Maharashtra Farmers Drought Relief: महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य कैबिनेट ने सूखा प्रभावित इलाकों की सूची में 40 और तालुकों को शामिल करने की मंजूरी दे दी है. इसके बाद राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 265 से बढ़कर 305 हो गई है. सरकार ने दिवाली से पहले किसानों को 5,000 रुपये की अग्रिम आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है.
कैबिनेट की बैठक के बाद फडणवीस ने कहा कि कई इलाकों से सूखा प्रभावित सूची में शामिल करने की मांग आ रही थी. इन मांगों और संबंधित रिपोर्ट की समीक्षा के बाद 40 नए तालुकों को सूची में जोड़ने का फैसला किया गया है. महाराष्ट्र में कुल 358 तालुका हैं.
किसानों को कर्ज वसूली से भी राहत
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार कृषि ऋण माफी योजना लागू करने की दिशा में काम कर रही है. साथ ही, बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों से कर्ज की वसूली शुरू न करें. सरकार का उद्देश्य सूखे से परेशान किसानों पर आर्थिक दबाव कम करना है.
पानी और चारे की समस्या
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी का संकट लगातार गंभीर हो रहा है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, यहां जल स्तर करीब तीन मीटर तक गिर गया है और पानी के टैंकरों की जरूरत बढ़ रही है. सरकार ने टैंकरों की आवाजाही पर नजर रखने और पानी का सही वितरण सुनिश्चित करने के लिए GPS ट्रैकिंग के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा, सरकार तय कीमत पर चारा खरीदने और किसानों को चारे की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है, ताकि पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सके.
केंद्र से मांगी मदद
सूखे से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए पिछले सप्ताह 11 सदस्यीय केंद्रीय टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया था. मुख्यमंत्री ने 7 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर 17,500 करोड़ रुपये के अंतरिम राहत प्रस्ताव की जानकारी दी थी. इसमें फसल नुकसान के लिए 13,000 करोड़ रुपये और चारा प्रबंधन के लिए 4,500 करोड़ रुपये मांगे गए थे.
क्या कहते हैं आंकड़े?
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पानी की कमी से करीब 1.493 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं. लगभग 1.41 करोड़ किसान संकट का सामना कर रहे हैं. सरकार ने पीने के पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता देने के साथ रोजगार और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के जरिए भी राहत देने की तैयारी की है.
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