Haj 2026 Rule Change: हज यात्रा के लिए अलग-अलग देशों के जायरीन ने उड़ान भरना शुरू कर दिया है. भारत के भी जायरीन हज यात्रा के लिए सऊदी अरब जाने वाले हैं. सऊदी सरकार ने इस साल हज यात्रा के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए अपने नियमों में कुछ बदलाव किए हैं. जो जायरीन हज यात्रा पर जा रहे हैं, अगर वे इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.
सऊदी सरकार ने मक्का में मस्जिद अल-हरम और मदीना में मस्जिद-ए-नबवी के अंदर तस्वीरें लेने और वीडियो रिकॉर्ड करने पर रोक लगा दी है.
नियमों का उल्लघंन करने पर लगेगा जुर्माना
इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर 10,000 रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा. इसी तरह अगर कोई व्यक्ति बिना वैध हज वीज़ा के हज यात्रा करते हुए पाया जाता है तो उसे 30,000 रियाल का जुर्माना देना होगा. यात्रा शुरू होने की प्रक्रिया 16 अप्रैल को शुरू हुई और दो अलग-अलग उड़ानों से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री पहले ही मदीना पहुंच चुके हैं. बाकी जायरीनों के 20 मई तक पहुंचने की उम्मीद है.
कब होगी हज यात्रियों की वापसी?
हज तीर्थयात्रियों की अपने देश वापसी की यात्रा 2 जून से शुरू होने वाली है और आखिरी वापसी की उड़ान 28 जून को निर्धारित है. तीर्थयात्रियों के लिए बिना किसी परेशानी के यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सऊदी सरकार ने नियमों को सख्ती से लागू करने के उपाय किए हैं. हज के दौरान अगर कोई व्यक्ति बिना वैध हज वीज़ा के पवित्र स्थलों के अंदर पाया जाता है, तो उस पर 30,000 रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा.
होटलों पर भी लगेगा जुर्माना
इसके अलावा, अगर कोई होटल ऐसे लोगों को अपने यहां ठहराता है जिनके पास वैध हज वीज़ा नहीं है तो होटल प्रबंधन पर 100,000 रियाल का भारी जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही मस्जिद अल-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के अंदर तस्वीरें और वीडियो लेना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. अगर कोई व्यक्ति इन जगहों के अंदर मोबाइल फ़ोन से वीडियो रिकॉर्ड करते या तस्वीरें लेते हुए पाया जाता है तो उस पर 10,000 रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा.
होटलों में खाना बनाने पर पाबंदी
पहले भारत से हज यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को अपना खाना खुद पकाने की आज़ादी थी. उन्हें अपने होटल के कमरों के अंदर खाना बनाने और खाने की अनुमति थी. हालांकि, इस साल इस सुविधा को खत्म कर दिया गया है. अब तीर्थयात्रियों को होटलों के अंदर खाना पकाने की अनुमति नहीं है. नतीजतन, अब तीर्थयात्रियों को अपने-अपने होटलों द्वारा उपलब्ध कराया गया खाना ही खाना होगा.