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Home > धर्म > कलियुग किन स्थानों पर रहता है? इसकी कब और कैसे हुई शुरुआत? कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय ने बताया इसका प्रभाव

कलियुग किन स्थानों पर रहता है? इसकी कब और कैसे हुई शुरुआत? कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय ने बताया इसका प्रभाव

Kaliyug kab Shuru Hua: ये हम सभी जानते हैं कि, सतयुग-द्वापर और त्रेता के बाद इस समय कलियुग चल रहा है. क्या हमने कभी इस बात की ओर ध्यान दिया है कि ऐसा क्या कारण रहा होगा जिसके चलते कलियुग को धरती पर आना पड़ा. कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय इस पर क्या कहते हैं? एक पोडकॉस्ट में उन्होंने न सिर्फ कलियुग आने की बात बताई, बल्कि यह कहां-कहां रहता है यह भी बताया.

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: April 19, 2026 14:12:56 IST

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Kaliyug kab Shuru Hua: ये हम सभी जानते हैं कि, सतयुग-द्वापर और त्रेता के बाद इस समय कलियुग चल रहा है. क्या हमने कभी इस बात की ओर ध्यान दिया है कि ऐसा क्या कारण रहा होगा जिसके चलते कलियुग को धरती पर आना पड़ा. न सिर्फ आया बल्कि यहां आकर यहीं का हो गया. महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक आर्यभट्टियम में इस बात का उल्लेख किया है कि जब वह 23 वर्ष के थे तब कलियुग का 3600वां वर्ष चल रहा था. आंकड़ों कहते हैं कि, आर्यभट्ट का जन्म 476 ईसवीं में हुआ था. इस हिसाब से अगर गणना की जाए तो कलियुग का आरंभ 3102 ईसापूर्व के करीब हो चुका था. ये तो रही कलियुग के शुरुआत पर महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की बात, लेकिन, कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय इस पर क्या कहते हैं? एक पोडकॉस्ट में उन्होंने न सिर्फ कलियुग आने की बात बताई, बल्कि यह कहां-कहां रहता है यह भी बताया. तो चलिए जानते हैं कलियुग के बारे में कुछ रोचक जानकारी, लेकिन उससे पहले इंद्रेश उपाध्याय के बारे में जान लेते हैं.

कौन हैं कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय?

देश के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय वृंदावन के युवा और लोकप्रिय कथावाचक हैं. हाल ही में उन्होंने हरियाणा की शिप्रा से शादी की थी. इंद्रेश उपाध्याय ने अपने ज्ञान, अपनी मधुर आवाज़, भजन और कथावाचन से लोगों को दिलों में जगह बनाई है. उनकी विनम्रता और ज्ञान ने न सिर्फ मथुरा को गौरवान्वित किया, बल्कि दुनियाभर में सम्मान मिला. उन्होंने अपनी कथाओं के जरिए लोगों को अनेकों धार्मिक जानकारियां दी हैं.

कलियुग की शुरुआत कब हुई थी?

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय बताते हैं कि, भगवान कृष्ण जिस दिन धरा-धाम छोड़कर गए, कलियुग उसी दिन प्रारंभ हो गया था. इसका विवरण भागवत पुराण में आता है. वे कहते हैं कि, एक बार राजा परीक्षित कहीं जा रहे थे. उसी समय उन्हें पहली बार कलियुग मिला. राजा ने परिचय पूछा उसने कहा मैं कलियुग हूं. इस राजा चौंक कर बोले- तुम कब आए? मुझे तो लग रहा था कि अभी द्वापर ही चल रहा है. तब उसने कहा कि, जब श्रीकृष्ण अपना मानव शरीर छोड़कर पृथ्वी लोक से वैकुंठ गए थे, तब कलियुग का आरंभ हो चुका था.

कलियुग में भगवान जल्दी मान जाते हैं?

इस सवाल का जबाव देते हुए कथावाचक कहते हैं कि, जी कलियुग में ठाकुर जी को हम सभी भक्तों पर दया का भाव ज्यादा होता है. प्रभुजी मानते हैं कि, ये विचारे जीव हैं. इनका जीवन भी छोटा है. दरअसल, इंसान को 100 साल मिले हैं, लेकिन आजकल के खानपान के चलते इस आंकड़े को बहुत कम लोग छू पाते हैं. इंसान को इन सौ सालों में ही शिक्षा, विवाह और बच्चे भी करने हैं. इसलिए इस युग में अगर कोई महापापी भी है और एक बार ठाकुर जी का नाम ले लेता है उद्धार हो जाता है.

कलियुग किन स्थानों पर रहता है?

इस सवाल को उन्होंने एक श्लोक “द्यूतं पानं स्त्रियः सूना, द्यूतं पानं स्त्रियः सूना यत्राधर्मश्चतुर्विधः· पुनश्च याचमानाय जातरूपमदात्प्रभुः।।” के जरिए समझाया. वे कहते हैं कि, भागवत महापुराण में कलियुग के पांच स्थान बताए गए हैं. बता दें कि, ये स्थान भी कलियुग को राजा परीक्षित जी ने ही दिए थे. एक बार की बात है कि, राजा परीक्षित जी कलियुग को पिटाई कर रहे थे, तब उसने उनके चरण पकड़ लिए. इस पर राजा परीक्षित ने उसको रहने के 5 स्थान बताए थे. वे 5 स्थान हैं- जुआ, मदिरा पान या दूषित भोजन, परस्त्री या परपुरुष संग, हिंसा या क्लेश और बिना मेहनत कमाया गया धन.

कलियुग का प्रभाव क्या हैं?

  • माता-पिता अनादर करना.
  • संबंधों को दूषित कर देना. चाहे वो भाई-भाई हो, पति-पत्नी हो या फिर माता पिता हों.
  • किसी के भाव के भाव को दूषित करके दूसरों को बताना.
  • धन को अपनी दासी समझना यानी अपने भोग के लिए प्रयोग करना.
  • मद्यपान और दूषित भोजन करना
  • परस्त्री या परपुरुष संग करने में लज्जा न होना
  • लड़ाई-झगड़ों को बढ़ावा देना.

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Written By: Lalit Kumar
Last Updated: April 19, 2026 14:12:56 IST

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Kaliyug kab Shuru Hua: ये हम सभी जानते हैं कि, सतयुग-द्वापर और त्रेता के बाद इस समय कलियुग चल रहा है. क्या हमने कभी इस बात की ओर ध्यान दिया है कि ऐसा क्या कारण रहा होगा जिसके चलते कलियुग को धरती पर आना पड़ा. न सिर्फ आया बल्कि यहां आकर यहीं का हो गया. महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक आर्यभट्टियम में इस बात का उल्लेख किया है कि जब वह 23 वर्ष के थे तब कलियुग का 3600वां वर्ष चल रहा था. आंकड़ों कहते हैं कि, आर्यभट्ट का जन्म 476 ईसवीं में हुआ था. इस हिसाब से अगर गणना की जाए तो कलियुग का आरंभ 3102 ईसापूर्व के करीब हो चुका था. ये तो रही कलियुग के शुरुआत पर महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की बात, लेकिन, कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय इस पर क्या कहते हैं? एक पोडकॉस्ट में उन्होंने न सिर्फ कलियुग आने की बात बताई, बल्कि यह कहां-कहां रहता है यह भी बताया. तो चलिए जानते हैं कलियुग के बारे में कुछ रोचक जानकारी, लेकिन उससे पहले इंद्रेश उपाध्याय के बारे में जान लेते हैं.

कौन हैं कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय?

देश के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय वृंदावन के युवा और लोकप्रिय कथावाचक हैं. हाल ही में उन्होंने हरियाणा की शिप्रा से शादी की थी. इंद्रेश उपाध्याय ने अपने ज्ञान, अपनी मधुर आवाज़, भजन और कथावाचन से लोगों को दिलों में जगह बनाई है. उनकी विनम्रता और ज्ञान ने न सिर्फ मथुरा को गौरवान्वित किया, बल्कि दुनियाभर में सम्मान मिला. उन्होंने अपनी कथाओं के जरिए लोगों को अनेकों धार्मिक जानकारियां दी हैं.

कलियुग की शुरुआत कब हुई थी?

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय बताते हैं कि, भगवान कृष्ण जिस दिन धरा-धाम छोड़कर गए, कलियुग उसी दिन प्रारंभ हो गया था. इसका विवरण भागवत पुराण में आता है. वे कहते हैं कि, एक बार राजा परीक्षित कहीं जा रहे थे. उसी समय उन्हें पहली बार कलियुग मिला. राजा ने परिचय पूछा उसने कहा मैं कलियुग हूं. इस राजा चौंक कर बोले- तुम कब आए? मुझे तो लग रहा था कि अभी द्वापर ही चल रहा है. तब उसने कहा कि, जब श्रीकृष्ण अपना मानव शरीर छोड़कर पृथ्वी लोक से वैकुंठ गए थे, तब कलियुग का आरंभ हो चुका था.

कलियुग में भगवान जल्दी मान जाते हैं?

इस सवाल का जबाव देते हुए कथावाचक कहते हैं कि, जी कलियुग में ठाकुर जी को हम सभी भक्तों पर दया का भाव ज्यादा होता है. प्रभुजी मानते हैं कि, ये विचारे जीव हैं. इनका जीवन भी छोटा है. दरअसल, इंसान को 100 साल मिले हैं, लेकिन आजकल के खानपान के चलते इस आंकड़े को बहुत कम लोग छू पाते हैं. इंसान को इन सौ सालों में ही शिक्षा, विवाह और बच्चे भी करने हैं. इसलिए इस युग में अगर कोई महापापी भी है और एक बार ठाकुर जी का नाम ले लेता है उद्धार हो जाता है.

कलियुग किन स्थानों पर रहता है?

इस सवाल को उन्होंने एक श्लोक “द्यूतं पानं स्त्रियः सूना, द्यूतं पानं स्त्रियः सूना यत्राधर्मश्चतुर्विधः· पुनश्च याचमानाय जातरूपमदात्प्रभुः।।” के जरिए समझाया. वे कहते हैं कि, भागवत महापुराण में कलियुग के पांच स्थान बताए गए हैं. बता दें कि, ये स्थान भी कलियुग को राजा परीक्षित जी ने ही दिए थे. एक बार की बात है कि, राजा परीक्षित जी कलियुग को पिटाई कर रहे थे, तब उसने उनके चरण पकड़ लिए. इस पर राजा परीक्षित ने उसको रहने के 5 स्थान बताए थे. वे 5 स्थान हैं- जुआ, मदिरा पान या दूषित भोजन, परस्त्री या परपुरुष संग, हिंसा या क्लेश और बिना मेहनत कमाया गया धन.

कलियुग का प्रभाव क्या हैं?

  • माता-पिता अनादर करना.
  • संबंधों को दूषित कर देना. चाहे वो भाई-भाई हो, पति-पत्नी हो या फिर माता पिता हों.
  • किसी के भाव के भाव को दूषित करके दूसरों को बताना.
  • धन को अपनी दासी समझना यानी अपने भोग के लिए प्रयोग करना.
  • मद्यपान और दूषित भोजन करना
  • परस्त्री या परपुरुष संग करने में लज्जा न होना
  • लड़ाई-झगड़ों को बढ़ावा देना.

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