

Last Updated: August 10, 2026 | 5:16 PM IST
The mystery of these Shiva temples in India still remains. - Photo Gallery
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भारत के इन शिव मंदिरों का रहस्य आज भी बरकरा

भारत में भगवान शिव के अनगिनत मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी अनोखी प्राकृतिक परिस्थितियों और उनसे जुड़ी मान्यताओं के कारण बेहद खास माने जाते हैं. कहीं समुद्र का पानी शिवलिंग को पूरी तरह ढक लेता है तो कहीं शिवलिंग के रंग बदलने की मान्यता है. हिमालय में स्थित एक मंदिर में आकाशीय बिजली गिरने से शिवलिंग के खंडित होने की लोकमान्यता भी है. आइए सावन के इस पवित्र अवसर पर ऐसे ही 5 रहस्यमयी शिव मंदिरों के बारे में जानते हैं.

Stambheshwar Mahadev, the temple that disappears into the sea in Gujarat - Photo Gallery
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स्तंभेश्वर महादेव, गुजरात में समुद्र में गायब हो जाता है मंदिर

गुजरात के भरूच जिले के कावी-कंबोई में स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी प्राकृतिक घटना के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर खंभात की खाड़ी के किनारे स्थित है और ज्वार आने पर शिवलिंग समेत मंदिर का बड़ा हिस्सा समुद्र के पानी में डूब जाता है. ज्वार उतरने के बाद मंदिर और शिवलिंग फिर दिखाई देने लगते हैं. इसी वजह से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए ज्वार-भाटा के समय का विशेष ध्यान रखते हैं. इस घटना को प्राकृतिक रूप से ज्वार-भाटा से जोड़ा जाता है, जबकि धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर के वध के बाद शिवलिंग की स्थापना की थी.

Immaculate Mahadev, the sea performs Jalabhishek in Gujarat - Photo Gallery
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निष्कलंक महादेव, गुजरात में समुद्र करता है जलाभिषेक

गुजरात के भावनगर जिले के कोलियाक तट से समुद्र के भीतर स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी स्थिति के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखता है. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता ज्वार-भाटा पर निर्भर करता है. ज्वार आने पर मंदिर पानी से घिर जाता है और पानी उतरने के बाद श्रद्धालु समुद्र के बीच बने रास्ते से यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान कृष्ण की सलाह पर यहां आए थे और अपने पापों से मुक्ति के लिए शिव की आराधना की थी. इसी कथा के कारण इस स्थान को निष्कलंक महादेव कहा जाता है.

The color of the Shivalinga changes at Achaleshwar Mahadev, Dholpur - Photo Gallery
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अचलेश्वर महादेव, धौलपुर में बदलता है शिवलिंग का रंग

राजस्थान के धौलपुर जिले में चंबल क्षेत्र के पास स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी मान्यता के लिए जाना जाता है. यहां के शिवलिंग के बारे में स्थानीय मान्यता है कि इसका रंग दिन में तीन बार बदलता है. सुबह यह लाल, दोपहर में केसरिया और शाम के समय गहरा दिखाई देने की बात कही जाती है. कुछ स्रोत इस बदलाव को सूर्य की रोशनी से जोड़ते हैं, जबकि श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं. शिवलिंग की गहराई को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं और कहा जाता है कि इसकी गहराई का अंतिम छोर पता नहीं चल सका.

Lakshmaneshwar Mahadev, a Shivalinga with one lakh holes in Chhattisgarh - Photo Gallery
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लक्ष्मणेश्वर महादेव, छत्तीसगढ़ में एक लाख छिद्र वाला शिवलिंग

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के खरौद में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अपने अनोखे शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. यहां स्थापित शिवलिंग को ‘लक्षलिंग’ कहा जाता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार इसमें करीब एक लाख छोटे-छोटे छिद्र हैं. इनमें से एक छिद्र को पातालपुरी जाने का मार्ग माना जाता है, क्योंकि उसमें डाला गया जल दिखाई नहीं देता. वहीं एक अन्य छिद्र को अक्षय छिद्र या अक्षय कुंड से जोड़ा जाता है, जिसमें पानी हमेशा भरा रहने की मान्यता है. मंदिर से जुड़ी धार्मिक कथा में इसे भगवान राम के भाई लक्ष्मण से भी जोड़ा जाता है.

Lightning strikes Shivling in Bijli Mahadev, Kullu - Photo Gallery
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बिजली महादेव, कुल्लू में शिवलिंग पर गिरती है आकाशीय बिजली

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भगवान शिव के अनोखे धामों में गिना जाता है. यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां से कुल्लू तथा पार्वती घाटी का खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है. स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार लगभग 12 साल के अंतराल पर आकाशीय बिजली शिवलिंग पर गिरती है और शिवलिंग खंडित हो जाता है. इसके बाद पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को मक्खन आदि की पारंपरिक सामग्री से जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह फिर ठोस रूप में दिखाई देने लगता है. यह घटना स्थानीय आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

The beliefs associated with these temples make them special. - Photo Gallery
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इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं बनाती हैं इन्हें खास

इन पांचों शिव मंदिरों की खासियत अलग-अलग है. स्तंभेश्वर महादेव में ज्वार के कारण मंदिर समुद्र में डूब जाता है, निष्कलंक महादेव तक पहुंचने का रास्ता भी समुद्र के ज्वार पर निर्भर करता है. अचलेश्वर महादेव के शिवलिंग के रंग बदलने की मान्यता है, जबकि लक्ष्मणेश्वर महादेव में एक लाख छिद्र वाला लक्षलिंग होने की धार्मिक मान्यता प्रचलित है. वहीं कुल्लू के बिजली महादेव में आकाशीय बिजली से शिवलिंग के खंडित होने और फिर उसे दोबारा जोड़ने की परंपरा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का विषय है.

Visiting these Shiva shrines in the month of Sawan has a special significance. - Photo Gallery
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सावन में इन शिव धामों के दर्शन का अलग महत्व

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और सोमवार को शिव आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसे में इन अनोखे शिव मंदिरों की धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक विशेषताओं के बारे में जानना भी काफी दिलचस्प है. हालांकि इन मंदिरों से जुड़े कई चमत्कार और रहस्य स्थानीय आस्था, परंपरा और लोककथाओं पर आधारित हैं. अगर आप इनमें से किसी मंदिर की यात्रा करना चाहते हैं तो मौसम, ज्वार-भाटा, स्थानीय प्रशासन के निर्देश और मंदिर के दर्शन समय की जानकारी पहले जरूर ले लें. खासकर समुद्र के बीच स्थित मंदिरों में ज्वार के समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है.

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