KGMU Conversion Case KGMU: धर्मांतरण मामले में STF की जांच में पक्के सबूत मिले. पीड़ित और गवाह भी सामने आए, जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई. इतना कुछ होने के बाद भी, मामले में FIR क्यों नहीं हुई, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है. यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट को भविष्य में होने वाली डिपार्टमेंटल मीटिंग में पेश करने और दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों और दूसरे स्टाफ के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन लेने की बात कर रहा है. उन्हें कानूनी कार्रवाई से क्यों बचाया जा रहा है?
धर्मांतरण कांड सामने आने के बाद, सरकार ने जांच STF को सौंप दी. STF की जांच रिपोर्ट चार दिन पहले पब्लिक हुई, जिसमें KGMU में अभी और पहले काम कर रहे डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और दूसरे कर्मचारियों की भूमिका का खुलासा हुआ. जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए हर व्यक्ति की भूमिका का साफ-साफ ब्योरा है. उन सभी पर बहुत गंभीर आरोप हैं. धर्मांतरण से लेकर कट्टरपंथी सोच फैलाने और कुछ लोगों द्वारा युवतियों के साथ रेप करने तक के तथ्य सामने आए हैं. इसलिए, सवाल उठता है कि केस क्यों दर्ज नहीं किया गया.
13 डॉक्टरों समेत 25 लोगों की गंभीर संलिप्तता
STF रिपोर्ट में 13 डॉक्टरों समेत करीब 25 लोगों की भूमिका बहुत गंभीर पाई गई है. कुछ तो KGMU छोड़कर कहीं और काम कर रहे हैं. कानूनी जानकारों का कहना है कि KGMU प्रशासन को जांच रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करना चाहिए. इससे यह पक्का होगा कि मामले की जांच पूरी तरह से समझ में आ गई है और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
STF रिपोर्ट जारी होने के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कई डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और KGMU से जुड़े लोग इस खबर को शेयर कर रहे हैं. कुछ डॉक्टर तो यह भी दावा कर रहे हैं कि KGMU में ढाई दशक से ऐसी ही गतिविधियां चल रही हैं. वे धर्म परिवर्तन से लेकर कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार तक के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं.
छात्राओं के अलग-अलग बैच को बनाया निशाना
KGMU में धर्म परिवर्तन रैकेट में शामिल गैंग की जड़ें बहुत गहरी थीं. डॉ. रमीज़ और उसके साथी सिर्फ़ लखनऊ में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों में एक्टिव थे. आरोपी गैर-मुस्लिम छात्राओं को फंसाते थे. पुलिस जांच में पता चला है कि गैंग छात्राओं के अलग-अलग बैच को टारगेट करता था. एक छात्रा को फंसाने के बाद, उस पर अपने दोस्तों को गैंग के सदस्यों से मिलवाने का दबाव डाला जाता था.
पुलिस सूत्रों का कहना है कि दबाव में आकर छात्राएं रमीज़ के दोस्तों की मुलाकात अपने दोस्तों से करवाती थीं. फिर आरोपी दूसरी छात्राओं को बरगलाता था. फिर वे धीरे-धीरे छात्राओं के बीच लड़ाई करवाते थे. इस बंटवारे की वजह से छात्राएं एक-दूसरे से अनजान रहती थीं. जब तक मामला सामने आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. आरोपियों ने न सिर्फ़ छात्राओं का शोषण किया, बल्कि उनकी अश्लील तस्वीरें भी हासिल कर लीं. फिर, ब्लैकमेल करके उन पर धर्म बदलने का दबाव डालते थे.
इस तरह खुला राज
पीड़ित KGMU की स्टूडेंट थी और ठाकुरगंज में अपनी एक पुरानी जान-पहचान वाले से मिली. दोस्त ने उसे बताया कि वह रमीज़ की पत्नी है. आरोपी ने उसका धर्म बदलवाया और शादी तय की.
कार्डियो सेवा फाउंडेशन के ज़रिए बिछाया गया था यह जाल
हसम डॉक्टर बनकर स्टूडेंट्स को धोखा देता था. वह उन्हें कार्डियो सेवा फाउंडेशन के नाम पर गुमराह करता था. वह स्टूडेंट्स को अलग-अलग कैंप में ले जाता था, जहाँ वह उन्हें अपने दोस्तों और ऑर्गनाइज़ेशन के मेंबर्स से मिलवाता था. पुलिस को पता चला कि उसे जो मोबाइल फ़ोन मिला था, उससे कई डेटा मिटा दिए गए थे. पुलिस की जाँच में आरोपी की धोखाधड़ी का पता चला. कार्डियो सेवा फाउंडेशन के अकाउंट से ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन किए गए थे.