भारतीय क्रिकेट में जब बेहतरीन विकेटकीपरों की बात होती है तो किरण मोरे का नाम जरूर लिया जाता है. उन्होंने अपने करियर में कई यादगार उपलब्धियां हासिल कीं. मैदान पर उन्होंने एक ऐसा पल भी देखा, जिसने भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता को और चर्चित बना दिया. वहीं, मैदान के बाहर कुछ ऐसे फैसले और विवाद भी उनके नाम से जुड़े, जिनकी वजह से उन्हें क्रिकेट फैंस की नाराजगी झेलनी पड़ी. लेकिन किरण मोरे की कहानी सिर्फ विवादों तक सीमित नहीं है. उनका क्रिकेट करियर कई दिलचस्प किस्सों और शानदार रिकॉर्ड से भरा हुआ है.
किरण मोरे का जन्म 4 सितंबर 1962 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था. उन्होंने 1984 में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की. भारत के लिए उनका वनडे डेब्यू इंग्लैंड के खिलाफ पुणे में हुआ था. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्हें सबसे खास पहचान 1988 में मिली, जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी कायम है.
एक टेस्ट में 6 स्टंपिंग कर रचा इतिहास
साल 1988 में चेन्नई में भारत और वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट मैच खेला गया. यह मुकाबला भारतीय लेग स्पिनर नरेंद्र हिरवानी के लिए भी बेहद खास था, क्योंकि उन्होंने इसी मैच से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था.
हिरवानी की शानदार गेंदबाजी और किरण मोरे की बेहतरीन विकेटकीपिंग ने मिलकर इतिहास रच दिया. मोरे ने मैच की एक पारी में 5 बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया, जबकि पूरे मुकाबले में उन्होंने कुल 6 स्टंपिंग कीं. टेस्ट क्रिकेट में एक पारी में 5 और एक मैच में 6 स्टंपिंग का यह रिकॉर्ड आज भी विश्व रिकॉर्ड है.
ग्राहम गूच का कैच छोड़ना पड़ा भारी
किरण मोरे के करियर का एक ऐसा किस्सा भी है, जिसे वह शायद कभी नहीं भूल पाए. साल 1990 में भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में टेस्ट मैच खेला गया था. मुकाबले में इंग्लैंड के बल्लेबाज ग्राहम गूच 36 रन पर थे. संजीव शर्मा की गेंद पर उन्होंने एक आसान कैच दिया, लेकिन मोरे इसे पकड़ नहीं सके. इसके बाद गूच ने ऐसा बल्ला चलाया कि भारतीय टीम के लिए मुश्किल खड़ी हो गई. उन्होंने पहली पारी में 333 रन की विशाल पारी खेली. इसके बाद दूसरी पारी में भी 123 रन बना दिए. भारत यह मुकाबला 247 रन से हार गया. ऐसे में मोरे का छोड़ा हुआ कैच लंबे समय तक चर्चा में रहा.
जब जावेद मियांदाद ने मैदान पर की अजीब हरकत
भारत और पाकिस्तान के बीच 1992 विश्व कप का मुकाबला क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार मैचों में गिना जाता है. इस मैच में किरण मोरे और पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज जावेद मियांदाद के बीच मैदान पर हुआ एक मजेदार वाकया आज भी याद किया जाता है. मोरे लगातार अपील कर रहे थे, जिससे मियांदाद काफी परेशान हो गए. आखिरकार उन्होंने अपना आपा खो दिया और मोरे के सामने खड़े होकर उछलने लगे. मैदान पर मियांदाद का यह अंदाज देखकर हर कोई हैरान रह गया. बाद में यह घटना भारत-पाकिस्तान क्रिकेट की चर्चित तस्वीरों और किस्सों में शामिल हो गई.
सौरव गांगुली को टीम से बाहर करने पर हुआ विवाद
किरण मोरे ने सिर्फ विकेटकीपर के तौर पर ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रशासन में भी अहम भूमिका निभाई. वह 2002 से 2006 तक भारतीय टीम की चयन समिति के प्रमुख रहे. इसी दौरान भारतीय क्रिकेट में सौरव गांगुली और तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल के बीच विवाद ने खूब सुर्खियां बटोरीं. उस दौर में गांगुली को टीम से बाहर किए जाने के फैसले को लेकर मोरे की भी काफी आलोचना हुई. कई क्रिकेट फैंस उनके इस फैसले से नाराज थे और उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.
ICL से जुड़ने के बाद BCCI ने लगाया था बैन
साल 2007 में इंडियन क्रिकेट लीग यानी ICL की शुरुआत हुई. किरण मोरे को इस लीग में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की जिम्मेदारी मिली. ICL को लेकर उस समय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI का रुख काफी सख्त था. लीग से जुड़ने के कारण किरण मोरे के अलावा कपिल देव और कुछ अन्य पूर्व क्रिकेटरों पर भी BCCI ने प्रतिबंध लगाया था.
वनडे करियर में नहीं लगा पाए एक भी अर्धशतक
किरण मोरे ने भारत के लिए 94 वनडे मैच खेले. इन मुकाबलों की 65 पारियों में उन्होंने 563 रन बनाए. उनका बल्लेबाजी औसत 13.09 रहा और वह 22 बार नाबाद लौटे. दिलचस्प बात यह है कि मोरे अपने पूरे वनडे करियर में एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके. उनका सबसे बड़ा स्कोर नाबाद 42 रन रहा. हालांकि, उनकी असली ताकत बल्लेबाजी नहीं बल्कि विकेटकीपिंग थी.
किरण मोरे के करियर के आंकड़े
- किरण मोरे ने भारत के लिए 49 टेस्ट मैच खेले और 1,285 रन बनाए.
- टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 130 डिसमिसल हैं.
- टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 73 रन रहा.
- उन्होंने 94 वनडे मैचों में 563 रन बनाए.
- वनडे में उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 42 रन रहा.
- फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 5,223 रन बनाए.
- फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 181 रन रहा.
- वह 2002 से 2006 तक BCCI चयन समिति के चेयरमैन रहे.