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Home > धर्म > धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर मचे बवाल के बीच वृंदावन में जुटे संत, संतों ने सनातन समाज को दिया ये संदेश

धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर मचे बवाल के बीच वृंदावन में जुटे संत, संतों ने सनातन समाज को दिया ये संदेश

Dhirendra Shastri statement controversy: भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर उठे विवाद के बीच वृंदावन के संत उनके समर्थन में उतर आए हैं. श्री राधाकांत मंदिर में आयोजित सभा में संतों ने श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को ब्रज की प्राचीन रसिक परंपरा का हिस्सा बताया और सनातन समाज से एकजुट रहने की अपील की.

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Published: November 6, 2026 20:11:11 IST
Last Updated: November 6, 2026 20:11:11 IST

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Dhirendra Shastri statement controversy: मथुरा के वृंदावन में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर संतों और धर्माचार्यों की एक बड़ी सभा आयोजित की गई. ऐतिहासिक श्री राधाकांत मंदिर में हुई इस बैठक में संतों ने धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में एकजुटता दिखाई और सनातन समाज से आपसी विवादों से बचने की अपील की. वक्ताओं ने भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप और उनकी बांकी चितवन को ब्रज की प्राचीन रसिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए कहा कि धार्मिक कथनों को विवाद का विषय बनाने के बजाय उनके भाव और संदर्भ को समझना चाहिए.

श्री राधाकांत मंदिर में जुटे संत और धर्माचार्य

यह सभा ब्रज तीर्थ देवालय न्यास और धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई. इसकी अध्यक्षता महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने की. बैठक में संतों, धर्माचार्यों और सनातन धर्मावलंबियों ने हिस्सा लिया. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर दिए गए बयान के बाद पैदा हुए विवाद पर चर्चा की गई. इस दौरान कई वक्ताओं ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का वर्णन ब्रज की भक्ति और रसिक परंपरा में लंबे समय से होता आया है.

श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को बताया प्राचीन परंपरा का हिस्सा

सभा में भागवताचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है. भक्त कवियों और आचार्यों ने सदियों से अपनी रचनाओं में इस स्वरूप का वर्णन किया है. वहीं, अखाड़ा परिषद वृंदावन के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने कहा कि ठाकुरजी की बांकी चितवन और त्रिभंगी मुद्रा का वर्णन रसिक संतों की परंपरा में मिलता है. ऐसे विषयों को विवाद के बजाय भक्तिभाव के नजरिये से समझना चाहिए.

संतों ने कहा- बयान को संदर्भ से अलग करके न देखें

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री सनातन समाज को जागृत करने का काम कर रहे हैं. किसी के कथन को उसके संदर्भ से अलग करके विवाद खड़ा करना उचित नहीं है. वहीं, ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के महामंत्री आर.के. पांडेय ने कहा कि ब्रज के कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण का वास है और बांके बिहारी का अर्थ उनके त्रिभंगी स्वरूप से जुड़ा है.

आपसी विवाद छोड़ संस्कृति के संरक्षण पर दें ध्यान

सभा की अध्यक्षता कर रहे महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि जब तक किसी कथन के पीछे दुर्भावना न हो, उसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए. ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के अध्यक्ष रमाकांत गोस्वामी ने सनातन समाज से अपील की कि अपनी ऊर्जा आपसी विवादों में लगाने के बजाय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में लगाएं. स्वामी देवानंद परमहंस और ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आनंद बल्लभ गोस्वामी ने भी संवाद और संयम बनाए रखने पर जोर दिया. इस तरह भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर उठे विवाद के बीच वृंदावन के संतों ने उनके समर्थन में एकजुटता दिखाई. सभा में वक्ताओं ने ब्रज की रसिक परंपरा, श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप और धार्मिक विषयों को समझने में संदर्भ एवं भाव के महत्व पर जोर दिया.

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Last Updated: November 6, 2026 20:11:11 IST

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Dhirendra Shastri statement controversy: मथुरा के वृंदावन में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर संतों और धर्माचार्यों की एक बड़ी सभा आयोजित की गई. ऐतिहासिक श्री राधाकांत मंदिर में हुई इस बैठक में संतों ने धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में एकजुटता दिखाई और सनातन समाज से आपसी विवादों से बचने की अपील की. वक्ताओं ने भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप और उनकी बांकी चितवन को ब्रज की प्राचीन रसिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए कहा कि धार्मिक कथनों को विवाद का विषय बनाने के बजाय उनके भाव और संदर्भ को समझना चाहिए.

श्री राधाकांत मंदिर में जुटे संत और धर्माचार्य

यह सभा ब्रज तीर्थ देवालय न्यास और धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई. इसकी अध्यक्षता महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने की. बैठक में संतों, धर्माचार्यों और सनातन धर्मावलंबियों ने हिस्सा लिया. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर दिए गए बयान के बाद पैदा हुए विवाद पर चर्चा की गई. इस दौरान कई वक्ताओं ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का वर्णन ब्रज की भक्ति और रसिक परंपरा में लंबे समय से होता आया है.

श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को बताया प्राचीन परंपरा का हिस्सा

सभा में भागवताचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है. भक्त कवियों और आचार्यों ने सदियों से अपनी रचनाओं में इस स्वरूप का वर्णन किया है. वहीं, अखाड़ा परिषद वृंदावन के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने कहा कि ठाकुरजी की बांकी चितवन और त्रिभंगी मुद्रा का वर्णन रसिक संतों की परंपरा में मिलता है. ऐसे विषयों को विवाद के बजाय भक्तिभाव के नजरिये से समझना चाहिए.

संतों ने कहा- बयान को संदर्भ से अलग करके न देखें

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री सनातन समाज को जागृत करने का काम कर रहे हैं. किसी के कथन को उसके संदर्भ से अलग करके विवाद खड़ा करना उचित नहीं है. वहीं, ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के महामंत्री आर.के. पांडेय ने कहा कि ब्रज के कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण का वास है और बांके बिहारी का अर्थ उनके त्रिभंगी स्वरूप से जुड़ा है.

आपसी विवाद छोड़ संस्कृति के संरक्षण पर दें ध्यान

सभा की अध्यक्षता कर रहे महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि जब तक किसी कथन के पीछे दुर्भावना न हो, उसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए. ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के अध्यक्ष रमाकांत गोस्वामी ने सनातन समाज से अपील की कि अपनी ऊर्जा आपसी विवादों में लगाने के बजाय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में लगाएं. स्वामी देवानंद परमहंस और ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आनंद बल्लभ गोस्वामी ने भी संवाद और संयम बनाए रखने पर जोर दिया. इस तरह भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर उठे विवाद के बीच वृंदावन के संतों ने उनके समर्थन में एकजुटता दिखाई. सभा में वक्ताओं ने ब्रज की रसिक परंपरा, श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप और धार्मिक विषयों को समझने में संदर्भ एवं भाव के महत्व पर जोर दिया.

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