Raghav Chadha Controversy: आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर राज्यसभा MP राघव चड्ढा ने आज घोषणा की कि वह पार्टी छोड़ रहे हैं और अपर हाउस में आप के कई दूसरे सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो रहे हैं.यह घटनाक्रम आप और उसके नेता अरविंद केजरीवाल के लिए एक बड़ा झटका है.चड्ढा के अलावा, BJP में शामिल होने वाले MP में स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं.
‘पार्टी को 15 साल दिए’
AAP के सीनियर MP अशोक मित्तल और संदीप पाठक के साथ मीडिया से बात करते हुए, चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को 15 साल दिए हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि यह उस “ईमानदार राजनीति” से दूर हो गई है, जिसकी वह कभी वकालत करती थी. उन्होंने कहा, “जिस AAP को मैंने अपनी ज़िंदगी के 15 साल दिए. अब पार्टी ईमानदार पॉलिटिक्स से दूर हो गई है. मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं. मैं पार्टी से दूर जा रहा हूँ और लोगों के करीब जा रहा हूं.”
चड्ढा ने कहा, “संविधान के मुताबिक किसी पार्टी के कुल सासंद में से दो-तिहाई दूसरी पार्टी में मर्ज हो सकते हैं.” “हमने आज इस बारे में राज्यसभा चेयरमैन सी पी राधाकृष्णन को एक लेटर दिया है. जिसमें सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स जमा किए गए हैं.”चड्ढा ने पार्टी पर अपनी असली एंटी-करप्शन जड़ों से भटकने का आरोप लगाया जिससे उसे दिल्ली में सत्ता मिली थी.
राघव चड्ढा कौन हैं?
राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल का बहुत करीबी माना जाता था. दोनों आंदोलन के समय से ही साथ थे. चड्ढा ने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत आम आदमी पार्टी से की थी. 2015 में उन्हें पार्टी का नेशनल ट्रेजरर बनाया गया. उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव साउथ दिल्ली से लड़ा लेकिन हार गए. 2020 में उन्होंने राजेंद्र नगर से दिल्ली असेंबली का चुनाव लड़ा और जीत गए.
इसके बाद उन्हें आम आदमी पार्टी का पंजाब इंचार्ज बनाया गया. 21 मार्च, 2022 को उन्हें आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया. राघव चड्ढा पंजाब से सबसे कम उम्र के राज्यसभा मेंबर हैं. वह पहले दिल्ली जल बोर्ड के वाइस-चेयरमैन थे और 2022 तक दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से MLA रहे.
कैसे हुई गड़बड़
असल में, केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच दूरियां उसी दिन से दिखने लगीं जब केजरीवाल जेल में थे और राघव सोशल मीडिया पर अपनी और अपनी पत्नी परिणीति की लंदन में घूमते और मस्ती करते हुए फोटो अपलोड कर रहे थे. राघव चड्ढा को लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब से भी दूर रखा गया था. उन्होंने ऑफिशियली श्री आनंदपुर साहिब सीट से चुनाव लड़ा था. पॉलिटिकल एनालिस्ट का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के ज़रूरी मामलों पर काफी शांत रहे हैं.
जहां विपक्ष इसे AAP के अंदर के मतभेदों का संकेत बता रहा है, वहीं पार्टी के सीनियर नेता संजय सिंह और नए डिप्टी लीडर डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे दूसरे MPs को ज़िम्मेदारियां देने के मकसद से एक नॉर्मल ऑर्गेनाइज़ेशनल प्रोसेस बताया है.
मैं एक नदी हूं जो समय आने पर बाढ़ बन जाती है-राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने पार्टी के फैसले पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके इनडायरेक्टली अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, “मेरी चुप्पी को हार मत समझना. मैं एक नदी हूं जो समय आने पर बाढ़ बन जाती है.”
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो नज़रिए सामने आ रहे हैं. एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे एक सामान्य बदलाव बता रही है, तो दूसरी तरफ राघव चड्ढा के हाव-भाव इसे आवाज़ दबाने की कोशिश बता रहे हैं.
पार्टी की इमेज पर असर
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह विवाद बढ़ता है, तो इसका असर पार्टी की इमेज और अंदरूनी बैलेंस दोनों पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब AAP नेशनल लेवल पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
यह साफ नहीं है कि मुद्दा डिसिप्लिन का है या स्ट्रैटेजी का, लेकिन यह तय है कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरी ने एक नई पॉलिटिकल हलचल पैदा कर दी है. आने वाले दिनों में यह देखना ज़रूरी होगा कि यह विवाद यहीं खत्म होता है या किसी बड़े पॉलिटिकल बदलाव की शुरुआत बनता है.