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Home > हेल्थ > 5 साल से बड़ा बच्चा… फिर भी सोते-सोते कर लेता है सू-सू? इसके पीछे है यह बड़ा कारण, 3 तरह से करें बचाव

5 साल से बड़ा बच्चा… फिर भी सोते-सोते कर लेता है सू-सू? इसके पीछे है यह बड़ा कारण, 3 तरह से करें बचाव

Child Urinate Problem: 4 साल की उम्र तक बच्चों का बिस्तर गीला करना (bedwetting) सामान्य है. लेकिन कुछ में 5-7 साल की उम्र के बाद भी यह समस्या देखी जाती है. बता दें कि, आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में इस समस्या को तन के अलावा मन से भी जोड़कर देखा गया है. आअब सवाल है कि आखिर, सू-सू करने के पीछे का कारण क्या है? बच्चे के सू-सू करने की समस्या कैसे दूर करें? आइए जानते हैं इस बारे में-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: April 21, 2026 18:42:03 IST

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Child Urinate Problem: 4 साल की उम्र तक बच्चों का बिस्तर गीला करना (bedwetting) सामान्य है. यह अक्सर गहरे सोने, धीमी शारीरिक परिपक्वता या आनुवंशिक कारणों से हो सकता है. हालांकि, यह कोई बीमारी नहीं है और समय के साथ ठीक हो जाती है. लेकिन, 5 साल या उससे बड़े कई बच्चों में बिस्तर पर सू-सू करना ठीक नहीं है. हालांकि, कुछ बच्चे समय के साथ इस पर कंट्रोल कर लेते हैं, लेकिन कुछ में 5-7 साल की उम्र के बाद भी यह समस्या देखी जाती है. बता दें कि, आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में इस समस्या को तन के अलावा मन से भी जोड़कर देखा गया है. आयुर्वेद में इस समस्या को शय्यामूत्र कहा गया है. यह केवल आदत नहीं, बल्कि शरीर व मन दोनों से जुड़ा विषय माना जाता है. अब सवाल है कि आखिर, सू-सू करने के पीछे का कारण क्या है? बच्चे के सू-सू करने की समस्या कैसे दूर करें? इस बारे में India News को बता रही हैं आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय लखनऊ की डॉ. शचि श्रीवास्तव.

बच्चे के बिस्तर गीला कर लेने की खास वजह

डॉ. शचि श्रीवास्तव के अनुसार, आयुर्वेद कहता है कि बच्चों में बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या वात दोष और कफ दोष का असंतुलन है, जिससे नसें कमजोर होती हैं और किसी भी चीज का भार नहीं झेल पाती हैं. वात दोष और कफ दोष की वृद्धि से गहरी नींद आती है, जिसकी वजह से मस्तिष्क इसका संकेत ही नहीं दे पाता और बच्चे बिस्तर गंदा कर देते हैं. साथ ही कभी-कभी पाचन कमजोर होने से वात धातु असंतुलित होकर मूत्र नियंत्रण कमजोर कर देती है.

समस्या से बचने के आसान उपाय

अजवाइन, काले तिल और गुड़: आयुर्वेद में इस समस्या को कम करने के कुछ तरीके बताए गए हैं. पहला है अजवाइन, काले तिल और गुड़ को मिलाकर जमा लीजिए और दूध के साथ बच्चे को सेवन कराएं. इसके सेवन से नसें मजबूत होती हैं.

आंवला और शहद: अगर आपका बच्चा 5 से ज्यादा का है और बिस्तर गीला कर देता है. इससे बचाव के लिए आंवला और शहद का मिश्रण भी लाभकारी है. दिन में दो बार बच्चे को आंवला और शहद का मिश्रण खिलाएं.

इन चीजों का रखें ध्यान: ध्यान रखने वाली बात ये है कि इस समय बच्चों को बिल्कुल भी डांटे नहीं और दूसरों के सामने शर्मिंदा न करें. ये समस्या सिर्फ मन की नहीं बल्कि तन की भी है. बच्चों में आदत डालें कि वे रात को सोने से पहले वॉशरूम जरूर जाएं. इसके अलावा बच्चों को प्यार से समझाएं कि वे अपने शरीर के संकेतों को समझें. कई बार बच्चे खेल में या नींद में होने की वजह से भी संकेतों को अनदेखा करते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है.

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Written By: Lalit Kumar
Last Updated: April 21, 2026 18:42:03 IST

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Child Urinate Problem: 4 साल की उम्र तक बच्चों का बिस्तर गीला करना (bedwetting) सामान्य है. यह अक्सर गहरे सोने, धीमी शारीरिक परिपक्वता या आनुवंशिक कारणों से हो सकता है. हालांकि, यह कोई बीमारी नहीं है और समय के साथ ठीक हो जाती है. लेकिन, 5 साल या उससे बड़े कई बच्चों में बिस्तर पर सू-सू करना ठीक नहीं है. हालांकि, कुछ बच्चे समय के साथ इस पर कंट्रोल कर लेते हैं, लेकिन कुछ में 5-7 साल की उम्र के बाद भी यह समस्या देखी जाती है. बता दें कि, आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में इस समस्या को तन के अलावा मन से भी जोड़कर देखा गया है. आयुर्वेद में इस समस्या को शय्यामूत्र कहा गया है. यह केवल आदत नहीं, बल्कि शरीर व मन दोनों से जुड़ा विषय माना जाता है. अब सवाल है कि आखिर, सू-सू करने के पीछे का कारण क्या है? बच्चे के सू-सू करने की समस्या कैसे दूर करें? इस बारे में India News को बता रही हैं आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय लखनऊ की डॉ. शचि श्रीवास्तव.

बच्चे के बिस्तर गीला कर लेने की खास वजह

डॉ. शचि श्रीवास्तव के अनुसार, आयुर्वेद कहता है कि बच्चों में बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या वात दोष और कफ दोष का असंतुलन है, जिससे नसें कमजोर होती हैं और किसी भी चीज का भार नहीं झेल पाती हैं. वात दोष और कफ दोष की वृद्धि से गहरी नींद आती है, जिसकी वजह से मस्तिष्क इसका संकेत ही नहीं दे पाता और बच्चे बिस्तर गंदा कर देते हैं. साथ ही कभी-कभी पाचन कमजोर होने से वात धातु असंतुलित होकर मूत्र नियंत्रण कमजोर कर देती है.

समस्या से बचने के आसान उपाय

अजवाइन, काले तिल और गुड़: आयुर्वेद में इस समस्या को कम करने के कुछ तरीके बताए गए हैं. पहला है अजवाइन, काले तिल और गुड़ को मिलाकर जमा लीजिए और दूध के साथ बच्चे को सेवन कराएं. इसके सेवन से नसें मजबूत होती हैं.

आंवला और शहद: अगर आपका बच्चा 5 से ज्यादा का है और बिस्तर गीला कर देता है. इससे बचाव के लिए आंवला और शहद का मिश्रण भी लाभकारी है. दिन में दो बार बच्चे को आंवला और शहद का मिश्रण खिलाएं.

इन चीजों का रखें ध्यान: ध्यान रखने वाली बात ये है कि इस समय बच्चों को बिल्कुल भी डांटे नहीं और दूसरों के सामने शर्मिंदा न करें. ये समस्या सिर्फ मन की नहीं बल्कि तन की भी है. बच्चों में आदत डालें कि वे रात को सोने से पहले वॉशरूम जरूर जाएं. इसके अलावा बच्चों को प्यार से समझाएं कि वे अपने शरीर के संकेतों को समझें. कई बार बच्चे खेल में या नींद में होने की वजह से भी संकेतों को अनदेखा करते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है.

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