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Home > धर्म > 23 साल बाद सावन सोमवार पर नाग पंचमी का संयोग? महादेव-नाग देवता की पूजा से चमकेगी किस्मत

23 साल बाद सावन सोमवार पर नाग पंचमी का संयोग? महादेव-नाग देवता की पूजा से चमकेगी किस्मत

Nag Panchami 2026: सावन का तीसरा सोमवार इस बार नाग पंचमी के साथ पड़ रहा है. 17 अगस्त 2026 को बनने वाले इस संयोग को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है. धन संकट और कर्ज जैसी परेशानियों के लिए भी इस दिन कई धार्मिक उपाय बताए जाते हैं.

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Last Updated: August 14, 2026 17:59:00 IST

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Nag Panchami 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दौरान सोमवार का व्रत और शिव पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. इस वर्ष सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 को एक ही दिन पड़ रहा है. ऐसे में शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि सावन सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ आने पर भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इस संयोग को बेहद शुभ बताया जाता है. यही वजह है कि इस दिन धन संबंधी परेशानियों, कर्ज, कालसर्प दोष और जीवन में चल रही बाधाओं से मुक्ति के लिए कई तरह के धार्मिक उपाय करने की सलाह दी जाती है. हालांकि, इन उपायों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना क्यों खास?

सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की परंपरा है. भगवान शिव के गले में नाग विराजमान रहते हैं, इसलिए दोनों पर्वों का धार्मिक संबंध भी माना जाता है. 17 अगस्त को दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने के कारण भक्त भगवान शिव का अभिषेक करने के साथ नाग देवता की पूजा भी कर सकते हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ की गई पूजा से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है.

धन संबंधी परेशानियों के लिए नील अपराजिता का उपाय

इस खास दिन भगवान शिव को नीले रंग का अपराजिता फूल अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है. मान्यता के अनुसार सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर शिवलिंग पर नील अपराजिता चढ़ाने से आर्थिक परेशानियों को दूर करने में सहायता मिलती है. धार्मिक मान्यताओं में नील अपराजिता को समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर यह पुष्प अर्पित करने से घर में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि के लिए सकारात्मक वातावरण बनता है.

कर्ज से परेशान हैं तो करें शिव अभिषेक

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज की समस्या से परेशान है, तो 17 अगस्त को भगवान शिव का विधि-विधान से अभिषेक करने की मान्यता है. इसके साथ शिवलिंग पर बेलपत्र और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं. पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपनी समस्या और मनोकामना उनके सामने रखने की धार्मिक परंपरा है. मान्यता के अनुसार शिव भक्ति और नियमित पूजा से व्यक्ति को मानसिक मजबूती मिलती है और वह अपनी आर्थिक परेशानियों से निपटने के लिए बेहतर प्रयास कर पाता है.

नाग पंचमी पर कालसर्प दोष से जुड़े उपाय

नाग पंचमी को नाग देवता की पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन कालसर्प दोष से जुड़े उपाय किए जा सकते हैं. इसके लिए नाग देवता के मंदिर में जाकर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है. कुछ लोग धार्मिक मान्यता के अनुसार चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन करते हैं और उन्हें नदी में प्रवाहित करने या शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा का पालन करते हैं. हालांकि, किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को स्थानीय परंपरा और योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार करना बेहतर माना जाता है.

17 अगस्त को पूजा के लिए ये शुभ समय

17 अगस्त को पूजा-अर्चना के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं. दिए गए समय के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:28 बजे से 6:07 बजे तक रहेगा. इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:26 बजे से 2:23 बजे तक, विजय मुहूर्त शाम 4:17 बजे से 5:14 बजे तक और अमृत काल शाम 6:46 बजे से रात 8:27 बजे तक बताया गया है. पूजा के समय स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की दोबारा पुष्टि करना उचित रहेगा, क्योंकि स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.

नाग पंचमी की पूजा के पीछे क्या है पौराणिक कथा?

नाग पंचमी की परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा राजा जन्मेजय के सर्प सत्र यज्ञ से संबंधित बताई जाती है. मान्यता के अनुसार राजा जन्मेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए नागों को समाप्त करने के उद्देश्य से सर्प सत्र यज्ञ शुरू किया था. कहा जाता है कि जब इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नागों की आहुति दी जाने लगी, तब ऋषि आस्तिक ने वहां पहुंचकर यज्ञ को रुकवाया और नागों की रक्षा की. इसी घटना से नागों की पूजा की परंपरा जुड़ी होने की मान्यता है.

पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

सावन सोमवार और नाग पंचमी के दिन पूजा करते समय मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने की धार्मिक मान्यता है. भक्तों को सात्विक भोजन ग्रहण करने और पूजा के दौरान मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है. शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं दूध अर्पित करने को लेकर स्थानीय परंपराओं और मंदिर के नियमों का पालन करना चाहिए. पूजा में किसी भी सामग्री को चढ़ाने से पहले संबंधित मंदिर की परंपरा या पुरोहित की सलाह लेना उचित है.

इन मंत्रों का करें जाप

पूजा के दौरान भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है. नाग देवता की आराधना के लिए ‘ॐ नागदेवताय नमः’ मंत्र के जाप की भी धार्मिक मान्यता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं. मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान शिव और नाग देवता का ध्यान करना पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना भक्तों के लिए धार्मिक रूप से खास अवसर जरूर है. इस दिन शिव पूजा, नाग देवता की आराधना, अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप जैसी परंपराएं निभाई जा सकती हैं.

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Last Updated: August 14, 2026 17:59:00 IST

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Nag Panchami 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दौरान सोमवार का व्रत और शिव पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. इस वर्ष सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 को एक ही दिन पड़ रहा है. ऐसे में शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि सावन सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ आने पर भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इस संयोग को बेहद शुभ बताया जाता है. यही वजह है कि इस दिन धन संबंधी परेशानियों, कर्ज, कालसर्प दोष और जीवन में चल रही बाधाओं से मुक्ति के लिए कई तरह के धार्मिक उपाय करने की सलाह दी जाती है. हालांकि, इन उपायों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना क्यों खास?

सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की परंपरा है. भगवान शिव के गले में नाग विराजमान रहते हैं, इसलिए दोनों पर्वों का धार्मिक संबंध भी माना जाता है. 17 अगस्त को दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने के कारण भक्त भगवान शिव का अभिषेक करने के साथ नाग देवता की पूजा भी कर सकते हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ की गई पूजा से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है.

धन संबंधी परेशानियों के लिए नील अपराजिता का उपाय

इस खास दिन भगवान शिव को नीले रंग का अपराजिता फूल अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है. मान्यता के अनुसार सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर शिवलिंग पर नील अपराजिता चढ़ाने से आर्थिक परेशानियों को दूर करने में सहायता मिलती है. धार्मिक मान्यताओं में नील अपराजिता को समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर यह पुष्प अर्पित करने से घर में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि के लिए सकारात्मक वातावरण बनता है.

कर्ज से परेशान हैं तो करें शिव अभिषेक

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज की समस्या से परेशान है, तो 17 अगस्त को भगवान शिव का विधि-विधान से अभिषेक करने की मान्यता है. इसके साथ शिवलिंग पर बेलपत्र और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं. पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपनी समस्या और मनोकामना उनके सामने रखने की धार्मिक परंपरा है. मान्यता के अनुसार शिव भक्ति और नियमित पूजा से व्यक्ति को मानसिक मजबूती मिलती है और वह अपनी आर्थिक परेशानियों से निपटने के लिए बेहतर प्रयास कर पाता है.

नाग पंचमी पर कालसर्प दोष से जुड़े उपाय

नाग पंचमी को नाग देवता की पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन कालसर्प दोष से जुड़े उपाय किए जा सकते हैं. इसके लिए नाग देवता के मंदिर में जाकर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है. कुछ लोग धार्मिक मान्यता के अनुसार चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन करते हैं और उन्हें नदी में प्रवाहित करने या शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा का पालन करते हैं. हालांकि, किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को स्थानीय परंपरा और योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार करना बेहतर माना जाता है.

17 अगस्त को पूजा के लिए ये शुभ समय

17 अगस्त को पूजा-अर्चना के लिए अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं. दिए गए समय के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:28 बजे से 6:07 बजे तक रहेगा. इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:26 बजे से 2:23 बजे तक, विजय मुहूर्त शाम 4:17 बजे से 5:14 बजे तक और अमृत काल शाम 6:46 बजे से रात 8:27 बजे तक बताया गया है. पूजा के समय स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की दोबारा पुष्टि करना उचित रहेगा, क्योंकि स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.

नाग पंचमी की पूजा के पीछे क्या है पौराणिक कथा?

नाग पंचमी की परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा राजा जन्मेजय के सर्प सत्र यज्ञ से संबंधित बताई जाती है. मान्यता के अनुसार राजा जन्मेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए नागों को समाप्त करने के उद्देश्य से सर्प सत्र यज्ञ शुरू किया था. कहा जाता है कि जब इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नागों की आहुति दी जाने लगी, तब ऋषि आस्तिक ने वहां पहुंचकर यज्ञ को रुकवाया और नागों की रक्षा की. इसी घटना से नागों की पूजा की परंपरा जुड़ी होने की मान्यता है.

पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

सावन सोमवार और नाग पंचमी के दिन पूजा करते समय मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने की धार्मिक मान्यता है. भक्तों को सात्विक भोजन ग्रहण करने और पूजा के दौरान मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है. शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं दूध अर्पित करने को लेकर स्थानीय परंपराओं और मंदिर के नियमों का पालन करना चाहिए. पूजा में किसी भी सामग्री को चढ़ाने से पहले संबंधित मंदिर की परंपरा या पुरोहित की सलाह लेना उचित है.

इन मंत्रों का करें जाप

पूजा के दौरान भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है. नाग देवता की आराधना के लिए ‘ॐ नागदेवताय नमः’ मंत्र के जाप की भी धार्मिक मान्यता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं. मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान शिव और नाग देवता का ध्यान करना पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना भक्तों के लिए धार्मिक रूप से खास अवसर जरूर है. इस दिन शिव पूजा, नाग देवता की आराधना, अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप जैसी परंपराएं निभाई जा सकती हैं.

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