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Home > मनोरंजन > अपराध का ग्लैमराइजेशन? ‘लॉरेंश ऑफ पंजाब’ पर बवाल, OTT रिलीज को लेकर Punjab पुलिस ने उठाई बड़ी मांग

अपराध का ग्लैमराइजेशन? ‘लॉरेंश ऑफ पंजाब’ पर बवाल, OTT रिलीज को लेकर Punjab पुलिस ने उठाई बड़ी मांग

Punjab Police on Lawrence Series: पंजाब पुलिस ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से डॉक्यूमेंट्री 'लॉरेंस ऑफ़ पंजाब' की OTT रिलीज पर रोक लगाने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री अपराध को महिमामंडित करती है और युवाओं पर बुरा असर डालती है. उन्होंने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए ZEE5 से दुनिया भर से इसका ट्रेलर हटाने को कहा है; कंटेंट पर बढ़ती निगरानी के बीच केंद्र सरकार के जवाब का इंतज़ार है.

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Last Updated: April 23, 2026 16:53:26 IST

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Lawrence of Punjab Documentary: पंजाब पुलिस ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से डॉक्यूमेंट्री ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ की OTT रिलीज पर रोक लगाने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री अपराध को महिमामंडित करती है और युवाओं पर बुरा असर डालती है. उन्होंने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए ZEE5 से दुनिया भर से इसका ट्रेलर हटाने को कहा है; कंटेंट पर बढ़ती निगरानी के बीच केंद्र सरकार के जवाब का इंतज़ार है.
 
पंजाब पुलिस ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) से संपर्क किया है और आने वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ पर सार्वजनिक पहुंच पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. यह सीरीज 27 अप्रैल को एक OTT प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होने वाली है.
 

पंजाब पुलिस ने ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ के कंटेंट पर चिंता जताई

ANI के अनुसार, एक औपचारिक संदेश में, स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (साइबर क्राइम) वी. नीरज ने डॉक्यूमेंट्री के संबंध में राज्य पुलिस की चिंताओं से अवगत कराया. बताया जा रहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके आपराधिक उभार को दिखाती है. कहा जा रहा है कि इस सीरीज़ में असली अपराधों के संदर्भों के साथ-साथ नाटकीय दृश्यों को भी दिखाया गया है, जिनमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या और अन्य हिंसक घटनाएं शामिल हैं.
 
पत्र के अनुसार, अधिकारियों को डर है कि यह डॉक्यूमेंट्री संगठित अपराध को महिमामंडित और तुच्छ बना सकती है. इससे युवाओं के मन पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि आपराधिक गतिविधियों को स्वीकार्य या आकर्षक के रूप में दिखाया जा सकता है. पुलिस ने आगे कहा कि ऐसा कंटेंट चल रही जांचों में बाधा डाल सकता है और राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ सकता है.
 

पंजाब पुलिस ने ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के खिलाफ कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया

यह अपील सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A(1) के तहत, IT (सार्वजनिक पहुंच के लिए जानकारी को ब्लॉक करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के संबंधित प्रावधानों के साथ की गई है. पंजाब पुलिस ने आग्रह किया है कि ZEE5 को डॉक्यूमेंट्री की रिलीज़ रोकने और दुनिया भर से इसका ट्रेलर हटाने का निर्देश दिया जाए.
 
इस संदेश में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की पिछली टिप्पणियों पर भी प्रकाश डाला गया है. हाई कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई के उन इंटरव्यू का स्वतः संज्ञान लिया था, जिनके बारे में आरोप है कि उन्हें जेल परिसर के अंदर फ़िल्माया गया था. कोर्ट ने कहा था कि ऐसा कंटेंट आपराधिक व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है और चल रहे मुकदमों में बाधा डाल सकता है. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से इस तरह की सामग्री को हटा दें.
 

पंजाब पुलिस ने ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ कंटेंट के असर पर रोशनी डाली

अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन कंटेंट का दायरा काफ़ी बड़ा होता है और ऑडियो-विज़ुअल होने की वजह से इसका असर भी गहरा होता है. इससे यह ज़्यादा आसानी से लोगों तक पहुंचता है और ज़्यादा असरदार होता है, खासकर उन दर्शकों पर जो आसानी से किसी बात से प्रभावित हो जाते हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपराध से जुड़े कंटेंट की कड़ी जांच-पड़ताल हो रही है, खासकर ऐसे कंटेंट की, जिस पर अपराधियों को सनसनीखेज़ तरीके से दिखाने या उनका महिमामंडन करने का आरोप है. मंत्रालय ने अभी तक इस अनुरोध पर कोई जवाब नहीं दिया है.
 
 
 

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Lawrence of Punjab Documentary: पंजाब पुलिस ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से डॉक्यूमेंट्री ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ की OTT रिलीज पर रोक लगाने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री अपराध को महिमामंडित करती है और युवाओं पर बुरा असर डालती है. उन्होंने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए ZEE5 से दुनिया भर से इसका ट्रेलर हटाने को कहा है; कंटेंट पर बढ़ती निगरानी के बीच केंद्र सरकार के जवाब का इंतज़ार है.
 
पंजाब पुलिस ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) से संपर्क किया है और आने वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ पर सार्वजनिक पहुंच पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. यह सीरीज 27 अप्रैल को एक OTT प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होने वाली है.
 

पंजाब पुलिस ने ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ के कंटेंट पर चिंता जताई

ANI के अनुसार, एक औपचारिक संदेश में, स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (साइबर क्राइम) वी. नीरज ने डॉक्यूमेंट्री के संबंध में राज्य पुलिस की चिंताओं से अवगत कराया. बताया जा रहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके आपराधिक उभार को दिखाती है. कहा जा रहा है कि इस सीरीज़ में असली अपराधों के संदर्भों के साथ-साथ नाटकीय दृश्यों को भी दिखाया गया है, जिनमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या और अन्य हिंसक घटनाएं शामिल हैं.
 
पत्र के अनुसार, अधिकारियों को डर है कि यह डॉक्यूमेंट्री संगठित अपराध को महिमामंडित और तुच्छ बना सकती है. इससे युवाओं के मन पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि आपराधिक गतिविधियों को स्वीकार्य या आकर्षक के रूप में दिखाया जा सकता है. पुलिस ने आगे कहा कि ऐसा कंटेंट चल रही जांचों में बाधा डाल सकता है और राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ सकता है.
 

पंजाब पुलिस ने ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के खिलाफ कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया

यह अपील सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A(1) के तहत, IT (सार्वजनिक पहुंच के लिए जानकारी को ब्लॉक करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के संबंधित प्रावधानों के साथ की गई है. पंजाब पुलिस ने आग्रह किया है कि ZEE5 को डॉक्यूमेंट्री की रिलीज़ रोकने और दुनिया भर से इसका ट्रेलर हटाने का निर्देश दिया जाए.
 
इस संदेश में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की पिछली टिप्पणियों पर भी प्रकाश डाला गया है. हाई कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई के उन इंटरव्यू का स्वतः संज्ञान लिया था, जिनके बारे में आरोप है कि उन्हें जेल परिसर के अंदर फ़िल्माया गया था. कोर्ट ने कहा था कि ऐसा कंटेंट आपराधिक व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है और चल रहे मुकदमों में बाधा डाल सकता है. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से इस तरह की सामग्री को हटा दें.
 

पंजाब पुलिस ने ‘लॉरेंस ऑफ़ पंजाब’ कंटेंट के असर पर रोशनी डाली

अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन कंटेंट का दायरा काफ़ी बड़ा होता है और ऑडियो-विज़ुअल होने की वजह से इसका असर भी गहरा होता है. इससे यह ज़्यादा आसानी से लोगों तक पहुंचता है और ज़्यादा असरदार होता है, खासकर उन दर्शकों पर जो आसानी से किसी बात से प्रभावित हो जाते हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपराध से जुड़े कंटेंट की कड़ी जांच-पड़ताल हो रही है, खासकर ऐसे कंटेंट की, जिस पर अपराधियों को सनसनीखेज़ तरीके से दिखाने या उनका महिमामंडन करने का आरोप है. मंत्रालय ने अभी तक इस अनुरोध पर कोई जवाब नहीं दिया है.
 
 
 

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