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जय शाह ने बदली महिला क्रिकेट की किस्मत? स्नेह राणा ने किया बड़ा दावा; सुन चौंक गया हर शख्स

Sneha Rana We Women Want Conclave 2026: वी वुमन वांट कॉन्क्लेव में महिला क्रिकेट के टर्निंग प्वाइंट और इसमें देखने को मिल रहे बदलाव को लेकर स्नेहा राणा ने बड़ा दावा किया. जिसे सुन हर कोई हैरान रह गया.

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Last Updated: 2026-08-10 15:52:02

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We Women Want Conclave & Shakti Awards 2026: नई दिल्ली में आज यानी सोमवार (10 अगस्त, 2026) को ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव और शक्ति अवार्ड्स 2026’ की शुरुआत हो चुकी है. यहां भारतीय महिला क्रिकेटर स्नेह राणा ने अपने करियर और महिला क्रिकेट को लेकर बात की. स्नेहा राणा ने कहा, “जब हमने क्रिकेट शुरू किया था, तब महिला क्रिकेट को लेकर इतनी अवेयरनेस नहीं थी. लेकिन वो एक जुनून होता है ना, वो बहुत पहले से ही था. जब मैं तीन-चार साल की थी, तो लड़कों के साथ खेला करती थी. कोई भी बच्चा होता है तो वह छोटे से वैसे ही शुरुआत करता है, गलियों से. तो मैंने भी वैसे ही शुरुआत की. लेकिन धीरे-धीरे जब 9 साल की उम्र में मैंने एकेडमी ज्वाइन की, तो वहां से मुझे अपना रास्ता नजर आया और ऐसे मेरी क्रिकेट की शुरुआत हुई.”

क्रिकेट को लॉन्ग टर्म करियर के तौर पर लेने को लेकर क्या बोलीं?

क्रिकेट को लॉन्ग टर्म वायबल ऑप्शन के तौर पर लेने को लेकर स्नेहा राणा ने कहा, “नहीं, बैक ऑफ करने की तो कभी नहीं सोची. जब भी एकेडमी में एडमिशन लिया था, तो हमारे सर ने सबसे पहला सवाल यही किया था कि आपको आगे क्या करना है? कहां खेलना है? कहां देखते हो आप अपने आप को? तो मैंने उनसे सबसे पहले यही बोला था कि मुझे इंडियन जर्सी पहननी है.” “तब यह पता भी नहीं था कि कौन इंडिया टीम के लिए खेलता है. इतनी अवेयरनेस हमें भी नहीं थी, ऑनेस्टली. और कौन-कौन मेंबर्स हैं. सिर्फ मिताली राज और झूलन गोस्वामी का नाम सुनते थे. फिर धीरे-धीरे उनकी YouTube पर वीडियोज आने लगीं, क्योंकि पहले महिला क्रिकेट के इतने मैच टीवी पर टेलीकास्ट नहीं होते थे. तो बस यह था कि खेलना है, लेकिन लॉन्ग टर्म खेलना है. कभी छोड़ने का सोचा नहीं.”

महिला क्रिकेट में बदलाव को लेकर क्या बोलीं?

महिला क्रिकेट के टर्निंग प्वाइंट और इसमें देखने को मिल रहे बदलाव को लेकर स्नेहा राणा ने कहा, “मै कहूंगी कि सडन चेंजेस तो नहीं हैं. यह धीरे-धीरे हुआ है. जो हमारे वेटरन क्रिकेटर्स थे उन्होंने कहीं न कहीं इसकी नींव डाली थी और बहुत सालों से यह चलता आ रहा था.”

जय शाह को लेकर कही ये बात

“बट मै कहूंगी कि डेफिनेटली से कि 2017 वर्ल्ड कप जब हुआ था और इंडिया टीम फाइनलिस्ट बनी थी, तो वहां से बदलाव की शुरुआत हुई. इसके बाद मै एक नाम लेना चाहूंगी जय शाह सर, उन्होंने महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए बहुत मेहनत की है. एंड ऑफ कोर्स BCCI को भी सबसे बड़ा थैंक्स, क्योंकि उन्होंने बहुत सारे बदलाव किए हैं. पे पैरिटी में बदलाव किए हैं और अभी बैक-टू-बैक बहुत सारी महिला क्रिकेट सीरीज होने लगी हैं, जो पहले नहीं होती थीं. फिर WPL आया, तो बहुत सारे बदलाव आए हैं. लेकिन द चेंज हैज स्टार्टेड फ्रॉम 2017, आफ्टर 2017 वर्ल्ड कप.”

महिला क्रिकेट के सामने सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल क्या है?

स्नेहा राणा ने कहा, “आई थिंक सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल जो है वो लोगों का माइंडसेट होता है. तो पहले हमेशा लोग यही सोचते थे कि अरे, ये तो लड़कों का गेम है. लड़कियां क्यों खेल रही हैं? क्योंकि हमने भी अपने बचपन में बहुत सारी ऐसी चीजें सुनी हैं कि ये तो लड़के खेलते हैं. अरे, बैट-बॉल तो लड़कों का गेम है.” “तो आई थिंक वो जो माइंडसेट है ना, वो सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल था पहले. अभी बहुत सारे चेंजेस आए हैं उस माइंडसेट को लेकर लेकिन कहीं न कहीं अभी भी वो चीज है. मै उम्मीद करूंगी कि आने वाले टाइम में वो भी खत्म हो जाए.”

परिवार के सपोर्ट को लेकर क्या बोलीं?

खेल के दौरान परिवार के साथ और उनके सपोर्ट को लेकर स्नेहा राणा ने कहा, ” सबसे बड़ा मोटिवेशन आपका घर से ही शुरू होता है. तो मैं बहुत भाग्यशाली थी कि मेरी फैमिली से हमेशा 100% सपोर्ट रहा है. और एकेडमी जाने के लिए मेरी मदर और मेरी सिस्टर ने ही मुझे फोर्स किया था. खेलती तो मैं बहुत पहले से थी, लेकिन एकेडमी ज्वाइन करने के लिए उन्होंने ही फोर्स किया था. तो आई एम रियली ग्रेटफुल टू देम.”

“मुझे उस तरीके से अपनी फैमिली से नहीं लड़ना पड़ा कि मुझे भेजो. उनका फुल सपोर्ट है. जब भी आपके मन में कुछ डाउट आता है या जब भी ऐसा लगता है कि बहुत सारे लोग देख रहे हैं, तो यू हैव टू ट्रस्ट द प्रोसेस. और मैं हमेशा यही सोचती हूं कि व्हाई यू हैव स्टार्टेड? तो जब आप ये सोचते हो, तो आपको अपने आंसर्स अपने आप आगे मिलते हैं.”

मेंटल प्रिपरेशन को लेकर स्नेहा ने क्या कहा?

मेंटल प्रिपरेशन को लेकर स्नेहा ने कहा, “पर्सनली, मैं प्रेशर को ऐज एन अपॉर्चुनिटी लेती हूं और उसको बहुत ही पॉजिटिव तरीके से देखती हूं. मेडिटेशन आजकल बहुत हेल्प करता है. सब लोग बोलते हैं कि कभी प्रेशर आए तो आप मेडिटेशन किया करो, बट कोई करता नहीं है. तो मेडिटेशन ने मुझे हेल्प किया है और मुझे लगता है कि पर्सनली जब आप प्रेशर वाली बात कर रहे हो, तो मेरी परफॉर्मेंस और निखरकर आती है.””तो यस, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस अपॉर्चुनिटी को कैसे देख रहे हैं. उस प्रेशर को आप कैसे ले रहे हैं? तो इट्स जस्ट दैट.”

स्नेहा राणा के करियर का सबसे खास पल कौन सा रहा?

बेस्ट मोमेंट को लेकर स्नेहा ने कहा, “शुरुआत से मेरे आइडल सचिन सर थे. तो व्हेन आई मेड कमबैक इन 2021… सचिन तेंदुलकर, क्योंकि एक सचिन हमारी ऑडियंस में भी जुड़े हैं हमारे साथ. सचिन तेंदुलकर, सॉरी, नॉट यू दिस टाइम  सचिन तेंदुलकर.” “यस, तो व्हेन आई मेड अ कमबैक आफ्टर फाइव इयर्स इन इंटरनेशनल क्रिकेट इन 2021, तो टेस्ट मैच में मेरा डेब्यू था और उसमें मैंने बहुत अच्छा परफॉर्म किया था. एंड देन ही ट्वीटेड अबाउट मी. सो आई वाज ऑन क्लाउड नाइन. तो मेरे लिए वो हमेशा-हमेशा स्पेशल रहेगा.”

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We Women Want Conclave & Shakti Awards 2026: नई दिल्ली में आज यानी सोमवार (10 अगस्त, 2026) को ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव और शक्ति अवार्ड्स 2026’ की शुरुआत हो चुकी है. यहां भारतीय महिला क्रिकेटर स्नेह राणा ने अपने करियर और महिला क्रिकेट को लेकर बात की. स्नेहा राणा ने कहा, “जब हमने क्रिकेट शुरू किया था, तब महिला क्रिकेट को लेकर इतनी अवेयरनेस नहीं थी. लेकिन वो एक जुनून होता है ना, वो बहुत पहले से ही था. जब मैं तीन-चार साल की थी, तो लड़कों के साथ खेला करती थी. कोई भी बच्चा होता है तो वह छोटे से वैसे ही शुरुआत करता है, गलियों से. तो मैंने भी वैसे ही शुरुआत की. लेकिन धीरे-धीरे जब 9 साल की उम्र में मैंने एकेडमी ज्वाइन की, तो वहां से मुझे अपना रास्ता नजर आया और ऐसे मेरी क्रिकेट की शुरुआत हुई.”

क्रिकेट को लॉन्ग टर्म करियर के तौर पर लेने को लेकर क्या बोलीं?

क्रिकेट को लॉन्ग टर्म वायबल ऑप्शन के तौर पर लेने को लेकर स्नेहा राणा ने कहा, “नहीं, बैक ऑफ करने की तो कभी नहीं सोची. जब भी एकेडमी में एडमिशन लिया था, तो हमारे सर ने सबसे पहला सवाल यही किया था कि आपको आगे क्या करना है? कहां खेलना है? कहां देखते हो आप अपने आप को? तो मैंने उनसे सबसे पहले यही बोला था कि मुझे इंडियन जर्सी पहननी है.” “तब यह पता भी नहीं था कि कौन इंडिया टीम के लिए खेलता है. इतनी अवेयरनेस हमें भी नहीं थी, ऑनेस्टली. और कौन-कौन मेंबर्स हैं. सिर्फ मिताली राज और झूलन गोस्वामी का नाम सुनते थे. फिर धीरे-धीरे उनकी YouTube पर वीडियोज आने लगीं, क्योंकि पहले महिला क्रिकेट के इतने मैच टीवी पर टेलीकास्ट नहीं होते थे. तो बस यह था कि खेलना है, लेकिन लॉन्ग टर्म खेलना है. कभी छोड़ने का सोचा नहीं.”

महिला क्रिकेट में बदलाव को लेकर क्या बोलीं?

महिला क्रिकेट के टर्निंग प्वाइंट और इसमें देखने को मिल रहे बदलाव को लेकर स्नेहा राणा ने कहा, “मै कहूंगी कि सडन चेंजेस तो नहीं हैं. यह धीरे-धीरे हुआ है. जो हमारे वेटरन क्रिकेटर्स थे उन्होंने कहीं न कहीं इसकी नींव डाली थी और बहुत सालों से यह चलता आ रहा था.”

जय शाह को लेकर कही ये बात

“बट मै कहूंगी कि डेफिनेटली से कि 2017 वर्ल्ड कप जब हुआ था और इंडिया टीम फाइनलिस्ट बनी थी, तो वहां से बदलाव की शुरुआत हुई. इसके बाद मै एक नाम लेना चाहूंगी जय शाह सर, उन्होंने महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए बहुत मेहनत की है. एंड ऑफ कोर्स BCCI को भी सबसे बड़ा थैंक्स, क्योंकि उन्होंने बहुत सारे बदलाव किए हैं. पे पैरिटी में बदलाव किए हैं और अभी बैक-टू-बैक बहुत सारी महिला क्रिकेट सीरीज होने लगी हैं, जो पहले नहीं होती थीं. फिर WPL आया, तो बहुत सारे बदलाव आए हैं. लेकिन द चेंज हैज स्टार्टेड फ्रॉम 2017, आफ्टर 2017 वर्ल्ड कप.”

महिला क्रिकेट के सामने सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल क्या है?

स्नेहा राणा ने कहा, “आई थिंक सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल जो है वो लोगों का माइंडसेट होता है. तो पहले हमेशा लोग यही सोचते थे कि अरे, ये तो लड़कों का गेम है. लड़कियां क्यों खेल रही हैं? क्योंकि हमने भी अपने बचपन में बहुत सारी ऐसी चीजें सुनी हैं कि ये तो लड़के खेलते हैं. अरे, बैट-बॉल तो लड़कों का गेम है.” “तो आई थिंक वो जो माइंडसेट है ना, वो सबसे बड़ा ऑब्स्टेकल था पहले. अभी बहुत सारे चेंजेस आए हैं उस माइंडसेट को लेकर लेकिन कहीं न कहीं अभी भी वो चीज है. मै उम्मीद करूंगी कि आने वाले टाइम में वो भी खत्म हो जाए.”

परिवार के सपोर्ट को लेकर क्या बोलीं?

खेल के दौरान परिवार के साथ और उनके सपोर्ट को लेकर स्नेहा राणा ने कहा, ” सबसे बड़ा मोटिवेशन आपका घर से ही शुरू होता है. तो मैं बहुत भाग्यशाली थी कि मेरी फैमिली से हमेशा 100% सपोर्ट रहा है. और एकेडमी जाने के लिए मेरी मदर और मेरी सिस्टर ने ही मुझे फोर्स किया था. खेलती तो मैं बहुत पहले से थी, लेकिन एकेडमी ज्वाइन करने के लिए उन्होंने ही फोर्स किया था. तो आई एम रियली ग्रेटफुल टू देम.”

“मुझे उस तरीके से अपनी फैमिली से नहीं लड़ना पड़ा कि मुझे भेजो. उनका फुल सपोर्ट है. जब भी आपके मन में कुछ डाउट आता है या जब भी ऐसा लगता है कि बहुत सारे लोग देख रहे हैं, तो यू हैव टू ट्रस्ट द प्रोसेस. और मैं हमेशा यही सोचती हूं कि व्हाई यू हैव स्टार्टेड? तो जब आप ये सोचते हो, तो आपको अपने आंसर्स अपने आप आगे मिलते हैं.”

मेंटल प्रिपरेशन को लेकर स्नेहा ने क्या कहा?

मेंटल प्रिपरेशन को लेकर स्नेहा ने कहा, “पर्सनली, मैं प्रेशर को ऐज एन अपॉर्चुनिटी लेती हूं और उसको बहुत ही पॉजिटिव तरीके से देखती हूं. मेडिटेशन आजकल बहुत हेल्प करता है. सब लोग बोलते हैं कि कभी प्रेशर आए तो आप मेडिटेशन किया करो, बट कोई करता नहीं है. तो मेडिटेशन ने मुझे हेल्प किया है और मुझे लगता है कि पर्सनली जब आप प्रेशर वाली बात कर रहे हो, तो मेरी परफॉर्मेंस और निखरकर आती है.””तो यस, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस अपॉर्चुनिटी को कैसे देख रहे हैं. उस प्रेशर को आप कैसे ले रहे हैं? तो इट्स जस्ट दैट.”

स्नेहा राणा के करियर का सबसे खास पल कौन सा रहा?

बेस्ट मोमेंट को लेकर स्नेहा ने कहा, “शुरुआत से मेरे आइडल सचिन सर थे. तो व्हेन आई मेड कमबैक इन 2021… सचिन तेंदुलकर, क्योंकि एक सचिन हमारी ऑडियंस में भी जुड़े हैं हमारे साथ. सचिन तेंदुलकर, सॉरी, नॉट यू दिस टाइम  सचिन तेंदुलकर.” “यस, तो व्हेन आई मेड अ कमबैक आफ्टर फाइव इयर्स इन इंटरनेशनल क्रिकेट इन 2021, तो टेस्ट मैच में मेरा डेब्यू था और उसमें मैंने बहुत अच्छा परफॉर्म किया था. एंड देन ही ट्वीटेड अबाउट मी. सो आई वाज ऑन क्लाउड नाइन. तो मेरे लिए वो हमेशा-हमेशा स्पेशल रहेगा.”

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