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Bengaluru Murder Mystery 2003: इंदौर में राजा रघुवंशी हत्याकांड की कहानी ने हर किसी को अंदर तक हिलाकर रख दिया था. राजा रघुवंशी की शादी सोनम रघुवंशी से हुई थी; लेकिन, सोनम किसी और से प्यार करती थी. नतीजतन, उसने अपने प्रेमी, राज कुशवाहा के साथ मिलकर राजा की हत्या की साज़िश रची. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगभग 22 साल पहले भी ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना घटी थी? जी हां, वह साल था 2003 खास तौर पर 30 नवंबर और जगह थी बैंगलोर.
इस मामले में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरीश शामिल थे, जिनकी सगाई 21 साल की शुभा शंकरनारायण से हुई थी. शुभा देखने में बेहद शांत और मासूम लड़की लगती थी, वहीं गिरीश की शख्सियत में भी एक तरह का ठहराव और शांति झलकती थी. उनके परिवार बनशंकरी इलाके में एक-दूसरे के पड़ोसी थे और काफी लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे. लेकिन फिर उसके बाद क्या हुआ जिसके कारण यह तारीख क्राइम के इतिहास के पन्नों में मशहूर हो गई. चलिए शुरुआत से जानें पूरी कहानी.
सगाई के चार दिन बाद क्या हुआ था?
गिरीश और शुभा की सगाई 30 नवंबर को हुई थी. चार दिन बाद, 3 दिसंबर की रात को शुभा ने गिरीश को HAL एयरपोर्ट के पास डिनर के लिए बुलाया. खाना खाने के बाद, शुभा ने हवाई जहाज़ों को उतरते देखने की इच्छा ज़ाहिर की. गिरीश, अपनी मंगेतर की इच्छा पूरी करने को बेताब था, इसलिए वह उसे एक ऐसी जगह ले गया जहां से वह हवाई जहाज़ों को नीचे उतरते देख सके. जैसे ही गिरीश आसमान की ओर देख रहा था, तभी एक अनजान हमलावर ने पीछे से किसी हथियार से उस पर हमला कर दिया.
गिरीश पर हमले के बाद क्या हुआ?
गिरीश ज़मीन पर गिर पड़ा, और उसके शरीर से तेज़ी से खून बहने लगा. शुभा तुरंत उसे मणिपाल अस्पताल ले गई; लेकिन, जब तक वे वहां पहुंचे, गिरीश अपनी आखिरी सांस ले चुका था. शुभा ने पुलिस को बताया कि जब वे हवाई जहाज़ देख रहे थे, तभी अचानक किसी अनजान व्यक्ति ने गिरीश पर हमला कर दिया. हालांकि, पुलिस को शुभा के बयानों में कुछ गड़बड़ लगी. नतीजतन, उन्होंने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी. मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच की गई, लेकिन पहेली के टुकड़े आपस में जुड़ते हुए नहीं दिख रहे थे. काफी समय तक पुलिस को इस मामले में कोई सुराग नहीं मिला.
बाद में, जब सगाई समारोह की वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच की गई तो यह बात सामने आई कि शुभा पूरे कार्यक्रम के दौरान साफ तौर पर परेशान और उदास दिख रही थी. शुभा ने पुलिस को जो कहानी सुनाई थी, उसमें कई विसंगतियां साफ नजर आ रही थीं. जब उसके कॉल रिकॉर्ड की जांच की गई, तो पता चला कि जिस दिन गिरीश पर हमला हुआ था, उसी दिन उसने अरुण वर्मा को 73 कॉल किए थे. अरुण और कोई नहीं बल्कि शुभा का प्रेमी था.
अरुण के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक किया गया
अरुण के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करने पर पता चला कि वह उस जगह के बिल्कुल पास मौजूद था, जहां गिरीश की हत्या हुई थी. पुलिस ने उन दोनों से कड़ी पूछताछ की, और आखिरकार, उन्होंने गिरीश की हत्या करने की बात कबूल कर ली. शुभा और अरुण ने गिरीश की हत्या को अंजाम देने के लिए दो लोगों को हायर किया था.
आरोपियों की सजा
फिर शुभा के प्रेमी की संलिप्तता सामने आई, शुरुआत में उसे आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में यह फैसला पलट दिया गया. 2010 में, सत्र न्यायालय ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा. 2014 में, सर्वोच्च न्यायालय ने शुभा को ज़मानत दे दी, और उसके बाद बाकी आरोपियों को भी रिहा कर दिया गया.
घटना पर बनी कन्नड़ फिल्म
इस मामले को मीडिया में इतनी व्यापक कवरेज मिली कि इस पर आधारित एक कन्नड़ फिल्म, जिसका शीर्षक रिंग रोड शुभा था, बनाई गई. खास बात यह है कि यह फिल्म पूरी तरह से महिलाओं की एक टीम द्वारा बनाई गई थी.