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Home > धर्म > भगवान शिव का सबसे पवित्र धाम काशी विश्वनाथ, जानिए  इसका धार्मिक महत्व, इतिहास और मोक्ष का मार्ग से जुड़ी मान्यता

भगवान शिव का सबसे पवित्र धाम काशी विश्वनाथ, जानिए  इसका धार्मिक महत्व, इतिहास और मोक्ष का मार्ग से जुड़ी मान्यता

Kashi Vishwanath Mandir: भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक 'काशी' भगवान शिव की सबसे प्रिय नगरी मानी जाती है,मान्यता है कि यहां काशी विश्वनाथ के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं कि काशी विश्वनाथ कैसे पहुंचे व यहां के महत्व  के बारे में.

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Last Updated: April 29, 2026 18:13:40 IST

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Kashi Vishwanath Mandir Ka Mahtav: काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान प्राप्त है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे ‘काशी का हृदय’ भी कहा जाता है.

 मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह मंदिर पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है, जहां भगवान शिव को श्री विश्वनाथ और विश्वेश्वर के नाम से पूजा जाता है, जिसका अर्थ होता है,ब्रह्मांड के स्वामी.

 काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है और इसका उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जिनमें स्कंद पुराण का ‘काशी खंड’ प्रमुख है. इतिहास के दौरान इस मंदिर को कई बार आक्रमणों और विध्वंस का सामना करना पड़ा.वर्तमान स्वरूप में इस मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था. बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने इसके शिखर को स्वर्ण से अलंकृत किया, जिससे इसकी भव्यता और बढ़ गई.

 क्यों कहा जाता है ‘मोक्ष का द्वार’?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी को ‘अविमुक्त क्षेत्र’ कहा गया है, जिसका अर्थ है वह स्थान जिसे भगवान शिव कभी त्यागते नहीं हैं. मान्यता है कि यह स्थान स्वयं शिव और माता पार्वती की शाश्वत उपस्थिति से आच्छादित है.कहा जाता है कि प्रलय के समय भी यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर सुरक्षित रहती है. सबसे विशेष मान्यता यह है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु काशी में होती है, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.यह भी विश्वास है कि अंतिम समय में भगवान शिव स्वयं भक्त के कान में ‘तारक मंत्र’ का उच्चारण करते हैं, जिससे आत्मा को सीधे मोक्ष प्राप्त होता है. इसी कारण काशी विश्वनाथ मंदिर को मोक्ष का द्वार माना जाता है.

 काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे पहुंचे?

काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचना काफी सरल है.

  • हवाई मार्ग: सबसे निकटतम एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है.
  • रेल मार्ग: वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से बहुत नजदीक है और यहां से आसानी से टैक्सी या ऑटो द्वारा पहुंचा जा सकता है.
  • सड़क मार्ग: वाराणसी देश के प्रमुख शहरों से सड़क नेटवर्क द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे यहां पहुंचना सुविधाजनक है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Kashi Vishwanath Mandir Ka Mahtav: काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान प्राप्त है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे ‘काशी का हृदय’ भी कहा जाता है.

 मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह मंदिर पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है, जहां भगवान शिव को श्री विश्वनाथ और विश्वेश्वर के नाम से पूजा जाता है, जिसका अर्थ होता है,ब्रह्मांड के स्वामी.

 काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है और इसका उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जिनमें स्कंद पुराण का ‘काशी खंड’ प्रमुख है. इतिहास के दौरान इस मंदिर को कई बार आक्रमणों और विध्वंस का सामना करना पड़ा.वर्तमान स्वरूप में इस मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था. बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने इसके शिखर को स्वर्ण से अलंकृत किया, जिससे इसकी भव्यता और बढ़ गई.

 क्यों कहा जाता है ‘मोक्ष का द्वार’?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी को ‘अविमुक्त क्षेत्र’ कहा गया है, जिसका अर्थ है वह स्थान जिसे भगवान शिव कभी त्यागते नहीं हैं. मान्यता है कि यह स्थान स्वयं शिव और माता पार्वती की शाश्वत उपस्थिति से आच्छादित है.कहा जाता है कि प्रलय के समय भी यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर सुरक्षित रहती है. सबसे विशेष मान्यता यह है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु काशी में होती है, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.यह भी विश्वास है कि अंतिम समय में भगवान शिव स्वयं भक्त के कान में ‘तारक मंत्र’ का उच्चारण करते हैं, जिससे आत्मा को सीधे मोक्ष प्राप्त होता है. इसी कारण काशी विश्वनाथ मंदिर को मोक्ष का द्वार माना जाता है.

 काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे पहुंचे?

काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचना काफी सरल है.

  • हवाई मार्ग: सबसे निकटतम एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है.
  • रेल मार्ग: वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से बहुत नजदीक है और यहां से आसानी से टैक्सी या ऑटो द्वारा पहुंचा जा सकता है.
  • सड़क मार्ग: वाराणसी देश के प्रमुख शहरों से सड़क नेटवर्क द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे यहां पहुंचना सुविधाजनक है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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