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कौन हैं तारा बेगम, जिनके घर पहुंचे डीएम ज्ञानेंद्र सिंह; तुरंत दिलवाई सरकारी सहायता

Tara Begum: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में तारा बेगम अपने बेटे की मौत के बाद 4 साल से 2 छोटे-छोटे पोतों की देखभाल भीख मांगकर कर रही थी. डीएम को शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने तुरंत घर पहुंचकर महिला की मदद की.

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Last Updated: July 26, 2026 14:00:22 IST

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UP Pilibhit Tara Begum: उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए मदद का एक अहम जरिया बन रही है. पीलीभीत जिले में प्रशासन की संवेदनशीलता का एक दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला प्रशासन की टीम घर-घर जाकर अनाथ बच्चों की पहचान कर रही है और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ रही है. आज हम जिस मामले के बारे में बताने जा रहे हैं वो पीलीभीत के चिड़ियादाह गांव का है. जहां तारा बेगम नाम की एक बुजुर्ग महिला पिछले 4 सालों से भीख मांगकर अपने दो छोटे पोतों की परवरिश करने को मजबूर थीं.

कई सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला तो उन्होंने अपनी परेशानी जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह के सामने अपनी पूरी समस्या रखी. इसके बाद डीएम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गरीब परिवार की जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया.

बेटे की मौत के बाद भीख मांगकर पोतों को पाल रही थी

जानकारी सामने आ रही है कि तारा बेगम के बेटे की मौत लगभग चार साल पहले टीबी की वजह से हो गई थी. उसकी मौत के बाद उनकी बहू दोनों छोटे बच्चों को छोड़कर चली गई और कभी वापस नहीं लौटी. आय का कोई माध्यम नहीं होने की वजह से तारा बेगम भीख मांगकर अपने मासूम पोतों की पेट पाल रही थीं. उन्होंने डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र), बिजली कनेक्शन और बच्चों के लिए जरूरी कागजात पाने के लिए कई बार अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी. आखिरकार अपनी परेशानी बताने के लिए वह सीधे जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह के कार्यालय में पहुंच गई.

यह भी पढ़ें –  दिल्ली मेट्रो की गोल्डन लाइन से किन इलाकों को होगा फायदा, घरों की कीमतों और किराये में कितना इजाफा होगा?

शिकायत पर डीएम ने लिया संज्ञान

तारा बेगम की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह ने संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीम के साथ चिड़ियादाह में उनके जर्जर घर का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया. डीएम के निर्देशों पर घर में तुरंत बिजली कनेक्शन लगाया गया, जिससे दोनों छोटे बच्चे अब पंखे की हवा में आराम से सो सकते हैं. इसके अलावा, महिला के बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र, पोतों का जन्म प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र मौके पर ही तैयार किए गए और राशन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई.

तारा बेगम ने क्या कहा?

अपनी मुश्किलों के बारे में बताते हुए तारा बेगम ने कहा कि चार साल पहले टीबी की वजह से मेरे बेटे की मौत हो गई थी और मेरी बहू भी चली गई. मैं भीख मांगकर बच्चों को पाल रही थी. जब मैंने जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई तो वे खुद हमारे घर आए. उन्होंने हमें ₹5,000 दिए, राशन का इंतजाम किया और तुरंत बिजली कनेक्शन भी लगवा दिया. अब दोनों बच्चों को हर महीने ₹2,500 मिलेंगे.

यह भी पढ़ें – सरकार और CJP के बीच बनी सहमति, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में खत्म हुआ जंतर-मंतर का आंदोलन

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UP Pilibhit Tara Begum: उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए मदद का एक अहम जरिया बन रही है. पीलीभीत जिले में प्रशासन की संवेदनशीलता का एक दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला प्रशासन की टीम घर-घर जाकर अनाथ बच्चों की पहचान कर रही है और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ रही है. आज हम जिस मामले के बारे में बताने जा रहे हैं वो पीलीभीत के चिड़ियादाह गांव का है. जहां तारा बेगम नाम की एक बुजुर्ग महिला पिछले 4 सालों से भीख मांगकर अपने दो छोटे पोतों की परवरिश करने को मजबूर थीं.

कई सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला तो उन्होंने अपनी परेशानी जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह के सामने अपनी पूरी समस्या रखी. इसके बाद डीएम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गरीब परिवार की जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया.

बेटे की मौत के बाद भीख मांगकर पोतों को पाल रही थी

जानकारी सामने आ रही है कि तारा बेगम के बेटे की मौत लगभग चार साल पहले टीबी की वजह से हो गई थी. उसकी मौत के बाद उनकी बहू दोनों छोटे बच्चों को छोड़कर चली गई और कभी वापस नहीं लौटी. आय का कोई माध्यम नहीं होने की वजह से तारा बेगम भीख मांगकर अपने मासूम पोतों की पेट पाल रही थीं. उन्होंने डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र), बिजली कनेक्शन और बच्चों के लिए जरूरी कागजात पाने के लिए कई बार अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी. आखिरकार अपनी परेशानी बताने के लिए वह सीधे जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह के कार्यालय में पहुंच गई.

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शिकायत पर डीएम ने लिया संज्ञान

तारा बेगम की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह ने संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीम के साथ चिड़ियादाह में उनके जर्जर घर का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया. डीएम के निर्देशों पर घर में तुरंत बिजली कनेक्शन लगाया गया, जिससे दोनों छोटे बच्चे अब पंखे की हवा में आराम से सो सकते हैं. इसके अलावा, महिला के बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र, पोतों का जन्म प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र मौके पर ही तैयार किए गए और राशन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई.

तारा बेगम ने क्या कहा?

अपनी मुश्किलों के बारे में बताते हुए तारा बेगम ने कहा कि चार साल पहले टीबी की वजह से मेरे बेटे की मौत हो गई थी और मेरी बहू भी चली गई. मैं भीख मांगकर बच्चों को पाल रही थी. जब मैंने जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई तो वे खुद हमारे घर आए. उन्होंने हमें ₹5,000 दिए, राशन का इंतजाम किया और तुरंत बिजली कनेक्शन भी लगवा दिया. अब दोनों बच्चों को हर महीने ₹2,500 मिलेंगे.

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