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Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > कौन हैं तरुण तेजपाल? जिन्होंने गोवा के फाइव स्टार होटल की लिफ्ट को बनाया हैवानियत का अड्डा, जानिए उस दिन क्या-क्या हुआ

कौन हैं तरुण तेजपाल? जिन्होंने गोवा के फाइव स्टार होटल की लिफ्ट को बनाया हैवानियत का अड्डा, जानिए उस दिन क्या-क्या हुआ

Who Is Tarun Tejpal: तहलका के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित उत्पीड़न मामले में बंबई हाई कोर्ट की गोवा बेंच से बड़ा झटका लगा है. हाई कोर्ट ने 2021 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया. तरुण तेजपाल अपने खोजी पत्रकारिता, चर्चित स्टिंग ऑपरेशन, लेखन और बाद में कानूनी विवादों के कारण लंबे समय से सुर्खियों में रहे हैं.

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Last Updated: August 6, 2026 14:03:17 IST

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Who Is Tarun Tejpal: तहलका मैगजीन के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं. बंबई हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के चर्चित उत्पीड़न मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया है. यह मामला गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट के दौरान एक महिला जूनियर सहयोगी द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है. फैसले के बाद एक बार फिर तरुण तेजपाल के पत्रकारिता करियर, तहलका के स्टिंग ऑपरेशन और पूरे विवाद पर चर्चा तेज हो गई है.

हाई कोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसल

बंबई हाई कोर्ट की गोवा बेंच की जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए 2021 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया. गोवा सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने तरुण तेजपाल की ओर से दलीलें पेश कीं.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है. आरोप है कि गोवा में तहलका के थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहयोगी के साथ दो बार उत्पीड़न किया. शिकायत के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार किया गया. जून 2014 में उन्हें जमानत मिल गई थी. 2017 में मामले की ट्रायल शुरू हुई और 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था. इसी फैसले के खिलाफ गोवा सरकार हाई कोर्ट पहुंची थी.

सुनवाई के दौरान क्या बोले तुषार मेहता?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने शिकायतकर्ता के व्यवहार को आधार बनाकर गंभीर त्रुटि की. उनका कहना था कि किसी उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार का कोई तय मानक नहीं हो सकता. हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया उसकी परिस्थितियों, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और मानसिक स्थिति के अनुसार अलग होती है. इसलिए केवल व्यवहार के आधार पर शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

फैसले के समय कोर्ट में मौजूद थे तरुण तेजपाल

फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे. उन्होंने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि उनकी उम्र अब 62 वर्ष हो चुकी है. उन्होंने कहा कि वह स्वयं को पीड़ित मानते हैं और उनके परिवार में उनकी पत्नी हैं. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी विकल्प अपना सकते हैं.

कौन हैं तरुण तेजपाल?

तरुण तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को पंजाब के जालंधर में हुआ था. उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके कारण बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता. उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में स्नातक किया. वर्ष 1985 में उनकी शादी गीता बत्रा से हुई. उनकी दो बेटियां हैं—टिया और कारा.

पत्रकारिता में कैसे बनाई पहचान?

तरुण तेजपाल ने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में द इंडियन एक्सप्रेस समूह से की. इसके बाद उन्होंने इंडिया 2000 पत्रिका में काम किया. बाद में उन्होंने खोजी पत्रकारिता को नया आयाम देने के उद्देश्य से तहलका की स्थापना की, जिसने कई चर्चित स्टिंग ऑपरेशन किए और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई.

तहलका के स्टिंग ऑपरेशन से मिली पहचान

साल 2000 में तहलका ने क्रिकेट मैच फिक्सिंग पर स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसने देशभर में हलचल मचा दी. इसके बाद 2001 में ‘ऑपरेशन वेस्ट एंड’ के जरिए रक्षा सौदों में  दलाली का खुलासा किया गया. इस स्टिंग में कई नेता और अधिकारी कथित तौर पर रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुए. इस खुलासे के बाद तत्कालीन सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष और रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था. इसी स्टिंग ने तरुण तेजपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

लेखक के रूप में भी बनाई अलग पहचान

पत्रकारिता के अलावा तरुण तेजपाल एक उपन्यासकार भी हैं. उनका पहला उपन्यास द अल्केमी ऑफ डिजायर वर्ष 2005 में प्रकाशित हुआ. इसके बाद द स्टोरी ऑफ माय असैसिनेशन्स (2009) और द वैली ऑफ मास्क्स (2011) प्रकाशित हुए, जिन्हें साहित्यिक जगत में भी सराहना मिली.

मिले कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय सम्मान

अपने पत्रकारिता करियर के दौरान तरुण तेजपाल को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले. वर्ष 2001 में एशियावीक ने उन्हें एशिया के 50 सबसे प्रभावशाली कम्युनिकेटर्स में शामिल किया. बिजनेसवीक ने भी उन्हें एशिया के प्रमुख नेताओं की सूची में जगह दी. द गार्जियन ने 2007 में उन्हें भारत के नए प्रभावशाली वर्ग के 20 लोगों में शामिल किया. उनके उपन्यास द अल्केमी ऑफ डिजायर को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान भी मिला. वर्ष 2010 में उन्हें इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट (इंडिया चैप्टर) की ओर से पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया.

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Last Updated: August 6, 2026 14:03:17 IST

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Who Is Tarun Tejpal: तहलका मैगजीन के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं. बंबई हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के चर्चित उत्पीड़न मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया है. यह मामला गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट के दौरान एक महिला जूनियर सहयोगी द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है. फैसले के बाद एक बार फिर तरुण तेजपाल के पत्रकारिता करियर, तहलका के स्टिंग ऑपरेशन और पूरे विवाद पर चर्चा तेज हो गई है.

हाई कोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसल

बंबई हाई कोर्ट की गोवा बेंच की जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए 2021 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया. गोवा सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने तरुण तेजपाल की ओर से दलीलें पेश कीं.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है. आरोप है कि गोवा में तहलका के थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहयोगी के साथ दो बार उत्पीड़न किया. शिकायत के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार किया गया. जून 2014 में उन्हें जमानत मिल गई थी. 2017 में मामले की ट्रायल शुरू हुई और 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था. इसी फैसले के खिलाफ गोवा सरकार हाई कोर्ट पहुंची थी.

सुनवाई के दौरान क्या बोले तुषार मेहता?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने शिकायतकर्ता के व्यवहार को आधार बनाकर गंभीर त्रुटि की. उनका कहना था कि किसी उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार का कोई तय मानक नहीं हो सकता. हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया उसकी परिस्थितियों, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और मानसिक स्थिति के अनुसार अलग होती है. इसलिए केवल व्यवहार के आधार पर शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

फैसले के समय कोर्ट में मौजूद थे तरुण तेजपाल

फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे. उन्होंने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि उनकी उम्र अब 62 वर्ष हो चुकी है. उन्होंने कहा कि वह स्वयं को पीड़ित मानते हैं और उनके परिवार में उनकी पत्नी हैं. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी विकल्प अपना सकते हैं.

कौन हैं तरुण तेजपाल?

तरुण तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को पंजाब के जालंधर में हुआ था. उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके कारण बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता. उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में स्नातक किया. वर्ष 1985 में उनकी शादी गीता बत्रा से हुई. उनकी दो बेटियां हैं—टिया और कारा.

पत्रकारिता में कैसे बनाई पहचान?

तरुण तेजपाल ने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में द इंडियन एक्सप्रेस समूह से की. इसके बाद उन्होंने इंडिया 2000 पत्रिका में काम किया. बाद में उन्होंने खोजी पत्रकारिता को नया आयाम देने के उद्देश्य से तहलका की स्थापना की, जिसने कई चर्चित स्टिंग ऑपरेशन किए और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई.

तहलका के स्टिंग ऑपरेशन से मिली पहचान

साल 2000 में तहलका ने क्रिकेट मैच फिक्सिंग पर स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसने देशभर में हलचल मचा दी. इसके बाद 2001 में ‘ऑपरेशन वेस्ट एंड’ के जरिए रक्षा सौदों में  दलाली का खुलासा किया गया. इस स्टिंग में कई नेता और अधिकारी कथित तौर पर रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुए. इस खुलासे के बाद तत्कालीन सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष और रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था. इसी स्टिंग ने तरुण तेजपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

लेखक के रूप में भी बनाई अलग पहचान

पत्रकारिता के अलावा तरुण तेजपाल एक उपन्यासकार भी हैं. उनका पहला उपन्यास द अल्केमी ऑफ डिजायर वर्ष 2005 में प्रकाशित हुआ. इसके बाद द स्टोरी ऑफ माय असैसिनेशन्स (2009) और द वैली ऑफ मास्क्स (2011) प्रकाशित हुए, जिन्हें साहित्यिक जगत में भी सराहना मिली.

मिले कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय सम्मान

अपने पत्रकारिता करियर के दौरान तरुण तेजपाल को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले. वर्ष 2001 में एशियावीक ने उन्हें एशिया के 50 सबसे प्रभावशाली कम्युनिकेटर्स में शामिल किया. बिजनेसवीक ने भी उन्हें एशिया के प्रमुख नेताओं की सूची में जगह दी. द गार्जियन ने 2007 में उन्हें भारत के नए प्रभावशाली वर्ग के 20 लोगों में शामिल किया. उनके उपन्यास द अल्केमी ऑफ डिजायर को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान भी मिला. वर्ष 2010 में उन्हें इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट (इंडिया चैप्टर) की ओर से पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया.

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