आज जहां बेटे-बेटी में फर्क नहीं समझा जाता है वहीं, कुछ लोग बेटे की चाहत में किस हद तक चले जाते हैं कि सोच पाना मुश्किल हो जाए. इसका एक जीता-जागता उदाहरण हाल ही में देखने को मिला. दरअसल, सर्टिफाइड आयुर्वेदिक डॉक्टर प्रज्ञा तोमर के पास एक गर्भवती महिला अपनी सास के साथ पहुंची. बातचीत के दौरान महिला ने बताया कि उसके 3 बच्चे हैं और चौथे बच्चे के लिए प्रेग्नेंट है. यह सुनकर डॉ. तोमर ने कहा कि, लगातार बच्चे पैदा करना जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. आप तीन बच्चों के बाद चौथा क्यों करना चाहती हैं? तो महिला ने बताया कि, मेरी तीन बेटियां हैं बेटा नहीं है. बेटा न होने के कारण बार-बार बच्चे पैदा कर रहे हैं. इसी पर डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि उनकी यह सोच कितनी गलत है. आइए पूरा मामला विस्तार से जानते हैं.
तीन बेटियां हैं और चौथा पेट में
डॉ. प्रज्ञा एक महिला से पूछती हैं कि तुम्हारी तीन बेटियां हैं फिर बेटे के चक्कर में और बच्चे क्यों पैदा करना चाहती हो? महिला के बोलते से पहले उसकी सांस तपाक से कहती है कि, मुझे तो वंश चलाने के लिए एक बेटा तो चाहिए. यह सुनकर डॉक्टर हैरान होकर पूछती हैं कि आपका वंश कौन चला रहा है.
वंश चलाने के लिए बेटा चाहिए लाली
महिला के साथ आई उसकी सास डॉक्टर से कहती है कि, बेटियां तो अपने घर चली जाती हैं. बेटे हमारे घर में रहते हैं. बेटे ही तो वंश चलाते हैं. हालांकि, डॉक्टर उसको कई तरह से समझाने की कोशिश करती हैं. लेकिन, महिला की सास कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है.
डॉक्टर लाली बेटा पैदा होने की दवा दे दे
गर्भवती महिला की सास डॉक्टर से कहती है कि, लाली तू मेरी बहू को बेटा होने की दवा दे दे. यह बात सुनकर डॉक्टर हैरान हो गईं. डॉक्टर कहती हैं कि, बेटा होने की कोई दवा नहीं आती है. और न ही आपकी बहू के हाथ में है बेटा पैदा करना. ये तो X और Y क्रोमोसोम पर डिपेंड करता है कि आपकी बहू को क्या होगा.
बेटा-बेटी होने का क्या है साइंस
डॉक्टर के अनुसार, मां हमेशा बच्चे में एक X गुणसूत्र का योगदान करती है क्योंकि महिलाओं में दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं. जबकि एक पिता या तो X या Y गुणसूत्र का योगदान दे सकता है, क्योंकि पुरुषों में एक X और एक Y (XY) होता है. यदि पिता के शुक्राणु में X गुणसूत्र है, तो बच्चा लड़की (XX) होगी और यदि पिता के शुक्राणु में Y गुणसूत्र है, तो बच्चा लड़का (XY) होगा. इस प्रकार, पिता का शुक्राणु बच्चे का लिंग निर्धारित करता है, न कि बहू का.
जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हो
इस बात पर महिला कहती है कि लड़की-लड़की हो रही थी, तो सास कहती है कि क्या तुम नहीं चाहती कि मेरा वंश आगे बढ़े? इसी दबाव में वह बच्चे करती जा रही है. यह सब सुनने के बाद डॉक्टर कहती हैं कि तुम अपनी जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हो.