Live TV
Search
Home > लाइफस्टाइल > वाराणसी की इस मिठाई को मिला है GI टैग, स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका, अनूठी है ‘तिरंगा बर्फी’ की कहानी

वाराणसी की इस मिठाई को मिला है GI टैग, स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका, अनूठी है ‘तिरंगा बर्फी’ की कहानी

वाराणसी की विश्व-प्रसिद्ध तिरंगा बर्फी को इसकी विशिष्ट बनावट के कारण GI टैग प्रदान किया गया है. इस मिठाई ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

Written By:
Last Updated: August 20, 2026 21:05:39 IST

Mobile Ads 1x1

Tiranga Barfi Story: महादेव की नगरी वाराणसी जितनी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की वजह से प्रसिद्ध है, उतनी ही अपने स्वाद के लिए भी मशहूर है. बनारस की गलियों में स्वाद का खजाना है. 

स्वादिष्ट लस्सी से लेकर टमाटर चाट तक वाराणसी कई बेहतरीन व्यंजनों के लिए जानी जाती हैं. उन्हीं में से एक है ‘तिरंगा बर्फी’, जिसकी कहानी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है.

तिरंगा बर्फी के बारे में

तिरंगा बर्फी अपने नाम के अनुसार तीन रंगों की होती है, जो भारत के राष्ट्रध्वज के रंगों से मेल खाती है. ये बर्फी केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन परतों से मिलकर बनी होती है. दिलचस्प बात ये है कि ये मिठाई बिना किसी फूड कलर के बनाई जाती है. इसका केसरिया रंग केसर से, सफ़ेद रंग काजू और मावे से जबकि हरा रंग पिस्ता से बनाया जाता है. 1940 में, वाराणसी की मिठाई की दुकान राम भंडार के मदन गोपाल गुप्ता ने ये मिठाई बनाई थी. तब से बनारस में ये दुकान इस खास मिठाई के लिए मशहूर है. इस बर्फी को सरकार ने इसकी विरासत के लिए GI टैग भी प्रदान किया है.

स्वतंत्रता आंदोलन से है खास नाता 

कहा जाता है कि 1940 में वाराणसी की मिठाई की दुकान ‘राम भंडार’ के मदन गोपाल गुप्ता ने क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकों और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के लिए ‘तिरंगा बर्फी’ बनाई थी। गुप्ता अकेले नहीं थे। खबरों के मुताबिक, कई अन्य क्रांतिकारियों ने भी इस मिठाई को तैयार करने में उनकी मदद की थी। इसे भारतीय तिरंगे के रंगों जैसा रूप दिया गया था, और यह सब तब हुआ जब अंग्रेजों ने तिरंगा फहराने पर रोक लगा दी थी। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, जागरूकता बढ़ाने और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संदेश फैलाने के मकसद से तिरंगा बर्फी मुफ्त में भी बांटी गई थी।

MORE NEWS

Home > लाइफस्टाइल > वाराणसी की इस मिठाई को मिला है GI टैग, स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका, अनूठी है ‘तिरंगा बर्फी’ की कहानी

Written By:
Last Updated: August 20, 2026 21:05:39 IST

Mobile Ads 1x1

Tiranga Barfi Story: महादेव की नगरी वाराणसी जितनी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की वजह से प्रसिद्ध है, उतनी ही अपने स्वाद के लिए भी मशहूर है. बनारस की गलियों में स्वाद का खजाना है. 

स्वादिष्ट लस्सी से लेकर टमाटर चाट तक वाराणसी कई बेहतरीन व्यंजनों के लिए जानी जाती हैं. उन्हीं में से एक है ‘तिरंगा बर्फी’, जिसकी कहानी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है.

तिरंगा बर्फी के बारे में

तिरंगा बर्फी अपने नाम के अनुसार तीन रंगों की होती है, जो भारत के राष्ट्रध्वज के रंगों से मेल खाती है. ये बर्फी केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन परतों से मिलकर बनी होती है. दिलचस्प बात ये है कि ये मिठाई बिना किसी फूड कलर के बनाई जाती है. इसका केसरिया रंग केसर से, सफ़ेद रंग काजू और मावे से जबकि हरा रंग पिस्ता से बनाया जाता है. 1940 में, वाराणसी की मिठाई की दुकान राम भंडार के मदन गोपाल गुप्ता ने ये मिठाई बनाई थी. तब से बनारस में ये दुकान इस खास मिठाई के लिए मशहूर है. इस बर्फी को सरकार ने इसकी विरासत के लिए GI टैग भी प्रदान किया है.

स्वतंत्रता आंदोलन से है खास नाता 

कहा जाता है कि 1940 में वाराणसी की मिठाई की दुकान ‘राम भंडार’ के मदन गोपाल गुप्ता ने क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकों और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के लिए ‘तिरंगा बर्फी’ बनाई थी। गुप्ता अकेले नहीं थे। खबरों के मुताबिक, कई अन्य क्रांतिकारियों ने भी इस मिठाई को तैयार करने में उनकी मदद की थी। इसे भारतीय तिरंगे के रंगों जैसा रूप दिया गया था, और यह सब तब हुआ जब अंग्रेजों ने तिरंगा फहराने पर रोक लगा दी थी। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, जागरूकता बढ़ाने और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संदेश फैलाने के मकसद से तिरंगा बर्फी मुफ्त में भी बांटी गई थी।

MORE NEWS