Jitiya Vrat 2026: बिहार, झारखंड और यूपी में जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत का बहुत महत्व है. माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख और तरक्की के लिए यह व्रत रखती हैं. इस दिन माताएं 24 घंटे तक बिना पानी के निर्जला व्रत करती हैं. यह व्रत हर साल आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत सप्तमी को ‘नहायखाय’ से होती है और नवमी को पारण के साथ खत्म होता है. इस साल नहायखाय 2 अक्टूबर को है, जबकि मुख्य व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा.
जितिया 2026 के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:38 से 05:26 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:34 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:08 से 02:56 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:05 से 06:29 बजे तक
पूजा के लिए जरूरी सामान
जितिया की पूजा के लिए कुशा, गन्ना, मौली, अक्षत, धूप, दीप, कर्पूर, घी, दूध, सिंदूर, रोली, जीमूतवाहन जी की मूर्ति, गोबरमिट्टी से बनी चील और सियारिन की मूर्ति, जितिया का धागा, बांस की डलिया, जनेऊ, फूलमाला, भीगे चने, फल, पानसुपारी, तोरई के पत्ते और प्रसाद के लिए ठेकुआ, हलवा, पुए और केले की जरूरत होती है.
जितिया व्रत की आसान पूजा विधि
- सबसे पहले कुशा से जल छिड़ककर भगवान गणेश, जीमूतवाहन जी, चील और सियारिन की प्रतिमा को स्नान कराएं.
- धूपदीप जलाकर सभी प्रतिमाओं पर फूल और अक्षत चढ़ाएं.
- भगवान गणेश, चील और सियारिन को सिंदूर लगाएं और जीमूतवाहन जी को कुमकुमचंदन का टीका करें.
- सभी को मौली यानी कलावा वस्त्र के रूप में अर्पित करें और गणेश जी और जीमूतवाहन जी को जनेऊ पहनाएं.
- जीमूतवाहन जी को सफेद फूलों की माला और गणेश जी को लाल या पीले फूलों की माला पहनाएं.
- अब भगवान को भोग लगाएं. अगर आप चील और सियारिन की पूजा देवी के रूप में कर रही हैं तो उन्हें श्रृंगार का सामान जरूर चढ़ाएं.
- पूरी विधि से पूजा करने के बाद जितिया व्रत की कथा सुनें, आरती करें और सबको प्रसाद बांटें.
- पूजा के अंत में महिलाएं अपने गले में जितिया का पवित्र धागा पहनती हैं, जिसे बच्चों की रक्षा का प्रतीक माना जाता है.
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