Honey trap: भारतीय वायु सेना के एक कार्यरत विंग कमांडर के खिलाफ कथित संवेदनशील रक्षा जानकारी लीक करने का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है. अधिकारी को करीब दो महीने पहले गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में है. मामले में अब तक आरोपी की ओर से जमानत याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है. पुलिस ने उसके खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है.
सोशल मीडिया से शुरू हुई बातचीत
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अधिकारी से सोशल मीडिया के जरिए एक महिला ने संपर्क किया था. पुलिस को आशंका है कि महिला कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया तंत्र से जुड़े हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रही थी. बताया जा रहा है कि अधिकारी उस समय निजी जिंदगी से जुड़े मुश्किल दौर से गुजर रहा था. इसी दौरान महिला के साथ उसकी बातचीत शुरू हुई. शुरुआत में सोशल मीडिया चैट के जरिए संपर्क हुआ और बाद में दोनों के बीच वीडियो कॉल भी होने लगीं. जांच एजेंसियों का आरोप है कि समय के साथ यह संपर्क इतना बढ़ गया कि अधिकारी ने कथित तौर पर महिला के साथ कुछ संवेदनशील दस्तावेज और महत्वपूर्ण जानकारी डिजिटल माध्यम से साझा की.
सहयोगी के मोबाइल में एप इंस्टॉल कराने पर भी उठे सवाल
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है. एजेंसियों के अनुसार, अधिकारी ने अपने एक सहयोगी के मोबाइल फोन में एक विशेष एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा था. जांचकर्ताओं को आशंका है कि यह एप स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस मालवेयर हो सकता है. ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसी डिवाइस से डेटा हासिल करने, गतिविधियों पर नजर रखने, लोकेशन की जानकारी जुटाने या डिजिटल संचार तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इस एप के वास्तविक इस्तेमाल और उसकी क्षमता को लेकर जांच अभी जारी है.
IAF इंटेलिजेंस की सूचना के बाद हुई गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, भारतीय वायु सेना की इंटेलिजेंस विंग से मिली महत्वपूर्ण जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की. इसके बाद विंग कमांडर को गिरफ्तार किया गया. शुरुआत में उसे पुलिस हिरासत में रखा गया और बाद में अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित तौर पर साझा की गई संवेदनशील जानकारी किस-किस व्यक्ति या संगठन तक पहुंची. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी के संपर्क में आई महिला किसी बड़े विदेशी जासूसी नेटवर्क का हिस्सा थी.
30 मई को हुई थी गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायु सेना के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कथित पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के जरिए हनी ट्रैप में फंसाए जाने के आरोपों की जांच शुरू की थी. इसी मामले में कार्यरत वायु सेना अधिकारी को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था. जांच पूरी करने के बाद 30 जुलाई को सक्षम अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की गई. हालांकि, मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और आरोपी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही होगी.
अब जांच का फोकस विदेशी नेटवर्क और लीक हुए डेटा पर
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित तौर पर साझा की गई रक्षा संबंधी जानकारी कितनी संवेदनशील थी और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था. जांच एजेंसियां डिजिटल चैट, वीडियो कॉल, कथित एप्लिकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं. अगर जांच में विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े होने की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक अधिकारी को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है.