एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा का लोन सेटलमेंट मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में पहुंचने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद उनके 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज में फंसने की चर्चाएं तेज हो गई थीं. अब इस पूरे मामले पर डॉ. सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी के नेटवर्क पर छवि खराब करने का बड़ा आरोप लगाते हुए सच्चाई सामने रखी है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुकेश अंबानी ने ZEE को हथियाने की कोशिश की, लेकिन आखिर इस पूरे विवाद की असली वजह क्या है और NCLT में 22,000 करोड़ के दावे का सच क्या है, आइए जानते हैं…
‘मेरी छवि खराब करने की कोशिश’
डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, “हमने अपनी संपत्ति बेचकर अपनी देनदारियां चुकाई हैं. कुछ लोग मेरी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पैसे के दम पर सच को ज्यादा देर नहीं छिपाया जा सकता.” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा न करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला पर्सनल गारंटी से जुड़ा है, जिसके तहत उन्होंने कई देनदारों का पैसा पहले ही चुका दिया था, फिर भी उनके खिलाफ NCLT में अर्जी दाखिल की गई.
22,000 करोड़ नहीं, 3,992 करोड़ रुपये का है दावा
डॉ. चंद्रा ने 22,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि असल दावा लगभग 3,992 करोड़ रुपये का है. इसमें से 620 करोड़ रुपये का निपटारा हो चुका है और 1,063 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव दिया गया है.
उन्होंने बताया कि 22,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा 2022 में प्रक्रिया शुरू होने के समय का था. अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. 80% से अधिक लेनदारों ने पुनर्भुगतान की शर्तों पर सहमति जताई है. इस तरह अब मामला सिर्फ करीब 2,000 करोड़ रुपये का बचा है, जिसे मीडिया में बढ़ा-चढ़ाकर 22,000 करोड़ दिखाया जा रहा है.
कर्ज चुकाने के लिए ज़ी और घर तक दांव पर लगाया
डॉ. चंद्रा ने कहा कि उन्होंने देनदारियां चुकाने के लिए हर संभव कदम उठाया, चाहे ज़ी को बेचना पड़े या अपना घर गिरवी रखना पड़े. मुकेश अंबानी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है. मैं चाहता हूँ कि आप दुनिया में नंबर वन बनें, लेकिन अपने लोगों को नियंत्रण में रखें. मैंने आपके पिता धीरूभाई अंबानी से बहुत कुछ सीखा है, लेकिन आपने उनसे कुछ नहीं सीखा.”
डॉ. चंद्रा ने कहा, ‘जब जनवरी 2019 में समस्या शुरू हुई तो मैं उसके सालभर के अंदर मुकेश अंबानी के पास गया था और उनसे कहा कि आप Zee को खरीद लो, मुझे कर्जा चुकाना है. तब उनकी सलाह मानकर मैं वापस आ गया. लेकिन उसके कुछ समय बाद हमारे एक इन्वेस्टर के साथ मिलकर उन्होंने Zee को हथियाना चाहा.’
43,000 करोड़ रुपये का भुगतान पूरा
2019 के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. चंद्रा ने बताया कि कंपनियों पर करीब 45,000 करोड़ रुपये की देनदारी थी. इसमें से 43,000 करोड़ रुपये पर्सनल गारंटी के तहत चुकाए जा चुके हैं और बाकी बचे 2,000 करोड़ रुपये को चुकाने की प्रक्रिया जारी है.
नेट वर्थ पर फैलाई गई गलत जानकारी
अपनी संपत्ति (Net Worth) को लेकर फैल रही अफवाहों पर डॉ. चंद्रा ने कहा कि एक लेनदार ने 2017 में उनकी नेट वर्थ 45,888 करोड़ रुपये बताई थी, जो पूरी तरह गलत है. उन्होंने 2016 में सांसद रहते हुए अपनी कुल संपत्ति 39.08 करोड़ रुपये घोषित की थी.
विजय माल्या का किया जिक्र
विजय माल्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग झूठ फैला रहे हैं, वे यह भूल गए हैं कि माल्या भारतीय बैंकों को धोखा देकर देश छोड़कर भाग गया था. डॉ. चंद्रा ने कहा, ‘मेरी जिंदगी एक खुली किताब है. मैं उन लोगों में से हूँ जिन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और सारा पैसा वापस करने का वादा किया और उसे निभाया भी.’