Hanuman excerpt film: नीम करोली बाबा यानी नीब करौरी बाबा का नाम देश ही नहीं, विदेशों में भी श्रद्धा के साथ लिया जाता है. उनके जीवन, आध्यात्मिक साधना और चमत्कारों से जुड़े कई किस्से भक्तों के बीच प्रचलित हैं. अब बाबा के इसी आध्यात्मिक सफर और उनकी शिक्षाओं को फिल्म ‘हनुमान अंश’ के जरिए बड़े पर्दे पर पेश किया गया है. फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और नीम करोली बाबा में आस्था रखने वाले लोगों के लिए इसे खास फिल्म माना जा रहा है.
चमत्कारों से आगे बाबा के जीवन की कहानी दिखाती है फिल्म
‘हनुमान अंश’ केवल नीम करोली बाबा से जुड़े चमत्कारों को दिखाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके जीवन में आए बदलाव और आध्यात्मिक यात्रा को भी सामने लाने की कोशिश करती है. फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह बाबा साधना के रास्ते पर आगे बढ़े, तपस्या की और देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की. कहानी में उनके गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने से लेकर दोबारा आध्यात्मिक मार्ग पर लौटने और संत के रूप में पहचान बनाने तक के प्रसंगों को जगह दी गई है. इसी के साथ उनकी शिक्षाओं और मानव सेवा को लेकर उनके विचारों को भी फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है.
फिल्म के नाम ‘हनुमान अंश’ के पीछे भी खास वजह
फिल्म के निर्देशक और लेखक विशाल चतुर्वेदी ने इसके नाम को लेकर एक खास वजह बताई है. बताया जाता है कि फिल्म पर रिसर्च के दौरान वह नीब करौरी गांव पहुंचे थे. बाबा को लेकर स्थानीय मान्यताओं में उन्हें भगवान हनुमान का अंश माना जाता है. इसी धारणा से प्रेरित होकर फिल्म का नाम ‘हनुमान अंश’ रखा गया. नीम करोली बाबा के भक्त उन्हें हनुमान जी का भक्त और अंश मानते हैं. उनके जीवन में राम नाम और हनुमान भक्ति का विशेष महत्व बताया जाता है. बाबा अपने अनुयायियों को भी भगवान के नाम का जाप करने और सेवा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते थे‘सीताराम’ का जाप और भक्ति का संदेश नीम करोली बाबा से जुड़े भक्तों के बीच ‘सीताराम’ नाम का जाप काफी प्रसिद्ध है. फिल्म में भी बाबा की आध्यात्मिक सोच और उनके भक्ति मार्ग को प्रमुखता से दिखाने की कोशिश की गई है. कहानी का जोर इस बात पर है कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. जरूरतमंदों की मदद करना, इंसान के प्रति प्रेम रखना और सेवा करना भी सच्ची भक्ति का हिस्सा है. इसी विचार को फिल्म की कहानी में बार-बार उभारा गया है.
आजादी से पहले के भारत की पृष्ठभूमि में बुनी गई कहानी
‘हनुमान अंश’ की कहानी में आजादी से पहले के भारत की झलक भी देखने को मिलती है. उस दौर के सामाजिक और आध्यात्मिक परिवेश के बीच बाबा की यात्रा को आगे बढ़ाया गया है. फिल्म में उनके साधक बनने, तपस्या करने और अलग-अलग जगहों की यात्रा करने से जुड़े प्रसंगों को दिखाया गया है. इसके बाद उनके जीवन में गृहस्थ अवस्था आने और फिर संत के रूप में आध्यात्मिक जीवन की ओर लौटने की कहानी को भी जगह दी गई है.
बाबा के किरदार में शोभिनव सत्य
फिल्म में नीम करोली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्य ने निभाई है. इस किरदार के जरिए उन्होंने बाबा के व्यक्तित्व में दिखाई देने वाले ठहराव, सहजता और आध्यात्मिक भाव को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है. फिल्म से जुड़े लोगों के मुताबिक, बाबा का किरदार निभाना उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी थी. दर्शकों की ओर से भी उनके अभिनय को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आने की बात कही गई है. ‘हनुमान अंश’ को उनके करियर के लिए भी अहम फिल्म माना जा रहा है.
विशाल चतुर्वेदी ने लिखी और निर्देशित की फिल्म
‘हनुमान अंश’ की कहानी लिखने के साथ इसका निर्देशन भी विशाल चतुर्वेदी ने किया है. फिल्म में शोभिनव सत्य के अलावा विहान एस हेगड़े, चंदन आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल के रस्तोगी और गुलशन पांडे जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं. फिल्म की कहानी को नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़े प्रसंगों और उनकी शिक्षाओं के इर्द-गिर्द रखा गया है. इसमें मनोरंजन के साथ आस्था और आध्यात्मिकता को प्रमुख स्थान दिया गया है.
ज्यादा प्रमोशन नहीं, फिर भी भक्तों में उत्सुकता
‘हनुमान अंश’ का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार देखने को नहीं मिला, इसके बावजूद फिल्म को लेकर नीम करोली बाबा के अनुयायियों और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले दर्शकों के बीच उत्सुकता दिखाई दे रही है. बाबा की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है. उनके आश्रम और उनसे जुड़ी आध्यात्मिक मान्यताओं के कारण विदेशी अनुयायियों के बीच भी उनकी काफी पहचान है. यही वजह है कि बाबा के जीवन पर बनी फिल्म को लेकर उनके भक्तों की खास दिलचस्पी देखने को मिल रही है.
फिल्म का दूसरा हिस्सा भी आने की तैयारी
‘हनुमान अंश’ को लेकर एक और खास जानकारी सामने आई है कि फिल्म का दूसरा भाग भी बनाया जाएगा. यानी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़े कुछ और पहलुओं को आगे की कहानी में दिखाया जा सकता है. फिलहाल पहले भाग में बाबा के साधक बनने से लेकर संत के रूप में उनकी पहचान और उनकी सेवा भावना पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया है.
फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
नीम करोली बाबा की कहानी को सिर्फ चमत्कारों की कहानी के तौर पर देखने के बजाय ‘हनुमान अंश’ उनके जीवन के उस पहलू को सामने लाने की कोशिश करती है, जिसमें भक्ति का संबंध मानव सेवा से जोड़ा गया है. फिल्म यह संदेश देने की कोशिश करती है कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल स्वयं के लिए साधना करने में नहीं, बल्कि दूसरे लोगों की मदद करने और उनके दुख को समझने में भी है. इसी वजह से फिल्म में बाबा के चमत्कारों के साथ उनकी मान्यताओं, साधना, सेवा और इंसानियत को भी अहम जगह दी गई है.