उत्तर प्रदेश में महंगाई ने आम आदमी के बजट को पूरी तरह से बिगाड़कर रख दिया है. पहले चीन, और अब दाल; रोजमर्रा की जरूरी चीजों के बढ़ते दाम से आम जनता बुरी तरह परेशान है.
चीनी के तेजी से बढ़ते दामों पर सरकार की सख्ती से कमी तो आई है लेकिन अरहर दाल और चना के दाम बढ़ गए हैं. पिछले दो-तीन दिन में ही अच्छी गुणवत्ता की अरहर दाल के दाम 5 रुपये किलो तक बढ़ गए हैं जबकि चने के दाम हफ्ता भर पहले से ही बढ़े हुए हैं.
दालों ने बिगाड़ा बजट
दाल उत्तर भारतीय खाने का जरूरी हिस्सा है, खासतौर पर अरहर दाल. पिछले 2-3 दिन में अरहर दाल की कीमत में अचानक उछाल आया है. वाराणसी की दाल मंडी के एक कारोबारी का कहना है कि दो से तीन दिन में अरहर की दाल में तेजी आई है. मंडी में अच्छी गुणवत्ता की पुखराज अरहर दाल में तीन रुपये तक की तेजी आई है. अरहर दाल का थोक रेट भी तेजी से बढ़ा है. थोक भाव में अरहर पहले 116 रुपये किलो मिलती थी, लेकिन अब 118.50 रुपये किलो में मिलती है. दरअसल, धीरे-धीरे फसलों का उत्पादन कम होता जा रहा है. राज्य में मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से दाल आती है. जब बिक्री अच्छी होती है और माल की शॉर्टेज होती है, तो रेट बढ़ जाते हैं.
वहीं चना की बात करें तो हफ्ता भर पहले चने के भी दाम प्रदेश में बढ़ गए हैं. मंडी में 66 रुपये किलो वाला चना 70 रुपये तो 69 रुपये किलो वाला चना 7400 रुपये में पहुंच गया है. फुटकर रेट की बात करें तो चना जो पहले 70-75 रु. किलो था अब वो 80-85 रुपये किलो हो गया है.
चीनी की कीमत में आई नरमी
जब राज्य में अचानक चीनी की कीमत में उछाल आया तो सरकार ने तुरंत एक्शन लिया. सरकार की सख्ती के बाद फुटकर में चार तो थोक बाजार में 8 रुपये किलो चीनी सस्ती हो गई है. राजधानी के फुटकर बाजार में चीनी का रेट 64 रुपये से गिरकर 60 रुपये तक पहुंच गया है. वहीं, थोक बाजार में यह कीमत 62 रुपये से घटकर 54 से 56 रुपये किलो तक पहुंच गई है. एक हफ्ते के अंदर ही चीनी के दामों में यह गिरावट आई है. कारोबारी इसके पीछे स्टॉक लिमिट के पीछे सरकार की सख्ती बताते हैं.