Live TV
Search
Home > राज्य > राजस्थान > मेरी 2 रानियां थीं हम…10 साल के कान्हाराम के दावों से पुनर्जन्म पर शुरू हुई बहस, हिल जाएगा दिमाग

मेरी 2 रानियां थीं हम…10 साल के कान्हाराम के दावों से पुनर्जन्म पर शुरू हुई बहस, हिल जाएगा दिमाग

Raja Man Singh Reincarnation: राजस्थान के टोंक जिले के रहने वाले 10 साल के कान्हाराम बैरवा ने दावा किया है कि वो आमेर का राजा मान सिंह हूं. घर में राजाओं वाली हरकत करता है. युद्ध की क्रीड़ाएं करता हैं.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 20, 2026 18:08:15 IST

Mobile Ads 1x1

Rajasthan Tonk Rebirth Case: राजस्थान के टोंक जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है. जो आपको दिमाग पर जोर डालने को मजबूर कर देगा. दरअसल, टोंक जिले के जैकमाबाद गांव के एक 10 साल के लड़के ने एक ऐसा दावा किया है. जिसकी वजह से फिर से पुनर्जन्म पर बहस शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले 10 साल के लड़के कान्हाराम बैरवा ने दावा किया है कि अपने पिछले जन्म में वह आमेर के प्रसिद्ध शासक राजा मानसिंह प्रथम थे.

जैसे ही 10 साल के इस लड़के ने ये दावा किया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. इस बच्चे ने आमेर महल के भीतर छिपे खजानों के बारे में बात की और शिला देवी मंदिर के इतिहास से जुड़ी ऐसी जानकारियां साझा कीं, जिन्हें आम तौर पर एक छोटे बच्चे की समझ से परे माना जाता है.

कान्हाराम के परिवार वालों का क्या कहना है?

कान्हाराम के परिवार वालों के अनुसार, उसके व्यवहार में बदलाव महज ढाई साल की उम्र से दिखने लगा था. उसकी मां ग्यारसी देवी का दावा है कि उन्होंने जो पहला शब्द बोला था वो राजा मान सिंह था. इसके अलावा, कान्हाराम ने अपने ही घर में भेदभाव करना शुरू कर दिया है. वो खुद को उच्च कुल का राजपूत मानकर साधारण बर्तनों में खाने से इन्कार कर देता है. वह घर में सिंहासन लगाकर बैठता है और युद्ध की क्रीड़ाएं करता है.

 कान्हाराम की मां का क्या मानना है?

उसकी मां का मानना है कि इस लड़के पर देवी शिला देवी का विशेष आशीर्वाद है और अष्टमी के दिन वह लोगों की समस्याओं का समाधान करता है. परिवार के लोग चाहते हैं कि वो आमेर के राजपरिवार तक पहुंचे ताकि बालक की जिज्ञासा शांत हो सके. कान्हाराम के दावों और हकीकत में बहुत फर्क नजर आ रहा है. कान्हाराम का दावा है कि उसने हल्दीघाटी की लड़ाई में हिस्सा लिया था और बंगाल से लाई गई मूर्ति को आमेर के शिला देवी मंदिर में स्थापित किया था.



कान्हाराम के दावों की क्या है सच्चाई?

वह शिला देवी की मूर्ति की गर्दन झुकी होने के पीछे की कहानी भी सुनाता है, जिसका कारण वह मानव बलि प्रथा का बंद होना बताता है. हालांकि मीडिया ने उस लड़के से गहराई से पूछताछ की तो कई विरोधाभास सामने आए. जब उससे राजा मान सिंह की मृत्यु के स्थान के बारे में पूछा गया तो उसने एक ‘अनाज मंडी’ का ज़िक्र किया, जबकि ऐतिहासिक रूप से उनकी मृत्यु दक्षिण भारत में हुई थी.

इसके अलावा, वह दावा करता है कि उसकी दो रानियां थीं और जोधा उसकी बुआ थीं, वहीं कैमरे के सामने वह आमेर महल या अन्य लड़ाइयों के बारे में सटीक जानकारी देने में असमर्थ रहा. दिलचस्प बात यह है कि कान्हाराम जो खुद को राजा होने का दावा करता है, वो विराट कोहली को अपना पसंदीदा क्रिकेटर मानता है और भविष्य में पुलिस अधिकारी बनने की इच्छा रखता है.

MORE NEWS

Home > राज्य > राजस्थान > मेरी 2 रानियां थीं हम…10 साल के कान्हाराम के दावों से पुनर्जन्म पर शुरू हुई बहस, हिल जाएगा दिमाग

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 20, 2026 18:08:15 IST

Mobile Ads 1x1

Rajasthan Tonk Rebirth Case: राजस्थान के टोंक जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है. जो आपको दिमाग पर जोर डालने को मजबूर कर देगा. दरअसल, टोंक जिले के जैकमाबाद गांव के एक 10 साल के लड़के ने एक ऐसा दावा किया है. जिसकी वजह से फिर से पुनर्जन्म पर बहस शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले 10 साल के लड़के कान्हाराम बैरवा ने दावा किया है कि अपने पिछले जन्म में वह आमेर के प्रसिद्ध शासक राजा मानसिंह प्रथम थे.

जैसे ही 10 साल के इस लड़के ने ये दावा किया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. इस बच्चे ने आमेर महल के भीतर छिपे खजानों के बारे में बात की और शिला देवी मंदिर के इतिहास से जुड़ी ऐसी जानकारियां साझा कीं, जिन्हें आम तौर पर एक छोटे बच्चे की समझ से परे माना जाता है.

कान्हाराम के परिवार वालों का क्या कहना है?

कान्हाराम के परिवार वालों के अनुसार, उसके व्यवहार में बदलाव महज ढाई साल की उम्र से दिखने लगा था. उसकी मां ग्यारसी देवी का दावा है कि उन्होंने जो पहला शब्द बोला था वो राजा मान सिंह था. इसके अलावा, कान्हाराम ने अपने ही घर में भेदभाव करना शुरू कर दिया है. वो खुद को उच्च कुल का राजपूत मानकर साधारण बर्तनों में खाने से इन्कार कर देता है. वह घर में सिंहासन लगाकर बैठता है और युद्ध की क्रीड़ाएं करता है.

 कान्हाराम की मां का क्या मानना है?

उसकी मां का मानना है कि इस लड़के पर देवी शिला देवी का विशेष आशीर्वाद है और अष्टमी के दिन वह लोगों की समस्याओं का समाधान करता है. परिवार के लोग चाहते हैं कि वो आमेर के राजपरिवार तक पहुंचे ताकि बालक की जिज्ञासा शांत हो सके. कान्हाराम के दावों और हकीकत में बहुत फर्क नजर आ रहा है. कान्हाराम का दावा है कि उसने हल्दीघाटी की लड़ाई में हिस्सा लिया था और बंगाल से लाई गई मूर्ति को आमेर के शिला देवी मंदिर में स्थापित किया था.



कान्हाराम के दावों की क्या है सच्चाई?

वह शिला देवी की मूर्ति की गर्दन झुकी होने के पीछे की कहानी भी सुनाता है, जिसका कारण वह मानव बलि प्रथा का बंद होना बताता है. हालांकि मीडिया ने उस लड़के से गहराई से पूछताछ की तो कई विरोधाभास सामने आए. जब उससे राजा मान सिंह की मृत्यु के स्थान के बारे में पूछा गया तो उसने एक ‘अनाज मंडी’ का ज़िक्र किया, जबकि ऐतिहासिक रूप से उनकी मृत्यु दक्षिण भारत में हुई थी.

इसके अलावा, वह दावा करता है कि उसकी दो रानियां थीं और जोधा उसकी बुआ थीं, वहीं कैमरे के सामने वह आमेर महल या अन्य लड़ाइयों के बारे में सटीक जानकारी देने में असमर्थ रहा. दिलचस्प बात यह है कि कान्हाराम जो खुद को राजा होने का दावा करता है, वो विराट कोहली को अपना पसंदीदा क्रिकेटर मानता है और भविष्य में पुलिस अधिकारी बनने की इच्छा रखता है.

MORE NEWS