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IIT Story: सपनों की शुरुआत, लेकिन हकीकत अलग, IIT ग्रेजुएट का स्टार्टअप पर कड़वा अनुभव

IIT ग्रेजुएट ने बताया कि 28 LPA नौकरी छोड़कर स्टार्टअप शुरू किया, लेकिन 11 महीनों में 10-12 लाख खर्च कर चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

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Last Updated: April 23, 2026 22:53:08 IST

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IIT Story: भारत में स्टार्टअप शुरू करने का सपना आज कई युवाओं को आकर्षित कर रहा है, लेकिन हर कहानी सफलता की नहीं होती. हाल ही में Reddit पर शेयर की गई एक पोस्ट में एक IIT ग्रेजुएट ने अपनी स्टार्टअप यात्रा का ऐसा सच बताया है, जो इस चमकदार दुनिया के पीछे छिपी चुनौतियों को उजागर करता है.

यूज़र ने बताया कि उन्होंने 28 लाख सालाना (LPA) की शानदार नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया. उसका उद्देश्य था कुछ ऐसा बनाना, जिस पर उसे पूरा विश्वास हो. लेकिन करीब 11 महीनों के भीतर उसने 10-12 लाख खर्च कर दिए, जिसमें प्रोडक्ट डेवलपमेंट, कर्मचारियों की सैलरी और फंडिंग जुटाने की कोशिशें शामिल थीं.

“टूटा हुआ” स्टार्टअप इकोसिस्टम?

अपने अनुभव साझा करते हुए उसने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को “पूरी तरह से टूटा हुआ” बताया. उसके मुताबिक, जहां इसे मेरिट और इनोवेशन का प्लेटफॉर्म बताया जाता है, वहीं असल में यह अक्सर जान-पहचान, दिखावे और सीमित अवसरों पर आधारित होता है.
उन्होंने दावा किया कि पिच डेक रिव्यू, फंडिंग कंसल्टेंट्स और बूटकैंप्स पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उसे कोई ठोस फायदा नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि मुझे सिर्फ लंबी-लंबी मेंटरशिप कॉल्स, अधूरे वादे और बेअसर नेटवर्किंग इवेंट्स मिले.

फंडिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पोस्ट में सबसे बड़ा सवाल फंडिंग सिस्टम पर उठाया गया. यूज़र के अनुसार यह एक “अलग इंडस्ट्री” की तरह काम करता है, जहां कई प्रोग्राम और इवेंट्स सिर्फ फाउंडर्स से पैसे कमाने के लिए बनाए गए हैं. खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास मजबूत वेंचर कैपिटल (VC) कनेक्शन नहीं होते, फंड जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है.

सभी के लिए नहीं है यह रास्ता

यूज़र ने यह भी माना कि IIT बैकग्राउंड होने की वजह से उसके पास नौकरी के विकल्प अभी भी मौजूद हैं. लेकिन हर फाउंडर के पास यह सुरक्षा नहीं होती. ऐसे में स्टार्टअप फेल होने पर आर्थिक और मानसिक दबाव काफी बढ़ सकता है.

इनोवेशन पर भी सवाल

उन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स में इनोवेशन की कमी पर भी चिंता जताई. उनके अनुसार, यहां ज्यादातर कंपनियां “कॉपी-पेस्ट” मॉडल पर काम करती हैं, जबकि असली deep-tech इनोवेशन अभी भी Silicon Valley जैसे ग्लोबल इकोसिस्टम में देखने को मिलता है.

सोशल मीडिया पर मिला मिला-जुला समर्थन

इस पोस्ट पर कई यूज़र्स ने अपनी सहमति जताई. कुछ ने बताया कि उन्होंने करोड़ों की नौकरी छोड़ने के बाद भी फंडिंग हासिल नहीं की, जबकि कुछ ने स्टार्टअप शुरू करने से पहले दो बार सोचने की सलाह दी.

पोस्ट के अंत में यूज़र ने साफ कहा कि वह हार नहीं मान रहा, लेकिन अब वह बेहतर इकोसिस्टम की तलाश में है. उनका संदेश साफ है कि स्टार्टअप शुरू करना आकर्षक जरूर है, लेकिन इसमें कदम रखने से पहले जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है.

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IIT Story: भारत में स्टार्टअप शुरू करने का सपना आज कई युवाओं को आकर्षित कर रहा है, लेकिन हर कहानी सफलता की नहीं होती. हाल ही में Reddit पर शेयर की गई एक पोस्ट में एक IIT ग्रेजुएट ने अपनी स्टार्टअप यात्रा का ऐसा सच बताया है, जो इस चमकदार दुनिया के पीछे छिपी चुनौतियों को उजागर करता है.

यूज़र ने बताया कि उन्होंने 28 लाख सालाना (LPA) की शानदार नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया. उसका उद्देश्य था कुछ ऐसा बनाना, जिस पर उसे पूरा विश्वास हो. लेकिन करीब 11 महीनों के भीतर उसने 10-12 लाख खर्च कर दिए, जिसमें प्रोडक्ट डेवलपमेंट, कर्मचारियों की सैलरी और फंडिंग जुटाने की कोशिशें शामिल थीं.

“टूटा हुआ” स्टार्टअप इकोसिस्टम?

अपने अनुभव साझा करते हुए उसने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को “पूरी तरह से टूटा हुआ” बताया. उसके मुताबिक, जहां इसे मेरिट और इनोवेशन का प्लेटफॉर्म बताया जाता है, वहीं असल में यह अक्सर जान-पहचान, दिखावे और सीमित अवसरों पर आधारित होता है.
उन्होंने दावा किया कि पिच डेक रिव्यू, फंडिंग कंसल्टेंट्स और बूटकैंप्स पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उसे कोई ठोस फायदा नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि मुझे सिर्फ लंबी-लंबी मेंटरशिप कॉल्स, अधूरे वादे और बेअसर नेटवर्किंग इवेंट्स मिले.

फंडिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पोस्ट में सबसे बड़ा सवाल फंडिंग सिस्टम पर उठाया गया. यूज़र के अनुसार यह एक “अलग इंडस्ट्री” की तरह काम करता है, जहां कई प्रोग्राम और इवेंट्स सिर्फ फाउंडर्स से पैसे कमाने के लिए बनाए गए हैं. खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास मजबूत वेंचर कैपिटल (VC) कनेक्शन नहीं होते, फंड जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है.

सभी के लिए नहीं है यह रास्ता

यूज़र ने यह भी माना कि IIT बैकग्राउंड होने की वजह से उसके पास नौकरी के विकल्प अभी भी मौजूद हैं. लेकिन हर फाउंडर के पास यह सुरक्षा नहीं होती. ऐसे में स्टार्टअप फेल होने पर आर्थिक और मानसिक दबाव काफी बढ़ सकता है.

इनोवेशन पर भी सवाल

उन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स में इनोवेशन की कमी पर भी चिंता जताई. उनके अनुसार, यहां ज्यादातर कंपनियां “कॉपी-पेस्ट” मॉडल पर काम करती हैं, जबकि असली deep-tech इनोवेशन अभी भी Silicon Valley जैसे ग्लोबल इकोसिस्टम में देखने को मिलता है.

सोशल मीडिया पर मिला मिला-जुला समर्थन

इस पोस्ट पर कई यूज़र्स ने अपनी सहमति जताई. कुछ ने बताया कि उन्होंने करोड़ों की नौकरी छोड़ने के बाद भी फंडिंग हासिल नहीं की, जबकि कुछ ने स्टार्टअप शुरू करने से पहले दो बार सोचने की सलाह दी.

पोस्ट के अंत में यूज़र ने साफ कहा कि वह हार नहीं मान रहा, लेकिन अब वह बेहतर इकोसिस्टम की तलाश में है. उनका संदेश साफ है कि स्टार्टअप शुरू करना आकर्षक जरूर है, लेकिन इसमें कदम रखने से पहले जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है.

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