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HomeVideosइंश्योरेंस के नाम पर बड़ा खेल, प्रीमियम भरने के बाद भी नहीं मिला ‘फोन चोरी’ का क्लेम, बजाज स्टाफ पर भड़का कस्टमर!

इंश्योरेंस के नाम पर बड़ा खेल, प्रीमियम भरने के बाद भी नहीं मिला ‘फोन चोरी’ का क्लेम, बजाज स्टाफ पर भड़का कस्टमर!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-21 13:42:45

एक युवा कस्टमर ने नया स्मार्टफोन खरीदते समय सुरक्षा के लिहाज से बजाज इंश्योरेंस की पॉलिसी ली थी, उसने ना केवल बीमा का प्रीमियम चुकाया बल्कि फोन की EMI भी ईमानदारी से भरता रहा, हाल ही में जब उसका फोन चोरी हो गया, तो वह उम्मीद के साथ क्लेम करने पहुंचा, लेकिन कंपनी ने यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया कि उनकी पॉलिसी चोरी (Theft) या फोन खो जाने (Loss) को कवर नहीं करती, यह सुनकर ग्राहक के होश उड़ गए क्योंकि बीमा लेते समय उसे फोन की पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया गया था, यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि उन हज़ारों ग्राहकों की आवाज़ है जो इंश्योरेंस कंपनियों के पेचीदा नियमों के जाल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गवां देते हैं.


Bajaj Insurance Mobile Insurance Theft Coverage Scam: यह घटना डिजिटल इंश्योरेंस की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है, अक्सर फोन बेचते समय सेल्समैन इंश्योरेंस के फायदों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, लेकिन पॉलिसी के ‘नियम और शर्तें’ (Terms and Conditions) बारीक अक्षरों में होती हैं जिन्हें ग्राहक पढ़ नहीं पाता, कई कंपनियां केवल ‘फिजिकल डैमेज’ (टूट-फूट) को कवर करती हैं और चोरी को ‘नेग्लिजेंस’ (लापरवाही) बताकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं, बीमा क्षेत्र में यह एक आम शिकायत बन गई है कि कंपनियां प्रीमियम वसूलने में तो तेज़ी दिखाती हैं, लेकिन क्लेम सेटलमेंट के समय ग्राहकों को महीनों तक चक्कर कटवाती हैं, इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर #InsuranceScam और #ConsumerRights ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अपने साथ हुए ऐसे ही अनुभवों को साझा कर रहे हैं.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-21 13:42:45


Bajaj Insurance Mobile Insurance Theft Coverage Scam: यह घटना डिजिटल इंश्योरेंस की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है, अक्सर फोन बेचते समय सेल्समैन इंश्योरेंस के फायदों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, लेकिन पॉलिसी के ‘नियम और शर्तें’ (Terms and Conditions) बारीक अक्षरों में होती हैं जिन्हें ग्राहक पढ़ नहीं पाता, कई कंपनियां केवल ‘फिजिकल डैमेज’ (टूट-फूट) को कवर करती हैं और चोरी को ‘नेग्लिजेंस’ (लापरवाही) बताकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं, बीमा क्षेत्र में यह एक आम शिकायत बन गई है कि कंपनियां प्रीमियम वसूलने में तो तेज़ी दिखाती हैं, लेकिन क्लेम सेटलमेंट के समय ग्राहकों को महीनों तक चक्कर कटवाती हैं, इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर #InsuranceScam और #ConsumerRights ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अपने साथ हुए ऐसे ही अनुभवों को साझा कर रहे हैं.

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