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महिला पत्रकारों पर कथित हमले से सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस तलब; जांच समिति बनाने के संकेत

Supreme Court: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है. कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को तलब किया है.

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Last Updated: October 15, 2026 15:29:50 IST

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Supreme Court: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस को तलब किया है. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि घटना की जांच के लिए एक समिति बनाई जा सकती है. साथ ही, अदालत ने साफ किया कि प्रदर्शन स्थलों पर रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रदर्शन स्थलों पर जाते हैं लेकिन वहां उन्हें कथित तौर पर हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. ऐसे में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और प्रभावी नियम बनाए जाने की जरूरत है.

जांच समिति के लिए मांगे गए नाम

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इंदिरा जयसिंह से दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में दस्तावेज जमा करने को कहा. पहले लिफाफे में उन महिला पत्रकारों के नाम देने होंगे, जिनके साथ कथित तौर पर हमला हुआ. दूसरे लिफाफे में उन सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीशों और पुलिस अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं, जिन्हें संभावित जांच समिति में शामिल किया जा सकता है. 

कराई गई FIR

बता दें कि जयसिंह ने एक महिला पत्रकार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. बताया गया कि इस पत्रकार के खिलाफ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराई है.

केंद्र ने भी अदालत में रखी अपनी बात

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद लोगों में पत्रकारों और रील बनाने वालों के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महिला के साथ अभद्रता नहीं होनी चाहिए, चाहे वह पत्रकार हो या महिला पुलिसकर्मी. उन्होंने अदालत से व्यापक और सामान्य निर्देश जारी करने से बचने का अनुरोध किया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई के संकेत दिए.

ये भी पढ़ें: दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल बनाने पर विवाद, धरने पर अंकिता भंडारी का परिवार, राहुल-प्रियंका ने दिया समर्थन

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Supreme Court: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस को तलब किया है. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि घटना की जांच के लिए एक समिति बनाई जा सकती है. साथ ही, अदालत ने साफ किया कि प्रदर्शन स्थलों पर रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रदर्शन स्थलों पर जाते हैं लेकिन वहां उन्हें कथित तौर पर हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. ऐसे में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और प्रभावी नियम बनाए जाने की जरूरत है.

जांच समिति के लिए मांगे गए नाम

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इंदिरा जयसिंह से दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में दस्तावेज जमा करने को कहा. पहले लिफाफे में उन महिला पत्रकारों के नाम देने होंगे, जिनके साथ कथित तौर पर हमला हुआ. दूसरे लिफाफे में उन सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीशों और पुलिस अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं, जिन्हें संभावित जांच समिति में शामिल किया जा सकता है. 

कराई गई FIR

बता दें कि जयसिंह ने एक महिला पत्रकार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. बताया गया कि इस पत्रकार के खिलाफ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराई है.

केंद्र ने भी अदालत में रखी अपनी बात

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद लोगों में पत्रकारों और रील बनाने वालों के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महिला के साथ अभद्रता नहीं होनी चाहिए, चाहे वह पत्रकार हो या महिला पुलिसकर्मी. उन्होंने अदालत से व्यापक और सामान्य निर्देश जारी करने से बचने का अनुरोध किया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई के संकेत दिए.

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