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Home > धर्म > दूसरे बड़े मंगल पर ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, हर संकट से मिलेगी राहत,जानिए आरती और मंत्र जाप का सबसे आसान तरीका

दूसरे बड़े मंगल पर ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, हर संकट से मिलेगी राहत,जानिए आरती और मंत्र जाप का सबसे आसान तरीका

Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को उत्तर भारत में बड़े मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है. यह दिन भगवान हनुमान की पूजा के लिए बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन माह में भगवान श्रीराम और हनुमान जी का मिलन हुआ था, इसलिए ज्येष्ठ के मंगलवार का महत्व और भी बढ़ जाता है.

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Last Updated: May 12, 2026 15:01:12 IST

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Bada Mangal 2026: साल 2026 में दूसरा बड़ा मंगल 12 मई यानी आज  मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मंगल दोष से राहत मिलती है. साथ ही घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.

अगर आप भी दूसरे बड़े मंगल पर बजरंगबली की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो यहां जानिए पूजा का सही तरीका, भोग और आरती के नियम.

दूसरे बड़े मंगल की पूजा विधि

 सुबह जल्दी उठकर करें स्नान

बड़े मंगल के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद साफ और विशेष रूप से लाल या केसरिया रंग के वस्त्र पहनें.

हनुमान जी को चढ़ाएं सिंदूर

पूजा के दौरान हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर पर चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर अर्पित करें. धार्मिक मान्यता है कि यह बजरंगबली को अत्यंत प्रिय होता है और इससे ग्रह दोष शांत होते हैं.

प्रिय भोग जरूर लगाएं

हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चना-गुड़ या केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है. अगर संभव हो तो पान का बीड़ा भी अर्पित करें.

 करें मंत्र जाप और पाठ

पूजा के समय हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक या सुंदरकांड का पाठ करें. इसके साथ ही:

“ॐ हं हनुमते नमः”

मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. मान्यता है कि इससे भय, बाधा और नकारात्मकता दूर होती है.

बजरंगबली की आरती (Hanuman Aarti)

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

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जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।।

पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Bada Mangal 2026: साल 2026 में दूसरा बड़ा मंगल 12 मई यानी आज  मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मंगल दोष से राहत मिलती है. साथ ही घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.

अगर आप भी दूसरे बड़े मंगल पर बजरंगबली की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो यहां जानिए पूजा का सही तरीका, भोग और आरती के नियम.

दूसरे बड़े मंगल की पूजा विधि

 सुबह जल्दी उठकर करें स्नान

बड़े मंगल के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद साफ और विशेष रूप से लाल या केसरिया रंग के वस्त्र पहनें.

हनुमान जी को चढ़ाएं सिंदूर

पूजा के दौरान हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर पर चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर अर्पित करें. धार्मिक मान्यता है कि यह बजरंगबली को अत्यंत प्रिय होता है और इससे ग्रह दोष शांत होते हैं.

प्रिय भोग जरूर लगाएं

हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चना-गुड़ या केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है. अगर संभव हो तो पान का बीड़ा भी अर्पित करें.

 करें मंत्र जाप और पाठ

पूजा के समय हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक या सुंदरकांड का पाठ करें. इसके साथ ही:

“ॐ हं हनुमते नमः”

मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. मान्यता है कि इससे भय, बाधा और नकारात्मकता दूर होती है.

बजरंगबली की आरती (Hanuman Aarti)

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

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जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।।

पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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