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2 मर्दों से संबंध बना प्रेग्नेंट हुई महिला, जुड़वा बच्चों के पिता भी अलग, यह दुर्लभ मामला कितना संभव

Heteropaternal superfecundation: हाल ही में आए एक मामले ने मेडिकल साइंस को भी हैरत में डाल दिया है. बता दें कि, कोलंबिया एक मां ने 2 बच्चों को जन्म दिया था जो जुड़वां थे. जब डीएनए टेस्ट कराया गया तो पता चला कि दोनों के पिता अलग-अलग हैं. अब सवाल है कि, क्या जुड़वा बच्चों के पिता अलग-अलग हो सकते हैं? एक ही समय पर एक महिला 2 अलग-अलग पुरुषों से कैसे प्रेग्नेंट हो सकती है?

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Last Updated: April 30, 2026 07:59:32 IST

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Heteropaternal superfecundation: हेल्दी प्रेग्नेंसी हर महिला का सपना होता है. कुछ ऐसे भी कपल्स हैं, जिनके जुड़वां बच्चे हैं. आमतौर पर जुड़वां बच्चों का पिता एक ही होता है. भले ही उस महिला के पति दो ही क्यों न हों. पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले (शिलाई क्षेत्र) के प्रदीप नेगी और कपिल नेगी ने सुनीता नेगी नामक एक महिला से विवाह किया था. इसके बाद बच्चे का जन्म हुआ था. ऐसे में लोगों का सवाल था कि, आखिर बच्चे का असली पिता कौन है? ऐसे मामलों में मेडिकल साइंस जैविक पिता एक मानता है. लेकिन हाल ही में आए एक मामले ने मेडिकल साइंस को भी हैरत में डाल दिया है. बता दें कि, कोलंबिया एक मां ने 2 बच्चों को जन्म दिया था जो जुड़वां थे. जब डीएनए टेस्ट कराया गया तो पता चला कि दोनों के पिता अलग-अलग हैं. अब सवाल है कि, क्या जुड़वा बच्चों के पिता अलग-अलग हो सकते हैं? एक ही समय पर एक महिला 2 अलग-अलग पुरुषों से कैसे प्रेग्नेंट हो सकती है? जुड़वा बच्चों के पिता अलग-अलग होने की स्थिति को क्या कहते हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-

जुड़वा बच्चों के अलग-अलग पिता कैसे?

नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, जुड़वा बच्चों के दो अलग-अलग जैविक पिता होना एक बहुत दुर्लभ स्थिति है. मेडिकल भाषा में इसे ‘हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन’ कहा जाता है. इस स्थिति में एक महिला की कोख से जन्मे 2 बच्चों के पिता के डीएनए अलग-अलग होते हैं. एक रिपोर्ट बताती है कि, दुनिया भर में अब तक ऐसे सिर्फ 20 मामले ही सामने आए हैं. 

जुड़वा बच्चे क्यों होते हैं?

डॉ. पाठक कहती हैं कि जब भ्रूण बनाने के लिए फर्टिलाइज एग तक स्पर्म पहुंचता है तो अगर गर्भाशय में दो अंडे मौजूद हों तो महिला के जुड़वा बच्चे के जन्म देने के चांस बढ़ जाते हैं. जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं एक दोनों एक दूसरे से अलग दिखने वाले, जिन्हें मैनोजाइगॉटिक कहते हैं और दूसरे जो एक दूसरे जैसे दिखने वाले डायजाइगॉटिक. ऐसे बच्चों की आनुवांशिक संरचना बिलकुल एक जैसी होती है और एक दूसरे जैसे दिखने वाले जुड़वा बच्चे एक ही एग से स्पर्म द्वारा फर्टिलाइज होते हैं.

‘सुपरफेकंडेशन’ क्या है?

मेडिकल साइंस इस स्थिति को हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन कहा जाता है. यह तब होता है जब किसी महिला के शरीर से 2 अंडे रिलीज होते हैं. आमतौर पर एक महिला के ओव्यूलेशन पीरियड के दौरान एक ही एग्स रिलीज होता है, लेकिन कभी-कभी शरीर 2 अंडे रिलीज कर देता है. अगर महिला कम समय के गैप में 2 अलग-अलग पुरुषों के साथ संबंध बना लेती है तो दोनों अंडे अलग-अलग स्पर्म से फर्टिलाइज हो सकते हैं. कोलंबिया की नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का यह दावा इंडिया टूडे में प्रमुखता से छपा है.

डॉक्टरों और रिसर्च का क्या कहना है?

एक्सपर्ट का मानना है कि यह स्थिति जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही दुर्लभ भी है. जेनेटिक्स एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के अनुसार, स्पर्म महिला के शरीर में कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं. कोलंबिया के नेशनल यूनिवर्सिटी में ‘लेबोरेटरी ऑफ पॉपुलेशन जेनेटिक्स एंड आइडेंटिफिकेशन’ के रिसचर्स ने बताया कि पिता को बच्चों के पितृत्व पर संदेह था जिसके बाद डीएनए जांच कराई गई. रिपोर्ट में पाया गया कि बच्चों के ‘Y’ क्रोमोसोम अलग-अलग पिताओं से मैच कर रहे थे जिसने इस दुर्लभ मेडिकल कंडीशन को पक्का कर दिया.

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Heteropaternal superfecundation: हेल्दी प्रेग्नेंसी हर महिला का सपना होता है. कुछ ऐसे भी कपल्स हैं, जिनके जुड़वां बच्चे हैं. आमतौर पर जुड़वां बच्चों का पिता एक ही होता है. भले ही उस महिला के पति दो ही क्यों न हों. पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले (शिलाई क्षेत्र) के प्रदीप नेगी और कपिल नेगी ने सुनीता नेगी नामक एक महिला से विवाह किया था. इसके बाद बच्चे का जन्म हुआ था. ऐसे में लोगों का सवाल था कि, आखिर बच्चे का असली पिता कौन है? ऐसे मामलों में मेडिकल साइंस जैविक पिता एक मानता है. लेकिन हाल ही में आए एक मामले ने मेडिकल साइंस को भी हैरत में डाल दिया है. बता दें कि, कोलंबिया एक मां ने 2 बच्चों को जन्म दिया था जो जुड़वां थे. जब डीएनए टेस्ट कराया गया तो पता चला कि दोनों के पिता अलग-अलग हैं. अब सवाल है कि, क्या जुड़वा बच्चों के पिता अलग-अलग हो सकते हैं? एक ही समय पर एक महिला 2 अलग-अलग पुरुषों से कैसे प्रेग्नेंट हो सकती है? जुड़वा बच्चों के पिता अलग-अलग होने की स्थिति को क्या कहते हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-

जुड़वा बच्चों के अलग-अलग पिता कैसे?

नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, जुड़वा बच्चों के दो अलग-अलग जैविक पिता होना एक बहुत दुर्लभ स्थिति है. मेडिकल भाषा में इसे ‘हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन’ कहा जाता है. इस स्थिति में एक महिला की कोख से जन्मे 2 बच्चों के पिता के डीएनए अलग-अलग होते हैं. एक रिपोर्ट बताती है कि, दुनिया भर में अब तक ऐसे सिर्फ 20 मामले ही सामने आए हैं. 

जुड़वा बच्चे क्यों होते हैं?

डॉ. पाठक कहती हैं कि जब भ्रूण बनाने के लिए फर्टिलाइज एग तक स्पर्म पहुंचता है तो अगर गर्भाशय में दो अंडे मौजूद हों तो महिला के जुड़वा बच्चे के जन्म देने के चांस बढ़ जाते हैं. जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं एक दोनों एक दूसरे से अलग दिखने वाले, जिन्हें मैनोजाइगॉटिक कहते हैं और दूसरे जो एक दूसरे जैसे दिखने वाले डायजाइगॉटिक. ऐसे बच्चों की आनुवांशिक संरचना बिलकुल एक जैसी होती है और एक दूसरे जैसे दिखने वाले जुड़वा बच्चे एक ही एग से स्पर्म द्वारा फर्टिलाइज होते हैं.

‘सुपरफेकंडेशन’ क्या है?

मेडिकल साइंस इस स्थिति को हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन कहा जाता है. यह तब होता है जब किसी महिला के शरीर से 2 अंडे रिलीज होते हैं. आमतौर पर एक महिला के ओव्यूलेशन पीरियड के दौरान एक ही एग्स रिलीज होता है, लेकिन कभी-कभी शरीर 2 अंडे रिलीज कर देता है. अगर महिला कम समय के गैप में 2 अलग-अलग पुरुषों के साथ संबंध बना लेती है तो दोनों अंडे अलग-अलग स्पर्म से फर्टिलाइज हो सकते हैं. कोलंबिया की नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का यह दावा इंडिया टूडे में प्रमुखता से छपा है.

डॉक्टरों और रिसर्च का क्या कहना है?

एक्सपर्ट का मानना है कि यह स्थिति जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही दुर्लभ भी है. जेनेटिक्स एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के अनुसार, स्पर्म महिला के शरीर में कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं. कोलंबिया के नेशनल यूनिवर्सिटी में ‘लेबोरेटरी ऑफ पॉपुलेशन जेनेटिक्स एंड आइडेंटिफिकेशन’ के रिसचर्स ने बताया कि पिता को बच्चों के पितृत्व पर संदेह था जिसके बाद डीएनए जांच कराई गई. रिपोर्ट में पाया गया कि बच्चों के ‘Y’ क्रोमोसोम अलग-अलग पिताओं से मैच कर रहे थे जिसने इस दुर्लभ मेडिकल कंडीशन को पक्का कर दिया.

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