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क्या है ‘हे फीवर’, जो 2026 में होता जा रहा बदतर? सामान्य सर्दी से कैसे अलग, ऐसे करें बचाव

what is hay fever: 2026 में देश के कई इलाकों में हे फीवर का प्रकोप देखने को मिल रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि ये कोई बुखार नहीं है. इस आर्टिकल में हम इसके लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में बात करेंगे.

Written By:
Edited By: Gaurav Verma
Last Updated: 2026-04-24 14:34:47

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Hay Fever: 2026 में देश के कई इलाकों में बदलते मौसम के साथ ही गर्मी के कारण हे फीवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अप्रैल 2026 के दौरान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के अस्पतालों में हे फीवर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बता दें कि हे फीवर को मेडिकल भाषा में एलर्जिक राइनाइटिस (Allergic Rhinitis) कहा जाता है. ये फीवर कहा जाता है, लेकिन शरीर के तापमान से इसका कोई लेना-देना नहीं है. ये परागकणों, फंगस, धूल से होने वाली एक तरह की एलर्जी है. ये सर्दी और जुकाम जैसे लक्षण पैदा करता है. इसके कारण लोगों को छींकें आना, नाक बहना या नाक बंद होना, आंखों में पानी आना और आंखों मं खुजली होने जैसी तमाम परेशानियां होती हैं.

क्यों होता है हे पीवर?

जानकारी के अनुसार, पेड़, घास, खरपतवार और जानवरों के बालों से निकलने वाले महीन कण जब आंख या नाक के संपर्क में आते हैं, तो प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें हानिकारक समझ लेती है और प्रतिक्रिया करते है. इससे हिस्टामाइन केमिकल निकलता है. इसके कारण शरीर को एलर्जी होने लगती है.

हे फीवर के लक्षण

हे फीवर के लक्षण की बात करें, तो इसे फीवर कहा जाता है लेकिन ये बुखार नहीं होता. ये वायरस के कारण नहीं होता. इसके कारण ये सर्दी, जुकाम और बुखार से ज्यादा समय तक रह सकता है. अगर इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें जुकाम, छींकें आना, नाक बहना या बंद होना, आंखों में खुजली होना या पानी आना, गले में दर्द और खुजली होना, कान में खुजली होना, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं होती हैं. 

कैसे करें हे फीवर से बचाव?

हे फीवर से बचने के लिए कोशिश करें कि जब परागकण ज्यादा होते हैं, जैसे सुबह या शाम के समय घर से बाहर जाने से बचें. घर से बाहर निकलने से पहले चश्मा पहनें और मास्क लगाएं. घर वापस आने के बाद जरूर नहाएं.

ये भी पढ़ें:- Viral Fever: बुखार आने पर न करें ये 4 गलतियां, वरना बढ़ सकता है खतरा

कहां फैल रहा हे फीवर?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो हे फीवर मुख्य रूप से उन शहरी इलाकों में तेजी से फैल रहा है, जहां वायु प्रदूषण ज्यादा है और तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है. दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार और एमपी जैसी जगहों पर मौसमी बदलाव, परागकण और धूल के कारण इसके ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

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Hay Fever: 2026 में देश के कई इलाकों में बदलते मौसम के साथ ही गर्मी के कारण हे फीवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अप्रैल 2026 के दौरान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के अस्पतालों में हे फीवर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बता दें कि हे फीवर को मेडिकल भाषा में एलर्जिक राइनाइटिस (Allergic Rhinitis) कहा जाता है. ये फीवर कहा जाता है, लेकिन शरीर के तापमान से इसका कोई लेना-देना नहीं है. ये परागकणों, फंगस, धूल से होने वाली एक तरह की एलर्जी है. ये सर्दी और जुकाम जैसे लक्षण पैदा करता है. इसके कारण लोगों को छींकें आना, नाक बहना या नाक बंद होना, आंखों में पानी आना और आंखों मं खुजली होने जैसी तमाम परेशानियां होती हैं.

क्यों होता है हे पीवर?

जानकारी के अनुसार, पेड़, घास, खरपतवार और जानवरों के बालों से निकलने वाले महीन कण जब आंख या नाक के संपर्क में आते हैं, तो प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें हानिकारक समझ लेती है और प्रतिक्रिया करते है. इससे हिस्टामाइन केमिकल निकलता है. इसके कारण शरीर को एलर्जी होने लगती है.

हे फीवर के लक्षण

हे फीवर के लक्षण की बात करें, तो इसे फीवर कहा जाता है लेकिन ये बुखार नहीं होता. ये वायरस के कारण नहीं होता. इसके कारण ये सर्दी, जुकाम और बुखार से ज्यादा समय तक रह सकता है. अगर इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें जुकाम, छींकें आना, नाक बहना या बंद होना, आंखों में खुजली होना या पानी आना, गले में दर्द और खुजली होना, कान में खुजली होना, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं होती हैं. 

कैसे करें हे फीवर से बचाव?

हे फीवर से बचने के लिए कोशिश करें कि जब परागकण ज्यादा होते हैं, जैसे सुबह या शाम के समय घर से बाहर जाने से बचें. घर से बाहर निकलने से पहले चश्मा पहनें और मास्क लगाएं. घर वापस आने के बाद जरूर नहाएं.

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कहां फैल रहा हे फीवर?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो हे फीवर मुख्य रूप से उन शहरी इलाकों में तेजी से फैल रहा है, जहां वायु प्रदूषण ज्यादा है और तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है. दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार और एमपी जैसी जगहों पर मौसमी बदलाव, परागकण और धूल के कारण इसके ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

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