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Home > धर्म > मई 2026 में कब-कब पड़ेगा प्रदोष व्रत, यहां देखें तिथियां, महत्व और सही पूजा मुहूर्त की पूरी जानकारी

मई 2026 में कब-कब पड़ेगा प्रदोष व्रत, यहां देखें तिथियां, महत्व और सही पूजा मुहूर्त की पूरी जानकारी

Pradosh Vrat May 2026: मई का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष रहने वाला हैं,क्योंकि इस महीने में एक नहीं दो-दो प्रदोष व्रत पड़ रहें हैं.आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की तारीख,पूजा विधि और महत्व के बारे में.

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Last Updated: April 29, 2026 17:25:55 IST

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Pradosh Vrat May 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा पाने का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है. इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है. खासकर संध्याकाल में की गई शिव आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. जैसे ही मई का महीना शुरू होने वाला है, भक्तों में प्रदोष व्रत की तिथियों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है.

मई 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में इस बार दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं-

  • पहला प्रदोष व्रत: 14 मई 2026
  • दूसरा प्रदोष व्रत: 28 मई 2026

 प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

14 मई 2026 (कृष्ण पक्ष प्रदोष)

इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 11:20 बजे से शुरू होकर 15 मई की सुबह 08:31 बजे तक रहेगी.
शिव पूजा का श्रेष्ठ समय शाम 07:04 बजे से 09:09 बजे तक रहेगा.

28 मई 2026 (शुक्ल पक्ष प्रदोष)

इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 07:56 बजे से शुरू होकर 29 मई की सुबह 09:50 बजे तक चलेगी.
भगवान शिव की आराधना का शुभ काल शाम 07:12 बजे से 09:15 बजे तक माना गया है.

 प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं. यह व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सुख-शांति के लिए फलदायी माना जाता है. संध्याकाल में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है.

 व्रत के दौरान पालन किए जाने वाले नियम

  •  व्रत के दिन संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक माना जाता है
  •  भोजन में केवल सात्विक आहार लेना चाहिए
  •  प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिए
  •  किसी से विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए
  •  काले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना बेहतर माना जाता है
  •  घर और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
  •  बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करना चाहिए
  •  शिव चालीसा और व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है
  •  जरूरतमंदों को दान करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ता है

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Last Updated: April 29, 2026 17:25:55 IST

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Pradosh Vrat May 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा पाने का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है. इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है. खासकर संध्याकाल में की गई शिव आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. जैसे ही मई का महीना शुरू होने वाला है, भक्तों में प्रदोष व्रत की तिथियों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है.

मई 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में इस बार दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं-

  • पहला प्रदोष व्रत: 14 मई 2026
  • दूसरा प्रदोष व्रत: 28 मई 2026

 प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

14 मई 2026 (कृष्ण पक्ष प्रदोष)

इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 11:20 बजे से शुरू होकर 15 मई की सुबह 08:31 बजे तक रहेगी.
शिव पूजा का श्रेष्ठ समय शाम 07:04 बजे से 09:09 बजे तक रहेगा.

28 मई 2026 (शुक्ल पक्ष प्रदोष)

इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 07:56 बजे से शुरू होकर 29 मई की सुबह 09:50 बजे तक चलेगी.
भगवान शिव की आराधना का शुभ काल शाम 07:12 बजे से 09:15 बजे तक माना गया है.

 प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं. यह व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सुख-शांति के लिए फलदायी माना जाता है. संध्याकाल में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है.

 व्रत के दौरान पालन किए जाने वाले नियम

  •  व्रत के दिन संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक माना जाता है
  •  भोजन में केवल सात्विक आहार लेना चाहिए
  •  प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिए
  •  किसी से विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए
  •  काले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना बेहतर माना जाता है
  •  घर और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
  •  बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करना चाहिए
  •  शिव चालीसा और व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है
  •  जरूरतमंदों को दान करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ता है

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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