October November 2026 festival: त्योहारों का मौसम अब दस्तक देने वाला है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में पितृपक्ष शुरू होने के बाद अक्टूबर और नवंबर में लगातार कई बड़े व्रत और त्योहार पड़ेंगे. शारदीय नवरात्र, दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे पर्वों को लेकर अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं. परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए लोग यात्रा और खरीदारी की योजना भी बना रहे हैं.
27 सितंबर से पितृपक्ष, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होगी और सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को पड़ेगी. इसके अगले ही दिन यानी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी. इस तरह पितृपक्ष के समापन के तुरंत बाद देशभर में नवरात्र की तैयारियां शुरू हो जाएंगी.
11 अक्टूबर से नवरात्र, 20 अक्टूबर को दशहरा
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगी. नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा. इस दिन भगवान राम की पूजा के साथ कई जगहों पर रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है.
29 अक्टूबर को करवा चौथ
अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत करवा चौथ आएगा. 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं.
नवंबर में धनतेरस से शुरू होगी दिवाली की रौनक
नवंबर की शुरुआत के साथ त्योहारों की रफ्तार और बढ़ जाएगी. उपलब्ध पंचांग के अनुसार धनतेरस 5 नवंबर को मनाई जाएगी. इसके बाद नरक चतुर्दशी 7 नवंबर और दिवाली यानी लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को होगी. दिवाली के अगले दिन 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 10 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी.
15 नवंबर को छठ का मुख्य अर्घ्य
छठ पूजा भी नवंबर के प्रमुख पर्वों में शामिल रहेगी. छठ का चार दिवसीय क्रम नहाय-खाय, खरना और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपराओं के साथ आगे बढ़ता है. उपलब्ध पंचांग के अनुसार 2026 में छठ पूजा का मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को होगा.
20 नवंबर को देवउठनी एकादशी
त्योहारों के इस सिलसिले में देवउठनी एकादशी भी महत्वपूर्ण रहेगी. 2026 में यह व्रत 20 नवंबर को पड़ेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने के बाद शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत का समय माना जाता है.