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‘पत्थरों को नहीं, मोदी-योगी को पूजो’, BJP विधायक के जीवित देवता बयान से मचा सियासी तूफान

Modi Yogi Bhagwan Remark: BJP विधायक श्याम प्रकाश ने एक विवादित टिप्पणी कर दी. मूर्ति पूजा की प्रथा पर सवाल उठाते हुए, उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी जीवित देवता हैं. इस बयान के बाद अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह अंधविश्वास के खिलाफ उठाई गई आवाज है, या फिर लाखों लोगों की आस्था का अपमान है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-04-15 21:55:38

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Shyam Prakash Controversial Statement: उत्तर प्रदेश के हरदोई ज़िले में, मंगलवार को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर आयोजित पासी समुदाय के एक विशाल सम्मेलन के दौरान राजनीति तब गरमा गई, जब मंच से BJP विधायक श्याम प्रकाश ने एक विवादित टिप्पणी कर दी.
 
 मूर्ति पूजा की प्रथा पर सवाल उठाते हुए, गोपामऊ से विधायक श्याम प्रकाश ने यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीवित देवता हैं. इस बयान के बाद अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह अंधविश्वास के खिलाफ उठाई गई आवाज है, या फिर लाखों लोगों की आस्था का अपमान है.
 

‘जीवित इंसानों को ही भगवान मानकर पूजो’- विधायक श्याम प्रकाश

गांधी मैदान में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान विधायक श्याम प्रकाश ने कहा कि अगर आप पत्थरों के आगे भीख मांगने जाते हैं, तो वे आपको कुछ भी नहीं देने वाले. इसलिए, दोस्तों, पाखंड छोड़ो और अपने परिवारों और अपने समुदाय को एकजुट करो.
 
 जहां तक हमारी बात है, हम केवल एक जीवित इंसान को ही भगवान मानते हैं; और हमारे योगी-जी और मोदी-जी, बिना किसी संदेह के, भगवान के ही समान हैं. उनका सम्मान करने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि उनमें हमें चीज़ें देने की क्षमता है. उन्होंने विशेष रूप से दलित समुदाय से अपील की कि वे इधर-उधर भटकने के बजाय आज के देवताओं के साथ जुड़ें.
 

विवाद बढ़ने पर स्पष्टीकरण जारी किया गया

विधायक के बयान ने तब और भी गंभीर रूप ले लिया, जब उनसे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (प्रतिष्ठापन समारोह) के बारे में सवाल किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री ने की थी. इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए श्याम प्रकाश ने कहा कि मेरी टिप्पणियां किसी विशिष्ट मूर्ति या अयोध्या में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर नहीं थीं. 
 
उन्होंने आगे कहा कि मैं उन पत्थरों का ज़िक्र कर रहा था, जिनकी लोग अंधविश्वास के चलते पूजा करते हैं विशेष रूप से हमारे दलित समुदाय के भीतर. प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्राण प्रतिष्ठा उनका निजी मामला है, ठीक वैसे ही जैसे मेरा बयान मेरी अपनी निजी राय है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य समाज को अंधविश्वास से दूर ले जाना और उसे शिक्षा के मार्ग पर अग्रसर करना था.

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Last Updated: 2026-04-15 21:55:38

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Shyam Prakash Controversial Statement: उत्तर प्रदेश के हरदोई ज़िले में, मंगलवार को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर आयोजित पासी समुदाय के एक विशाल सम्मेलन के दौरान राजनीति तब गरमा गई, जब मंच से BJP विधायक श्याम प्रकाश ने एक विवादित टिप्पणी कर दी.
 
 मूर्ति पूजा की प्रथा पर सवाल उठाते हुए, गोपामऊ से विधायक श्याम प्रकाश ने यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीवित देवता हैं. इस बयान के बाद अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह अंधविश्वास के खिलाफ उठाई गई आवाज है, या फिर लाखों लोगों की आस्था का अपमान है.
 

‘जीवित इंसानों को ही भगवान मानकर पूजो’- विधायक श्याम प्रकाश

गांधी मैदान में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान विधायक श्याम प्रकाश ने कहा कि अगर आप पत्थरों के आगे भीख मांगने जाते हैं, तो वे आपको कुछ भी नहीं देने वाले. इसलिए, दोस्तों, पाखंड छोड़ो और अपने परिवारों और अपने समुदाय को एकजुट करो.
 
 जहां तक हमारी बात है, हम केवल एक जीवित इंसान को ही भगवान मानते हैं; और हमारे योगी-जी और मोदी-जी, बिना किसी संदेह के, भगवान के ही समान हैं. उनका सम्मान करने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि उनमें हमें चीज़ें देने की क्षमता है. उन्होंने विशेष रूप से दलित समुदाय से अपील की कि वे इधर-उधर भटकने के बजाय आज के देवताओं के साथ जुड़ें.
 

विवाद बढ़ने पर स्पष्टीकरण जारी किया गया

विधायक के बयान ने तब और भी गंभीर रूप ले लिया, जब उनसे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (प्रतिष्ठापन समारोह) के बारे में सवाल किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री ने की थी. इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए श्याम प्रकाश ने कहा कि मेरी टिप्पणियां किसी विशिष्ट मूर्ति या अयोध्या में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर नहीं थीं. 
 
उन्होंने आगे कहा कि मैं उन पत्थरों का ज़िक्र कर रहा था, जिनकी लोग अंधविश्वास के चलते पूजा करते हैं विशेष रूप से हमारे दलित समुदाय के भीतर. प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्राण प्रतिष्ठा उनका निजी मामला है, ठीक वैसे ही जैसे मेरा बयान मेरी अपनी निजी राय है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य समाज को अंधविश्वास से दूर ले जाना और उसे शिक्षा के मार्ग पर अग्रसर करना था.

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