Live TV
Search
Home > धर्म > मुश्किल वक्त में जब न दिखे कोई रास्ता, टूटने लगे हौसला; तब सुंदरकांड की ये 5 चौपाइयां बदल देंगी आपकी किस्मत

मुश्किल वक्त में जब न दिखे कोई रास्ता, टूटने लगे हौसला; तब सुंदरकांड की ये 5 चौपाइयां बदल देंगी आपकी किस्मत

सुंदरकांड की ये 5 शक्तिशाली चौपाइयां आपके मन से डर, चिंता और नकारात्मक विचारों को निकाल फेंकती हैं. इन चौपाईयों के नियमित पाठ से मन में साहस, शांति और विश्वास पैदा होता है. यहां एक नजर में पढ़िए चौपाईयां और समझिए इनका असली मतलब-

Written By:
Last Updated: 2026-05-29 20:14:16

Mobile Ads 1x1

जिंदगी में कई बार ऐसा मोड़ आता है, जब चारों तरफ सिर्फ अंधेरा दिखाई देता है. लाख मेहनत करने पर भी सन मुताबिक परिणाम नहीं मिलते, जिसके कारण मन निराशा से भर जाता है. कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि मानो किस्मत ने ही मुंह मोड़ लिया है. यदि आपकी लाइफ में अक्सर ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है और आपका हौंसला डगमगाने लगता है तो संकटमोचन हनुमान का नाम लीजिए और सुंदरकांड की चौपाईयों का पाठ करने बैठ जाइए. सुंदरकांड की चौपाईयां करने से मन में घर करने वाले डर, चिंता और नकारात्मकता को निकाल फेंकती हैं और आपकी सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती हैं.

अर्थ: जामवंत जी हनुमान जी से कहते हैं कि इस संसार में ऐसा कोई मुश्किल काम नहीं है, जिसे आप पूरा न कर सके.

कब पाठ करें: जब भी आपके मन में भाव आए कि मुझसे नहीं होगा और डर या संदेह घेरने लगे तो यह चौपाई आपके आत्मविश्वास और साहस को मजबूत कर देती है.

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा।
हृदयं राखि कोसलपुर राजा।।

अर्थ: हनुमान दी कहते हैं कि भगवान राम को अपने हृदय में रखकर कार्य करना आरंभ करें. इससे सभी काम बिना बाधा के सिद्ध हो जाते हैं.

कब पाठ करें: जब भी कोई नया बिजनेस, नौकरी, परीक्षा या बड़ा निर्णय लेने जा रहे हैं तो इस चौपाई का पाठ करने से मन में विश्वास और सकारात्मकता भर जाती है.

राम काज कीन्हें बिनु।
मोहि कहां विश्राम।।

अर्थ: हनुमान जी कहते हैं कि भगवान का काम (मेरा लक्ष्य) पूरा किए बिना मुझे आराम करने का कोई अधिकार नहीं है.

कब पाठ करें: जब भी आपको जरूरी काम या पढ़ाई करते समय थकान होने लगे या किसी काम को टालमटोल करने लगे तो ये चौपाई आपके अंदर गजब का उत्साह जगा देती है और आपको लक्ष्य की प्राप्ति तक रुकने नहीं देती.

जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू।
सो तेहि मिनइ न कछ संदेहू।।

अर्थ: हनुमान जी कहते हैं कि जिस लक्ष्य के लिए सच्चे मन से मेहनत और विश्वास कर लिया जाए तो इसका फल अवश्य मिलता है.

कब पाठ करें: जब भी आपके मन में काम के परिणाम या को लेकर मन में शंका होने लगे तो चौपाई का पाठ करने वाले धैर्य, विश्वास और निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति प्राप्त होती है.

दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी।।

अर्थ: हनुमान जी कहते हैं कि हे दीनों पर दया करने वाले प्रभु! अपने भक्त-रक्षक यश को याद करके मेरे सभी भारी संकटों को दूर कीजिए.

कब पाठ करें: जब आपको कोई रास्ता न दिखे और मन निराश हो तो यह चौपाई तुरंत मानसिक शांति और नई आशा प्रदान करती है.

क्या है चौपाईयों का पाठ करने का सही तरीका

सुंदरकांड की चौपाईयों का पाठ करने से लिए पूर्ण पवित्रता, स्पष्ट उच्चारण और सात्विक भाव धारण करना चाहिए. आप मंगलवार, शनिवार या पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त और संध्याकाल में पाठ कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले लाल या पीले रंग के शुद्ध वस्त्र धारण करें. लाल रंग का साफ आसन बिछाएं. एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान का विग्रह स्थापित करें. घी का अखंड दिया लगाए और फल, गुड़-चना, लड्डू या मिष्ठान को भोग लगाकर कम से कम 108 बार प्रति चौपाई का पाठ कर सकते हैं.

MORE NEWS

Home > धर्म > मुश्किल वक्त में जब न दिखे कोई रास्ता, टूटने लगे हौसला; तब सुंदरकांड की ये 5 चौपाइयां बदल देंगी आपकी किस्मत

Written By:
Last Updated: 2026-05-29 20:14:16

Mobile Ads 1x1

जिंदगी में कई बार ऐसा मोड़ आता है, जब चारों तरफ सिर्फ अंधेरा दिखाई देता है. लाख मेहनत करने पर भी सन मुताबिक परिणाम नहीं मिलते, जिसके कारण मन निराशा से भर जाता है. कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि मानो किस्मत ने ही मुंह मोड़ लिया है. यदि आपकी लाइफ में अक्सर ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है और आपका हौंसला डगमगाने लगता है तो संकटमोचन हनुमान का नाम लीजिए और सुंदरकांड की चौपाईयों का पाठ करने बैठ जाइए. सुंदरकांड की चौपाईयां करने से मन में घर करने वाले डर, चिंता और नकारात्मकता को निकाल फेंकती हैं और आपकी सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती हैं.

अर्थ: जामवंत जी हनुमान जी से कहते हैं कि इस संसार में ऐसा कोई मुश्किल काम नहीं है, जिसे आप पूरा न कर सके.

कब पाठ करें: जब भी आपके मन में भाव आए कि मुझसे नहीं होगा और डर या संदेह घेरने लगे तो यह चौपाई आपके आत्मविश्वास और साहस को मजबूत कर देती है.

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा।
हृदयं राखि कोसलपुर राजा।।

अर्थ: हनुमान दी कहते हैं कि भगवान राम को अपने हृदय में रखकर कार्य करना आरंभ करें. इससे सभी काम बिना बाधा के सिद्ध हो जाते हैं.

कब पाठ करें: जब भी कोई नया बिजनेस, नौकरी, परीक्षा या बड़ा निर्णय लेने जा रहे हैं तो इस चौपाई का पाठ करने से मन में विश्वास और सकारात्मकता भर जाती है.

राम काज कीन्हें बिनु।
मोहि कहां विश्राम।।

अर्थ: हनुमान जी कहते हैं कि भगवान का काम (मेरा लक्ष्य) पूरा किए बिना मुझे आराम करने का कोई अधिकार नहीं है.

कब पाठ करें: जब भी आपको जरूरी काम या पढ़ाई करते समय थकान होने लगे या किसी काम को टालमटोल करने लगे तो ये चौपाई आपके अंदर गजब का उत्साह जगा देती है और आपको लक्ष्य की प्राप्ति तक रुकने नहीं देती.

जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू।
सो तेहि मिनइ न कछ संदेहू।।

अर्थ: हनुमान जी कहते हैं कि जिस लक्ष्य के लिए सच्चे मन से मेहनत और विश्वास कर लिया जाए तो इसका फल अवश्य मिलता है.

कब पाठ करें: जब भी आपके मन में काम के परिणाम या को लेकर मन में शंका होने लगे तो चौपाई का पाठ करने वाले धैर्य, विश्वास और निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति प्राप्त होती है.

दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी।।

अर्थ: हनुमान जी कहते हैं कि हे दीनों पर दया करने वाले प्रभु! अपने भक्त-रक्षक यश को याद करके मेरे सभी भारी संकटों को दूर कीजिए.

कब पाठ करें: जब आपको कोई रास्ता न दिखे और मन निराश हो तो यह चौपाई तुरंत मानसिक शांति और नई आशा प्रदान करती है.

क्या है चौपाईयों का पाठ करने का सही तरीका

सुंदरकांड की चौपाईयों का पाठ करने से लिए पूर्ण पवित्रता, स्पष्ट उच्चारण और सात्विक भाव धारण करना चाहिए. आप मंगलवार, शनिवार या पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त और संध्याकाल में पाठ कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले लाल या पीले रंग के शुद्ध वस्त्र धारण करें. लाल रंग का साफ आसन बिछाएं. एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान का विग्रह स्थापित करें. घी का अखंड दिया लगाए और फल, गुड़-चना, लड्डू या मिष्ठान को भोग लगाकर कम से कम 108 बार प्रति चौपाई का पाठ कर सकते हैं.

MORE NEWS