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Punjab: पहले उठाया ड्रग्स का मुद्दा, फिर कर ली आत्महत्या; AAP के मंत्री का भी आ रहा नाम, जानें पूरा मामला

पंजाब में कुछ दिन पहले ड्रग्स का मामला उठाने वाले संगरूर जिले में रहने वाले गुलजार सिंह ने कीटनाशक का सेवन कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. उन्होंने आम आदमी पार्टी के मंत्री को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.

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Last Updated: September 8, 2026 12:36:49 IST

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पंजाब में सरकार द्वारा कथित तौर पर नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के कारण 50 वर्षीय एक व्यक्ति की आत्महत्या से हुई मौत एक बड़ा विवाद बन गई है, जिसमें विपक्षी दलों के नेता मामले की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.

पंजाब में कुछ दिन पहले ड्रग्स का मामला उठाने वाले संगरूर जिले में रहने वाले गुलजार सिंह ने कीटनाशक का सेवन करके अपना जीवन समाप्त कर लिया, लेकिन मरने से पहले वह लोगों से बात करने में कामयाब रहे.

AAP के मंत्री को ठहराया जिम्मेदार 

मृत्यु से पहले गुलजार सिंह ने कहा, “मेरी मौत के लिए चीमा भी जिम्मेदार है,” उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का जिक्र करते हुए यह बात कही, जिनसे उन्होंने मंत्री के एक गांव के दौरे के दौरान सीमावर्ती राज्य में नशीली दवाओं की समस्या के बारे में सवाल किया था. इसके बाद, गुलजार सिंह ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के नेता पर सवाल उठाने के बाद पुलिस उन्हें एक तरफ ले गई और माफी मांगने के लिए उन पर काफी दबाव डाला. गुलजार सिंह ने कहा, “मेरी मौत के लिए सरपंच भी जिम्मेदार है. मैंने चीमा से नशे के बारे में सवाल किया था. मेरा बेटा नशा करता है. मेरा घर बिक गया. मेरे पास कुछ भी नहीं बचा था और अब मैंने जहर खा लिया. पंजाब में कहीं भी नशे की समस्या का समाधान नहीं हुआ है.” 

गुलजार सिंह काफी समय से कर रहे थे नशे का विरोध 

सिंह के बेटे ने बताया कि उनके पिता द्वारा गांव में खुलेआम नशीली दवाओं की बिक्री का आरोप लगाने के बाद सरपंच भड़क गए. बेटे ने कहा, “सरपंच बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने मेरे पिता को खूब डांटा.” यह घटना उस घटना के कुछ ही दिनों बाद घटी है जब मुख्यमंत्री भगवंत मान की उपस्थिति वाले एक कार्यक्रम में काला झंडा लेकर नशीली दवाओं के दुरुपयोग का मुद्दा उठाने के लिए एक व्यक्ति को कथित तौर पर पुलिस हिरासत में यातना दी गई थी.

विपक्षी दलों ने जताई चिंता

विपक्षी दलों के नेताओं ने 50 वर्षीय व्यक्ति की आत्महत्या से हुई मौत की गहन जांच की मांग की है और पंजाब के वित्त मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है. कांग्रेस पार्टी ने कहा, “उनकी मौत राज्य भर में व्याप्त मादक पदार्थों के खतरे की एक कड़वी याद दिलाती है, जिसे आप पंजाब सरकार अपने करोड़ों के विज्ञापनों के जरिए छिपाने की कोशिश करती है. लेकिन सच्चाई को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता. इस निर्दोष व्यक्ति के खून के धब्बे आप पर हैं.”

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से ड्रग्स के मुद्दे पर सवाल किया. उन्होंने पूछा, “AAP सरकार ने इस बारे में कुछ क्यों नहीं किया?” भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि संगरूर के व्यक्ति ने इस त्रासदी के लिए चीमा को जिम्मेदार ठहराया है. 

पंजाब में नशा मुक्ति की स्थिति 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य द्वारा संचालित नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है. सरकारी नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती होने वालों की संख्या 2024 में 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 हो गई, जो 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है. जुलाई तक 14,000 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके थे, जिससे संकेत मिलता है कि इस वर्ष भी यह वृद्धि जारी है.

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पंजाब में सरकार द्वारा कथित तौर पर नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के कारण 50 वर्षीय एक व्यक्ति की आत्महत्या से हुई मौत एक बड़ा विवाद बन गई है, जिसमें विपक्षी दलों के नेता मामले की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.

पंजाब में कुछ दिन पहले ड्रग्स का मामला उठाने वाले संगरूर जिले में रहने वाले गुलजार सिंह ने कीटनाशक का सेवन करके अपना जीवन समाप्त कर लिया, लेकिन मरने से पहले वह लोगों से बात करने में कामयाब रहे.

AAP के मंत्री को ठहराया जिम्मेदार 

मृत्यु से पहले गुलजार सिंह ने कहा, “मेरी मौत के लिए चीमा भी जिम्मेदार है,” उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का जिक्र करते हुए यह बात कही, जिनसे उन्होंने मंत्री के एक गांव के दौरे के दौरान सीमावर्ती राज्य में नशीली दवाओं की समस्या के बारे में सवाल किया था. इसके बाद, गुलजार सिंह ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के नेता पर सवाल उठाने के बाद पुलिस उन्हें एक तरफ ले गई और माफी मांगने के लिए उन पर काफी दबाव डाला. गुलजार सिंह ने कहा, “मेरी मौत के लिए सरपंच भी जिम्मेदार है. मैंने चीमा से नशे के बारे में सवाल किया था. मेरा बेटा नशा करता है. मेरा घर बिक गया. मेरे पास कुछ भी नहीं बचा था और अब मैंने जहर खा लिया. पंजाब में कहीं भी नशे की समस्या का समाधान नहीं हुआ है.” 

गुलजार सिंह काफी समय से कर रहे थे नशे का विरोध 

सिंह के बेटे ने बताया कि उनके पिता द्वारा गांव में खुलेआम नशीली दवाओं की बिक्री का आरोप लगाने के बाद सरपंच भड़क गए. बेटे ने कहा, “सरपंच बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने मेरे पिता को खूब डांटा.” यह घटना उस घटना के कुछ ही दिनों बाद घटी है जब मुख्यमंत्री भगवंत मान की उपस्थिति वाले एक कार्यक्रम में काला झंडा लेकर नशीली दवाओं के दुरुपयोग का मुद्दा उठाने के लिए एक व्यक्ति को कथित तौर पर पुलिस हिरासत में यातना दी गई थी.

विपक्षी दलों ने जताई चिंता

विपक्षी दलों के नेताओं ने 50 वर्षीय व्यक्ति की आत्महत्या से हुई मौत की गहन जांच की मांग की है और पंजाब के वित्त मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है. कांग्रेस पार्टी ने कहा, “उनकी मौत राज्य भर में व्याप्त मादक पदार्थों के खतरे की एक कड़वी याद दिलाती है, जिसे आप पंजाब सरकार अपने करोड़ों के विज्ञापनों के जरिए छिपाने की कोशिश करती है. लेकिन सच्चाई को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता. इस निर्दोष व्यक्ति के खून के धब्बे आप पर हैं.”

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से ड्रग्स के मुद्दे पर सवाल किया. उन्होंने पूछा, “AAP सरकार ने इस बारे में कुछ क्यों नहीं किया?” भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि संगरूर के व्यक्ति ने इस त्रासदी के लिए चीमा को जिम्मेदार ठहराया है. 

पंजाब में नशा मुक्ति की स्थिति 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य द्वारा संचालित नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है. सरकारी नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती होने वालों की संख्या 2024 में 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 हो गई, जो 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है. जुलाई तक 14,000 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके थे, जिससे संकेत मिलता है कि इस वर्ष भी यह वृद्धि जारी है.

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