Bageshwar Bhagwati Temple Fire: बागेश्वर जिले के कपकोट के बॉर्डर इलाके बदियाकोट में मशहूर माँ भगवती मंदिर में दर्दनाक आग लग गई है. आग लगने से मंदिर परिसर की मुख्य इमारत को बहुत नुकसान हुआ है. आग लगने का कारण अभी पता नहीं चला है. बदियाकोट का यह ऐतिहासिक मंदिर अपनी पुरानी बनावट और लकड़ी की बेहतरीन और मनमोहक नक्काशी के लिए पूरे इलाके में मशहूर था.
यह मंदिर न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए गहरी आस्था का केंद्र था, बल्कि कत्यूरी-कुमाऊं घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल प्रतीक भी था. इस घटना से स्थानीय निवासियों और भक्तों में गहरा दुख है. गांव वालों ने आदि शक्ति देवी जगदम्बा से प्रार्थना की है कि वे सभी की रक्षा करें और इस मुश्किल समय में अपना आशीर्वाद बनाए रखें. प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और नुकसान का आकलन कर रही हैं.
कैसे लगी आग?
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर का स्ट्रक्चर ज़्यादातर लकड़ी का बना था, जिससे काफ़ी नुकसान हुआ है. मंदिर में बिजली भी थी, और पूजा के लिए एक लैंप जलाया जाता था. इसलिए, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या लैंप हो सकता है, हालांकि कारण की पुष्टि नहीं हुई है.
उत्तराखंड से बड़ी खबर: बागेश्वर के बदियाकोट में प्रसिद्ध आदि बद्री मां भगवती मंदिर में लगी भीषण आग! कुमाऊं के प्रमुख शक्तिपीठ में सुबह अचानक भड़की आग। मंदिर को भारी नुकसान की आशंका। प्रशासन और स्थानीय लोग आग बुझाने में जुटे। https://t.co/M2ucrWal1z
— SANTOSH PANDEY (@Santosh53172026) October 16, 2026
मां भगवती मंदिर
बदियाकोट में माँ भगवती मंदिर हिमालय क्षेत्र में है, जो कपकोट से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी आदिशक्ति ने इसी जगह पर राक्षस निशुंभ का वध किया था. इसी वजह से, पुराणों में इस इलाके को “वध कोट” के नाम से भी जाना जाता है. नंदा अष्टमी के मौके पर, यहाँ पारंपरिक रूप से खास पूजा, जागरण और मेले लगते हैं, जिसमें आस-पास के कई गाँवों से लोग आते हैं. राक्षस शुंभ का वध सुमागढ़ नाम की जगह पर हुआ था, इसीलिए बाद में इसे सुमागढ़ के नाम से जाना जाने लगा. राक्षसों के इस वध के कारण ही इस जगह को पुराणों में “वध कोट” के नाम से बताया गया है. यह मंदिर बहुत पुराना है और बाद में इसका रेनोवेशन किया गया.