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Home > धर्म > Satuvai Amavasya 2026: पितृ दोष शांत करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का सबसे खास दिन, जानें सही तारीख व शुभ मुहूर्त

Satuvai Amavasya 2026: पितृ दोष शांत करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का सबसे खास दिन, जानें सही तारीख व शुभ मुहूर्त

Satuvai Amavasya Upay 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख महीने की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे लोक भाषा में 'सतुवाई अमावस्या' के नाम से जाना जाता है, आइए जानते हैं इस दिन  पितृ दोष शांत करने के कुछ उपायों के बारे में.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: April 16, 2026 20:30:46 IST

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Satuvai Amavasya Upay 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख महीने की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे लोक भाषा में ‘सतुवाई अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है. साल 2026 में यह तिथि 17 अप्रैल, शुक्रवार को पड़ रही है. चिलचिलाती गर्मी के बीच आने वाली यह अमावस्या न केवल पितरों के तर्पण के लिए फलदायी मानी जाती है, बल्कि इस दिन किए जाने वाले विशिष्ट दान-पुण्य जीवन के कष्टों को हरने वाले होते हैं. शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और कुंडली के कई दोषों का शमन होता है.

शुभ मुहूर्त और तिथि का समय

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वैशाख अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल, गुरुवार की रात 08:11 बजे से हो जाएगी. इसका समापन अगले दिन यानी 17 अप्रैल, शुक्रवार को शाम 05:21 बजे होगा. सनातन धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होने के कारण सतुवाई अमावस्या 17 अप्रैल को ही मनाई जाएगी. जो श्रद्धालु पवित्र स्नान करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 04:23 से 05:07 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ है. हालांकि, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण का कार्य पूरे दिन किसी भी समय किया जा सकता है.

धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक आधार

इस अमावस्या को ‘सतुवाई’ कहने के पीछे एक गहरा तर्क छिपा है. वैशाख के महीने में सूर्य अपनी प्रचंडता पर होता है और गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगता है. धार्मिक दृष्टि से सत्तू का दान पितरों को शीतलता और तृप्ति प्रदान करने वाला माना गया है. वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सत्तू एक संतुलित और ठंडा आहार है. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. इस दिन देवताओं को सत्तू का भोग लगाकर इसे गरीबों में बांटना न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक है.

चंद्रमा की ‘अमा’ कला और फलदायी उपाय

शास्त्रों में चंद्रमा की सोलहवीं कला को ‘अमा’ कहा गया है. यह एक ऐसी महाशक्ति है जिसमें चंद्रमा की समस्त कलाओं का सार समाहित होता है. इसका कभी क्षय नहीं होता, इसीलिए इस तिथि पर किए गए उपाय बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं. इस दिन आप कुछ विशेष कार्य कर सकते हैं:

  • जल सेवा: किसी सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ लगवाना या मिट्टी के घड़े का दान करना राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है.
  • जरूरतमंदों की मदद: इस मौसम में जूते-चप्पल, छाता और सूती वस्त्रों का दान पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है.
  • गोसेवा: गाय को हरा चारा खिलाना और गौशाला में सेवा करना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: April 16, 2026 20:30:46 IST

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Satuvai Amavasya Upay 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख महीने की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे लोक भाषा में ‘सतुवाई अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है. साल 2026 में यह तिथि 17 अप्रैल, शुक्रवार को पड़ रही है. चिलचिलाती गर्मी के बीच आने वाली यह अमावस्या न केवल पितरों के तर्पण के लिए फलदायी मानी जाती है, बल्कि इस दिन किए जाने वाले विशिष्ट दान-पुण्य जीवन के कष्टों को हरने वाले होते हैं. शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और कुंडली के कई दोषों का शमन होता है.

शुभ मुहूर्त और तिथि का समय

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वैशाख अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल, गुरुवार की रात 08:11 बजे से हो जाएगी. इसका समापन अगले दिन यानी 17 अप्रैल, शुक्रवार को शाम 05:21 बजे होगा. सनातन धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होने के कारण सतुवाई अमावस्या 17 अप्रैल को ही मनाई जाएगी. जो श्रद्धालु पवित्र स्नान करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 04:23 से 05:07 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ है. हालांकि, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण का कार्य पूरे दिन किसी भी समय किया जा सकता है.

धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक आधार

इस अमावस्या को ‘सतुवाई’ कहने के पीछे एक गहरा तर्क छिपा है. वैशाख के महीने में सूर्य अपनी प्रचंडता पर होता है और गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगता है. धार्मिक दृष्टि से सत्तू का दान पितरों को शीतलता और तृप्ति प्रदान करने वाला माना गया है. वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सत्तू एक संतुलित और ठंडा आहार है. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. इस दिन देवताओं को सत्तू का भोग लगाकर इसे गरीबों में बांटना न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक है.

चंद्रमा की ‘अमा’ कला और फलदायी उपाय

शास्त्रों में चंद्रमा की सोलहवीं कला को ‘अमा’ कहा गया है. यह एक ऐसी महाशक्ति है जिसमें चंद्रमा की समस्त कलाओं का सार समाहित होता है. इसका कभी क्षय नहीं होता, इसीलिए इस तिथि पर किए गए उपाय बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं. इस दिन आप कुछ विशेष कार्य कर सकते हैं:

  • जल सेवा: किसी सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ लगवाना या मिट्टी के घड़े का दान करना राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है.
  • जरूरतमंदों की मदद: इस मौसम में जूते-चप्पल, छाता और सूती वस्त्रों का दान पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है.
  • गोसेवा: गाय को हरा चारा खिलाना और गौशाला में सेवा करना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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