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NSE बदलने जा रहा है सिस्टम, क्लोजिंग प्राइस-एक्सपायरी सेटलमेंट के नए नियम, 7 दिसंबर से होगा लागू

NSE 7 दिसंबर से क्लोजिंग प्राइस और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियम बदलेगा. नया 10 मिनट का ऑक्शन सेशन और बदली हुई ट्रेडिंग टाइमिंग लागू होगी.

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Published: November 7, 2026 16:15:23 IST
Last Updated: November 7, 2026 16:15:23 IST

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NSE New Rules: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 7 दिसंबर 2026 से शेयर बाजार के कुछ अहम नियमों में बदलाव करने जा रहा है. इन बदलावों का असर शेयरों की क्लोजिंग कीमत तय करने से लेकर इक्विटी डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग और एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस निकालने के तरीके पर पड़ेगा.NSE ने 6 नवंबर को दो सर्कुलर जारी कर इन बदलावों की जानकारी दी है. ये बदलाव भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की 15 अक्टूबर को हुई समीक्षा के बाद किए जा रहे हैं. SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन, बाजार की टाइमिंग और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट प्रक्रिया की समीक्षा की थी.इन बदलावों में सबसे अहम है 10 मिनट का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS), जो हर कारोबारी दिन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा.

NSE का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन कैसे काम करेगा?

नए नियमों के तहत शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने के बाद क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए अलग से ऑक्शन सेशन होगा. इसे आसान भाषा में समझें तो इस दौरान खरीदार और विक्रेता के ऑर्डर के आधार पर शेयर की आखिरी कीमत तय की जाएगी.

इसकी पूरी प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:

– 3:30 से 3:31 बजे: इस दौरान रेफरेंस प्राइस तय किया जाएगा और सामान्य ट्रेडिंग से ऑक्शन सेशन में बदलाव होगा.
– 3:31 से 3:36 बजे: ट्रेडर्स मार्केट और लिमिट ऑर्डर लगा सकेंगे. साथ ही पहले से लगाए गए ऑर्डर में बदलाव या उन्हें कैंसिल भी कर सकेंगे.
– 3:36 बजे के बाद: केवल लिमिट ऑर्डर लगाने की अनुमति होगी.
– आखिरी 2 मिनट: ऑर्डर लगाने का समय अचानक बंद किया जाएगा. यानी ट्रेडर्स को पहले से सटीक समय की जानकारी नहीं होगी.
– 3:40 से 3:45 बजे: ऑर्डर का मिलान यानी ऑर्डर मैचिंग होगी.
– 3:45 से 3:50 बजे: सिस्टम सामान्य प्रक्रिया में वापस आने के लिए ट्रांजिशन पीरियड में रहेगा.
– 3:50 से 4 बजे: पोस्ट-क्लोज सेशन चलेगा.
यह नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम उन पात्र शेयरों पर लागू होगा, जिनके डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट कम से कम एक स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध हैं. हालांकि, कुछ तय अपवाद भी होंगे.

NSE शेयरों की क्लोजिंग कीमत कैसे तय करेगा?

नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन में शामिल शेयरों की शुरुआती रेफरेंस कीमत दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए कारोबार के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होगी.

आसान भाषा में समझें तो इस दौरान शेयर की कीमत और कितनी मात्रा में कारोबार हुआ, दोनों को ध्यान में रखकर औसत कीमत निकाली जाएगी.

अगर इस 15 मिनट के दौरान शेयर में कोई ट्रेड नहीं होता है, तो उसकी आखिरी ट्रेड हुई कीमत को रेफरेंस प्राइस माना जाएगा. वहीं, अगर पूरे दिन शेयर में कोई कारोबार नहीं हुआ, तो कॉरपोरेट एक्शन के हिसाब से जरूरी बदलाव करने के बाद पिछली क्लोजिंग कीमत का इस्तेमाल किया जाएगा.

इसके अलावा, ऑक्शन के दौरान शेयर की कीमत रेफरेंस प्राइस से 3% ऊपर या 3% नीचे के दायरे में ही रखी जाएगी.

अंतिम क्लोजिंग प्राइस उस कीमत पर तय होगा, जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों का कारोबार संभव हो सके. अगर एक से ज्यादा कीमतों पर बराबर मात्रा में कारोबार संभव है, तो ऐसी कीमत चुनी जाएगी जहां खरीद और बिक्री के ऑर्डर के बीच सबसे कम अंतर हो. अगर यह अंतर भी बराबर रहता है, तो रेफरेंस प्राइस के सबसे करीब वाली कीमत को अंतिम माना जाएगा.

डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग भी बदलेगी

NSE ने इक्विटी डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग में भी बदलाव किया है. इसके तहत स्टॉक डेरिवेटिव्स में अब सभी कारोबारी दिनों में दोपहर 3:45 बजे तक ट्रेडिंग हो सकेगी. इसमें एक्सपायरी वाले दिन भी शामिल हैं.

इंडेक्स डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग भी सामान्य कारोबारी दिनों में दोपहर 3:45 बजे तक होगी. हालांकि, जिस दिन किसी इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी होगी, उस दिन उसमें ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे तक ही हो सकेगी.स्टॉक और इंडेक्स दोनों तरह के डेरिवेटिव्स में ट्रेड में बदलाव करने की सुविधा शाम 4:15 बजे तक जारी रहेगी.

एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस निकालने का तरीका बदलेगा

NSE ने डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर अंतिम सेटलमेंट कीमत निकालने का तरीका भी बदल दिया है.

इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए: एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस निकालने के लिए इंडेक्स में शामिल सभी शेयरों के VWAP का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे तक यानी बाजार के आखिरी 30 मिनट के कारोबार को आधार बनाया जाएगा.

स्टॉक डेरिवेटिव्स के लिए: संबंधित शेयर की VWAP के आधार पर सेटलमेंट प्राइस निकाला जाएगा. इसमें इसी 30 मिनट के दौरान सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर हुए कारोबार को ध्यान में रखा जाएगा.

कब से लागू होंगे नए नियम?

NSE के ज्यादातर नए नियम 7 दिसंबर 2026 से लागू हो जाएंगे. हालांकि, सामान्य ट्रेडिंग सेशन के दौरान लगाए गए कुछ लिमिट और डिस्क्लोज्ड क्वांटिटी ऑर्डर, जिनका कारोबार पूरा नहीं हो पाया है, उन्हें आगे ले जाने से जुड़े बदलाव 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे.

यह भी पढ़ें:  दिवाली पर होगी शेयर बाजार में ट्रेडिंग! सिर्फ 70 मिनट के लिए खुलेंगे BSE और NSE, 10 नवंबर को छुट्टी 

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Published: November 7, 2026 16:15:23 IST
Last Updated: November 7, 2026 16:15:23 IST

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NSE New Rules: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 7 दिसंबर 2026 से शेयर बाजार के कुछ अहम नियमों में बदलाव करने जा रहा है. इन बदलावों का असर शेयरों की क्लोजिंग कीमत तय करने से लेकर इक्विटी डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग और एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस निकालने के तरीके पर पड़ेगा.NSE ने 6 नवंबर को दो सर्कुलर जारी कर इन बदलावों की जानकारी दी है. ये बदलाव भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की 15 अक्टूबर को हुई समीक्षा के बाद किए जा रहे हैं. SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन, बाजार की टाइमिंग और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट प्रक्रिया की समीक्षा की थी.इन बदलावों में सबसे अहम है 10 मिनट का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS), जो हर कारोबारी दिन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा.

NSE का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन कैसे काम करेगा?

नए नियमों के तहत शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने के बाद क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए अलग से ऑक्शन सेशन होगा. इसे आसान भाषा में समझें तो इस दौरान खरीदार और विक्रेता के ऑर्डर के आधार पर शेयर की आखिरी कीमत तय की जाएगी.

इसकी पूरी प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:

– 3:30 से 3:31 बजे: इस दौरान रेफरेंस प्राइस तय किया जाएगा और सामान्य ट्रेडिंग से ऑक्शन सेशन में बदलाव होगा.
– 3:31 से 3:36 बजे: ट्रेडर्स मार्केट और लिमिट ऑर्डर लगा सकेंगे. साथ ही पहले से लगाए गए ऑर्डर में बदलाव या उन्हें कैंसिल भी कर सकेंगे.
– 3:36 बजे के बाद: केवल लिमिट ऑर्डर लगाने की अनुमति होगी.
– आखिरी 2 मिनट: ऑर्डर लगाने का समय अचानक बंद किया जाएगा. यानी ट्रेडर्स को पहले से सटीक समय की जानकारी नहीं होगी.
– 3:40 से 3:45 बजे: ऑर्डर का मिलान यानी ऑर्डर मैचिंग होगी.
– 3:45 से 3:50 बजे: सिस्टम सामान्य प्रक्रिया में वापस आने के लिए ट्रांजिशन पीरियड में रहेगा.
– 3:50 से 4 बजे: पोस्ट-क्लोज सेशन चलेगा.
यह नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम उन पात्र शेयरों पर लागू होगा, जिनके डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट कम से कम एक स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध हैं. हालांकि, कुछ तय अपवाद भी होंगे.

NSE शेयरों की क्लोजिंग कीमत कैसे तय करेगा?

नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन में शामिल शेयरों की शुरुआती रेफरेंस कीमत दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए कारोबार के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होगी.

आसान भाषा में समझें तो इस दौरान शेयर की कीमत और कितनी मात्रा में कारोबार हुआ, दोनों को ध्यान में रखकर औसत कीमत निकाली जाएगी.

अगर इस 15 मिनट के दौरान शेयर में कोई ट्रेड नहीं होता है, तो उसकी आखिरी ट्रेड हुई कीमत को रेफरेंस प्राइस माना जाएगा. वहीं, अगर पूरे दिन शेयर में कोई कारोबार नहीं हुआ, तो कॉरपोरेट एक्शन के हिसाब से जरूरी बदलाव करने के बाद पिछली क्लोजिंग कीमत का इस्तेमाल किया जाएगा.

इसके अलावा, ऑक्शन के दौरान शेयर की कीमत रेफरेंस प्राइस से 3% ऊपर या 3% नीचे के दायरे में ही रखी जाएगी.

अंतिम क्लोजिंग प्राइस उस कीमत पर तय होगा, जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों का कारोबार संभव हो सके. अगर एक से ज्यादा कीमतों पर बराबर मात्रा में कारोबार संभव है, तो ऐसी कीमत चुनी जाएगी जहां खरीद और बिक्री के ऑर्डर के बीच सबसे कम अंतर हो. अगर यह अंतर भी बराबर रहता है, तो रेफरेंस प्राइस के सबसे करीब वाली कीमत को अंतिम माना जाएगा.

डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग भी बदलेगी

NSE ने इक्विटी डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग में भी बदलाव किया है. इसके तहत स्टॉक डेरिवेटिव्स में अब सभी कारोबारी दिनों में दोपहर 3:45 बजे तक ट्रेडिंग हो सकेगी. इसमें एक्सपायरी वाले दिन भी शामिल हैं.

इंडेक्स डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग भी सामान्य कारोबारी दिनों में दोपहर 3:45 बजे तक होगी. हालांकि, जिस दिन किसी इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी होगी, उस दिन उसमें ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे तक ही हो सकेगी.स्टॉक और इंडेक्स दोनों तरह के डेरिवेटिव्स में ट्रेड में बदलाव करने की सुविधा शाम 4:15 बजे तक जारी रहेगी.

एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस निकालने का तरीका बदलेगा

NSE ने डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर अंतिम सेटलमेंट कीमत निकालने का तरीका भी बदल दिया है.

इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए: एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस निकालने के लिए इंडेक्स में शामिल सभी शेयरों के VWAP का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे तक यानी बाजार के आखिरी 30 मिनट के कारोबार को आधार बनाया जाएगा.

स्टॉक डेरिवेटिव्स के लिए: संबंधित शेयर की VWAP के आधार पर सेटलमेंट प्राइस निकाला जाएगा. इसमें इसी 30 मिनट के दौरान सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर हुए कारोबार को ध्यान में रखा जाएगा.

कब से लागू होंगे नए नियम?

NSE के ज्यादातर नए नियम 7 दिसंबर 2026 से लागू हो जाएंगे. हालांकि, सामान्य ट्रेडिंग सेशन के दौरान लगाए गए कुछ लिमिट और डिस्क्लोज्ड क्वांटिटी ऑर्डर, जिनका कारोबार पूरा नहीं हो पाया है, उन्हें आगे ले जाने से जुड़े बदलाव 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे.

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