13 सितंबर को दुबई में वही नजारा देखने को मिला, जो 2025 के पुरुष एशिया कप के दौरान हुआ था. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर 8वीं बार टी20 एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया. लेकिन जीत के बाद टीम इंडिया ने विजेता ट्रॉफी स्वीकार नहीं की.
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
इस विवाद के केंद्र में एशियाई क्रिकेट काउंसिल (ACC) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी हैं, जो पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं. नकवी खुद अपने हाथों से भारतीय टीम को ट्रॉफी देना चाहते थे. हालांकि, भारतीय टीम ने उनके हाथों से ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद नकवी बिना ट्रॉफी सौंपे ही स्टेडियम से चले गए. स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों ने इस दौरान “ट्रॉफी चोर” के नारे भी लगाए.
इसके बावजूद, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कुछ पाकिस्तानी प्रशंसक नकवी की तारीफ करते नजर आए.
तेजस नाम के यूजर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, ‘एक पाकिस्तानी फ़ैन ने मोहसिन नक़वी से कहा – “बहुत बढ़िया काम किया, सर. हम आपसे खुश हैं. वे (भारत) ट्रॉफ़ी के हक़दार नहीं हैं.’
‘असल में तो भारत ने ट्रॉफ़ी जीती, लेकिन पाकिस्तानी फ़ैन्स मोहसिन नक़वी की तारीफ़ कर रहे हैं कि उन्होंने ट्रॉफ़ी ‘हथिया’ ली.’
यूजर ने पाकिस्तान की चुटकी लेते हुए कहा कि ‘यही वजह है कि हैप्पीनेस इंडेक्स में पाकिस्तान भारत से आगे है.’
Pakistani fan to Mohsin Naqvi – “Good job, sir. We are happy with you. They don’t deserve the trophy.”
India literally won the trophy, but Pakistani fans are praising Mohsin Naqvi for stealing the trophy.
The reason why Pakistan is ahead of India in the Happiness Index 😹🙏 pic.twitter.com/xqiiUCEBuA
— Tejash (@lord_geopolitic) September 13, 2026
बीसीसीआई का रुख
बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने इस मामले पर रुख साफ करते हुए कहा कि हमारी नीति पहले से तय है. हम सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत टूर्नामेंट में सभी टीमों के खिलाफ खेलते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हर स्थिति में समझौता करेंगे. भारतीय बोर्ड ने पहले ही एसीसी को स्पष्ट कर दिया था कि वे नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगे.
मुख्य कोच का बयान
भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने कहा कि भारतीय टीम आधिकारिक तौर पर चैंपियन बन चुकी है. मैदान पर हमारा प्रदर्शन ही हमारी असली पहचान है, इसलिए मंच पर ट्रॉफी मिले या न मिले, इससे टीम की जीत और उसकी उपलब्धि पर कोई फर्क नहीं पड़ता.