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समय की पाबंदी में Delhi Metro का डंका, दुनिया के 3 बड़े मेट्रो सिस्टम को पछाड़ा, रचा इतिहास

दिल्ली मेट्रो ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है और एक बार फिर नया रिकॉर्ड सेट किया है. दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में दुनिया के तीन बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है.

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Last Updated: August 9, 2026 17:59:34 IST

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Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो को दिल्ली की लाइफ लाइन कहा जाता है. ये दिल्ली वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है. दिल्ली मेट्रो ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. रिकॉर्ड बनाने के लिए मशहूर दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में दुनिया के तीन बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है. इनमें हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे शामिल हैं.

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने इस उपलब्धि से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं. DMRC के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो का ऑपरेशनल प्रदर्शन काफी मजबूत है और इसे मापने के लिए बेहद सख्त नियम अपनाए जाते हैं.

59 सेकंड की देरी भी है अहम

दिल्ली मेट्रो की पंक्चुअलिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां ट्रेन को तब लेट माना जाता है, जब वह अपने डेस्टिनेशन स्टेशन पर तय समय से 59 सेकंड से ज्यादा देर से पहुंचती है। यानी एक मिनट से भी कम की देरी को लेकर भी नियम काफी सख्त हैं. वहीं, दुनिया के कई दूसरे मेट्रो सिस्टम में ट्रेन को कई मिनट की देरी के बाद लेट माना जाता है. ऐसे में सख्त मानकों के बावजूद दिल्ली मेट्रो का शानदार प्रदर्शन काफी खास है. 

DMRC ने टाइमिंग का रखा ख्याल

दिल्ली मेट्रो ने शुरुआत से ही समय की पाबंदी पर काफी ध्यान दिया है. साल 2003 में इसकी ट्रेन पंक्चुअलिटी 98.27 फीसदी थी. इसके सिर्फ दो साल बाद यानी 2005 में यह बढ़कर 99.64 फीसदी हो गई. इस उपलब्धि के साथ दिल्ली मेट्रो ने परिचालन शुरू होने के महज दो साल के भीतर ही दुनिया की उन चुनिंदा मेट्रो प्रणालियों में जगह बना ली, जिनकी पंक्चुअलिटी 99 फीसदी से ज्यादा है. इसके बाद भी दिल्ली मेट्रो का रिकॉर्ड लगातार मजबूत रहा. DMRC के अनुसार, कई वर्षों से इसकी ट्रेन पंक्चुअलिटी 99.9 फीसदी के आसपास बनी हुई है. 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 99.95 फीसदी हो गया है.

खराबी के मामले में भी भरोसेमंद

सिर्फ ट्रेन के समय पर पहुंचने से ही मेट्रो की विश्वसनीयता तय नहीं होती. ट्रेन में ऐसी खराबी कितनी बार आती है, जिससे सेवा प्रभावित हो, यह भी महत्वपूर्ण है. इसी को मापने के लिए Mean Distance Between Failures (MDBF) का इस्तेमाल किया जाता है. दिल्ली मेट्रो ने 2.72 मिलियन कार-किलोमीटर का MDBF हासिल किया है. इसके अलावा, दुनिया की 45 प्रमुख मेट्रो प्रणालियों के संगठन Community of Metros (COMET) की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्किंग में दिल्ली मेट्रो लगातार दुनिया की टॉप-5 सबसे भरोसेमंद मेट्रो प्रणालियों में शामिल रही है.

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Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो को दिल्ली की लाइफ लाइन कहा जाता है. ये दिल्ली वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है. दिल्ली मेट्रो ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. रिकॉर्ड बनाने के लिए मशहूर दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में दुनिया के तीन बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है. इनमें हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे शामिल हैं.

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने इस उपलब्धि से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं. DMRC के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो का ऑपरेशनल प्रदर्शन काफी मजबूत है और इसे मापने के लिए बेहद सख्त नियम अपनाए जाते हैं.

59 सेकंड की देरी भी है अहम

दिल्ली मेट्रो की पंक्चुअलिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां ट्रेन को तब लेट माना जाता है, जब वह अपने डेस्टिनेशन स्टेशन पर तय समय से 59 सेकंड से ज्यादा देर से पहुंचती है। यानी एक मिनट से भी कम की देरी को लेकर भी नियम काफी सख्त हैं. वहीं, दुनिया के कई दूसरे मेट्रो सिस्टम में ट्रेन को कई मिनट की देरी के बाद लेट माना जाता है. ऐसे में सख्त मानकों के बावजूद दिल्ली मेट्रो का शानदार प्रदर्शन काफी खास है. 

DMRC ने टाइमिंग का रखा ख्याल

दिल्ली मेट्रो ने शुरुआत से ही समय की पाबंदी पर काफी ध्यान दिया है. साल 2003 में इसकी ट्रेन पंक्चुअलिटी 98.27 फीसदी थी. इसके सिर्फ दो साल बाद यानी 2005 में यह बढ़कर 99.64 फीसदी हो गई. इस उपलब्धि के साथ दिल्ली मेट्रो ने परिचालन शुरू होने के महज दो साल के भीतर ही दुनिया की उन चुनिंदा मेट्रो प्रणालियों में जगह बना ली, जिनकी पंक्चुअलिटी 99 फीसदी से ज्यादा है. इसके बाद भी दिल्ली मेट्रो का रिकॉर्ड लगातार मजबूत रहा. DMRC के अनुसार, कई वर्षों से इसकी ट्रेन पंक्चुअलिटी 99.9 फीसदी के आसपास बनी हुई है. 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 99.95 फीसदी हो गया है.

खराबी के मामले में भी भरोसेमंद

सिर्फ ट्रेन के समय पर पहुंचने से ही मेट्रो की विश्वसनीयता तय नहीं होती. ट्रेन में ऐसी खराबी कितनी बार आती है, जिससे सेवा प्रभावित हो, यह भी महत्वपूर्ण है. इसी को मापने के लिए Mean Distance Between Failures (MDBF) का इस्तेमाल किया जाता है. दिल्ली मेट्रो ने 2.72 मिलियन कार-किलोमीटर का MDBF हासिल किया है. इसके अलावा, दुनिया की 45 प्रमुख मेट्रो प्रणालियों के संगठन Community of Metros (COMET) की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्किंग में दिल्ली मेट्रो लगातार दुनिया की टॉप-5 सबसे भरोसेमंद मेट्रो प्रणालियों में शामिल रही है.

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