Pahalgam Attack: कभी खुशियों से सजा था उनका घर, कभी सपनों से भरा था उनका संसार… लेकिन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की उस दर्दनाक घटना ने एक ही पल में सब कुछ छीन लिया. जिन हाथों में कभी चूड़ियों की खनक थी, वहां अब सन्नाटा है… जिन मांगों में सिंदूर चमकता था, वहां आज सिर्फ यादों की परछाईं बाकी है. इस दिन हमलावरों ने टूरिस्ट का धर्म जानना चाहा और फिर एक-एक करके हिंदू टूरिस्ट को गोली मार दी। बता दें कि इस हत्याकांड में 26 बेगुनाह लोगों को बेरहमी से मार दिया गया.
एक साल बीत चुका है उस हादसे को, लेकिन जख्म आज भी ताजा हैं. वो महिलाएं, जो एक पल में विधवा हो गईं, आज किस हाल में हैं? कैसे काट रही हैं अपनी ज़िंदगी के ये मुश्किल दिन? उनकी आंखों में अब भी दर्द, इंतज़ार और टूटे सपनों की कहानी साफ झलकती है. देखिए, एक साल बाद उन विधवाओं की जिंदगी में क्या बदला और क्या अब भी वैसा ही है… यह वीडियो आपको अंदर तक झकझोर देगा.
उनके जाने के बाद सब कुछ बहुत बदल गया-प्रियदर्शिनी आचार्य
पहलगाम टेरर अटैक में मारे गए प्रशांत कुमार सतपथी की पत्नी, प्रियदर्शिनी आचार्य कहती हैं, ” मेरे पति की मौत पहलगाम टेरर अटैक में हुई थी. एक साल बीत गया है, फिर भी हर दिन मुझे उनकी याद दिलाता है.उनके जाने के बाद सब कुछ बहुत बदल गया है, मेरी ज़िंदगी और नज़रिया भी सरकार ने उस समय सरकारी नौकरी, मेरे बच्चे की पढ़ाई के लिए पैसे की मदद और पैसे की मदद देने का वादा किया था.”
#WATCH | Balasore, Odisha | Wife of deceased Pahalgam terror attack victim Prasant Kumar Satpathy, Priyadarshini Acharya says, “… My husband died in the Pahalgam terror attack. A year has passed, yet each day reminds me of him… Everything has drastically changed after his… pic.twitter.com/FOL34zCQBj
— ANI (@ANI) April 21, 2026
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए संतोष जगदाले की पत्नी प्रगति जगदाले कहती हैं, “एक साल बीत गया है, लेकिन मैं अभी भी 22 अप्रैल 2026 के पहलगाम हमले में उलझी हुई हूँ.मुझे नहीं पता था कि वह नहीं रहे मुझे लगा कि शायद वह बेहोश हो गए हैं, लेकिन जब हम उन्हें अस्पताल ले जाएंगे तो वह बच जाएंगे. हमारी सरकार ने हमारा दर्द समझा और ऑपरेशन सिंदूर चलाय. मैं सरकार से गुजारिश करना चाहूंगी कि ऐसी चीज़ें दोबारा कभी न हो.घटना के बाद हमें बहुत कुछ सहना पड़ा, लेकिन सरकार ने अपने सभी वादे पूरे किए.पहलगाम हमले में प्रभावित 26 परिवार कभी इससे उबर नहीं पाएंगे. मुझे उम्मीद है कि वे ऐसी जगहों पर लोगों की सुरक्षा पक्का करने के लिए भारतीय सेना में और लोगों की भर्ती करेंगे, जिससे देश के बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार भी मिलेगा.”
#WATCH | Pune, Maharashtra | Wife of deceased Pahalgam terror attack victim Santosh Jagdale, Pragati Jagdale says, “A year has passed, but I am still stuck on 22 April 2026 Pahalgam attack… I did not know that he was no more; I thought maybe he had passed out, but he will… pic.twitter.com/NXdwwhBZ5a
— ANI (@ANI) April 21, 2026
मैं इसे अपनी आखिरी सांस तक नहीं भूल पाऊंगी-संगीता गणबोटे
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर, पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले कौस्तुभ गणबोटे की पत्नी संगीता गणबोटे ने कहा, “पहलगाम में हुआ हमला बहुत खतरनाक था. मैं इसे अपनी आखिरी सांस तक नहीं भूल पाऊंगी. पति की मौत के बाद मैं हमेशा दुख में रहती हूं..मेरा कहना है कि उन्हें (हमलावरों को) यह मैसेज देना चाहिए कि अगर आपकी लड़ाई सरकार से है, तो आपको उनसे बात करनी चाहिए. आम लोगों को मारने से कुछ हासिल नहीं होगा.पढ़ाई के अलावा, स्कूलों को यह भी सिखाना चाहिए कि ऐसे हमले की हालत में कैसे बर्ताव करना है.”
#WATCH | Pune, Maharashtra: On the first anniversary of the Pahalgam terror attack, Sangeeta Ganbote, wife of Kaustubh Ganbote, who lost his life in the Pahalgam terror attack, says, “The attack in Pahalgam was very dangerous. I will not be able to forget it till my last… pic.twitter.com/026jMqg4tc
— ANI (@ANI) April 21, 2026
हम तय नहीं कर सकते कि हम किस धर्म में पैदा होंगे-असावरी जगदाले
पहलगाम टेरर अटैक के शिकार संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले कहती हैं, “पहलगाम टेरर अटैक को एक साल हो गया है. यह हमारे लिए एक काला दिन है क्योंकि जब हमने ट्रिप प्लान किया था तो हम बहुत खुश थे. जब हम पहलगाम पहुँचे थे, तब भी हम तस्वीरें खींच रहे थे और फिर सिर्फ एक घंटे में हमारी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई. एक 25 साल का लड़का AK-47 लेकर आता है और आपसे आपका धर्म पूछता है.हम तय नहीं कर सकते कि हम किस धर्म में पैदा होंगे, लेकिन कलमा पढ़ने के लिए यह ज़बरदस्ती क्यों? क्या हमने कभी आपको हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए मजबूर किया है? लेकिन ऐसा हुआ और लोगों को गोली मार दी गई. ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया जिसमें टेररिस्ट को उनके बेस पर टारगेट किया गया और उन्हें पूरी तरह से खत्म कर दिया गया.मुझे लगता है कि जिस दिन हमारा देश टेररिज़्म-फ़्री हो जाएगा, उस दिन हमें इंसाफ़ मिलेगा.”
कानपुर की ऐशन्या कैसी हैं?
कानपुर के बिजनेसमैन शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या के लिए पहलगाम हमले की यादें आज भी ताजा हैं. उनकी शादी को सिर्फ दो महीने हुए थे जब उनके पति को उनकी आंखों के सामने गोली मार दी गई थी. ऐशन्या ने हमलावरों से खुद को भी मार डालने की गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.शुभम उस दिन पहले शिकार हुए लोगों में से एक था. एक साल बाद, ऐशन्या लखनऊ से करीब 100 किलोमीटर दूर कानपुर के श्याम नगर में एक फ्लैट में अपने ससुराल वालों के साथ रह रही है, लेकिन उसके लिए समय जैसे रुक सा गया है. वह कहती है कि शुभम के बारे में सोचे बिना एक भी दिन नहीं जाता.परिवार अभी भी अपने नुकसान का दुख मना रहा है और सरकार के अपने वादे पूरे करने का इंतजार कर रहा है. उनकी मांग है कि ऐशन्या को सरकारी नौकरी दी जाए और हमले में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाए. परिवार का कहना है कि वादे तो बहुत किए गए, लेकिन वे अभी तक पूरे नहीं हुए. दर्द अभी भी है.
बनावटी नॉर्मल ज़िंदगी जीने की कोशिश
बेंगलुरु में भारत भूषण के परिवार के लिए, यह नुकसान अभी भी यकीन नहीं होता. एक फ़ैमिली वेकेशन के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी. हमले के बाद, उनकी पत्नी सुजाता ने उनके भाई प्रीतम को फ़ोन किया और बताया कि कैसे भारत को गोली मारी गई थी. अपने आख़िरी पलों में, भारत ने अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई. अब, परिवार बनावटी नॉर्मल ज़िंदगी जीने की कोशिश कर रहा है.
सुजाता को उम्मीद है कि वह अपने पति के साथ वह क्लिनिक शुरू कर पाएंगी जिसका उन्होंने सपना देखा था. उनका बेटा स्कूल वापस आ गया है. प्रीतम कहते हैं, “हम रोते नहीं हैं क्योंकि हम टूट नहीं सकते. हम जानते हैं कि हम अंदर से कमज़ोर हैं, फिर भी हम नॉर्मल होने का नाटक करते हैं.” यह परिवार हर दिन सावधानी से जी रहा है, एक-दूसरे का साथ दे रहा है और इस दर्द के साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है.