भारतीय साइकिलिस्ट हर्षिता जाखड़ ने एक नया इतिहास रच दिया है. वह प्रतिष्ठित ‘टूर डी फ्रांस फेमेस’ (Tour de France Femmes) का हिस्सा बनने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. राजस्थान की रहने वाली 19 वर्षीय हर्षिता ने इस रेस के स्टेज 2 की सेरेमोनियल शुरुआत में हिस्सा लिया, जो भारतीय साइकिलिंग के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.
हालांकि, हर्षिता मुख्य प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थीं, लेकिन उन्हें यह मौका यूनियन साइक्लिस्ट इंटरनेशनेल (UCI) वर्ल्ड साइकिलिंग टैलेंट प्रोग्राम के जरिए मिला. यह प्रोग्राम उभरते हुए साइकिलिंग देशों के होनहार खिलाड़ियों को सपोर्ट और प्लेटफॉर्म देने का काम करता है.
टूर डी फ्रांस फेमेस में हर्षिता जाखड़ ने रचा इतिहास
प्रोफेशनल राइडर्स के स्टेज 2 की शुरुआत करने से पहले, 4.5 किलोमीटर के न्यूट्रलाइज्ड सेक्शन में हर्षिता ने अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया, नामीबिया और युगांडा के सात अन्य युवा साइकिलिस्टों के साथ साइकिल चलाई. 1 अगस्त से 9 अगस्त तक चलने वाला ‘टूर डी फ्रांस फेमेस’, दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘टूर डी फ्रांस’ का महिला संस्करण है और यह UCI वीमेंस वर्ल्ड टूर का एक अहम हिस्सा है.
इस खास मौके पर UCI के अध्यक्ष डेविड लैपर्टिएंट ने भी हर्षिता की जमकर तारीफ की और उनके सुनहरे भविष्य को लेकर भरोसा जताया. उन्होंने कहा, ‘हम अपने प्रतिष्ठित UCI वर्ल्ड साइकिलिंग टैलेंट प्रोग्राम में भारत की बेहद प्रतिभाशाली हर्षिता जाखड़ को पाकर बहुत उत्साहित हैं. मुझे यकीन है कि उन्हें टूर डी फ्रांस फेमेस का हिस्सा बनकर एक शानदार अनुभव मिलेगा और वो जल्द ही मुख्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए वापसी करेंगी.’
कौन हैं हर्षिता जाखड़?
राजस्थान की रहने वाली 19 साल की हर्षिता जाखड़ भारत की सबसे होनहार युवा साइकिलिस्ट्स में से एक हैं. वह पटियाला में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) में ट्रेनिंग लेती हैं और ‘टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप’ का हिस्सा हैं.
उनके पिता राकेश जाखड़ ने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में साइकिलिंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और बाद में वह NIS पटियाला से एक योग्य कोच बन गए. साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ही हर्षिता को साइकिलिंग से रू-ब-रू कराया था और उन्हें पटियाला की खाली सड़कों पर साइकिल चलाने के लिए प्रेरित किया था. बेटी के स्टैमिना और क्षमता को देखते हुए, उन्होंने हर्षिता को पेशेवर साइकिलिंग की दुनिया में कदम रखने के लिए सही मार्गदर्शन दिया.
कैसा रहा हर्षिता का साइकिलिंग का सफर
2021 में बीकानेर में अंडर-14 ट्रायल्स में टॉप करने के बाद हर्षिता ने जूनियर स्तर पर तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं. इसके बाद उन्होंने मुंबई और हैदराबाद में हुए नेशनल चैंपियनशिप में लगातार गोल्ड मेडल जीतकर खुद को भारत की टॉप जूनियर साइकिलिस्ट के रूप में स्थापित कर लिया.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें असली पहचान 2024 में दिल्ली में हुई अंडर-18 एशियन चैंपियनशिप से मिली, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए.
उनके करियर का एक और बड़ा मुकाम ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ रहा, जहां उन्होंने 500 मीटर टाइम ट्रायल, 7.5 किमी स्क्रैच रेस और 2 किमी इंडिविजुअल परस्यूट में तीन गोल्ड मेडल जीतकर अपना दबदबा कायम किया.
टूर डी फ्रांस फेमेस तक कैसे पहुंचीं हर्षिता?
हर्षिता को टूर डी फ्रांस फेमेस में हिस्सा लेने का मौका UCI वर्ल्ड साइकिलिंग टैलेंट प्रोग्राम के जरिए मिला. इस प्रोग्राम का मकसद उन देशों के होनहार साइकिलिस्ट्स को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बेहतर ट्रेनिंग के मौके देना है, जहां अभी हाई-परफॉर्मेंस साइकिलिंग का बुनियादी ढांचा उतना मजबूत नहीं है.
उन्हें दुनिया भर के उन आठ युवा राइडर्स में चुना गया था, जिन्हें स्टेज 2 की सेरेमोनियल शुरुआत में हिस्सा लेने का मौका मिला. इस इवेंट के बाद हर्षिता ने अपने अनुभव को बचपन के सपने के सच होने जैसा बताया. उन्होंने कहा, “मेरे पिता की बदौलत जब से बचपन में मुझे साइकिलिंग से प्यार हुआ, तभी से मैंने टूर डी फ्रांस का सपना देखा था. मैं UCI की बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे महिलाओं की इस रेस के दूसरे स्टेज की शुरुआत में अन्य प्रतिभाशाली साइकिलिस्ट्स के साथ साइकिल चलाने का यह शानदार मौका दिया.”
क्या हैं हर्षिता जाखड़ के अगले लक्ष्य?
हर्षिता ने आने वाले वर्षों के लिए पहले से ही बड़े लक्ष्य तय कर लिए हैं. उनका पहला और अहम लक्ष्य 2026 के एशियन गेम्स में टॉप-10 में अपनी जगह बनाना है, जबकि उनका लॉन्ग-टर्म गोल 2030 के एशियन गेम्स में देश के लिए मेडल जीतना है.