Live TV
Search
Home > अजब गजब न्यूज > अक्ल बड़ी या भैंस? उड़ती चिड़िया के कितने पर? कहां राजा भोज ? धोबी का कुत्ता कहां का? जानिए सब सवालों के जवाब

अक्ल बड़ी या भैंस? उड़ती चिड़िया के कितने पर? कहां राजा भोज ? धोबी का कुत्ता कहां का? जानिए सब सवालों के जवाब

Common Mistakes:रोजमर्रा में कभी न कभी हम अपने संबंधियों या दोस्तों के साथ मुहावरों की भाषा में बात करते हैं, लेकिन ज्यादातर इस्तेमाल किए जाने वाले मुहावरों का असली मतलब आप नहीं जानते. कुछ मुहावरों को तो गलत भी बोला जाता है. जानिए उड़ती चिड़िया के पर कैसे गिनें? अक्ल बड़ी या भैंस? कहां राजा भोज कहां गंगू तेली? जैसे मुहावरों के पीछे का असली मतलब और इनमें छिपी गलतियां-

Written By: Kajal Jain
Last Updated: 2026-04-16 18:13:12

Mobile Ads 1x1

अक्सर कुछ लोग अपनी बात को क्रिएटिव ढंग से कहने के लिए मुहावरे और लोकोक्तियों का सहारा लेते हैं. पुराने समय में, जब लोग अपनी बात को किसी कारण सीधे तौर पर नहीं कह सकते पाते थे तो मुहावरों का सहारा लेते थे. इनमें से कुछ मुहावरे सवालिया निशान छोड़ गए तो कुछ मुहावरे मजाकिया अंदाज में आज भी लोगों को खूब हंसाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजमर्रा में बोले जाने वाले ज्यादातर मुहावरों में गलत शब्द हैं? इतना ही नहीं कुछ मुहावरों का असली मतलब वो नहीं, जो आप सोचते हैं. एक बेहद मशहूर कहावत- अक्ल बड़ी या भैंस? में भी गलती है, जबकि उड़ती चिड़िया के पर गिनना, जैसी कहावतों का असली मतलब कुछ अलग ही है. जानें इसके बारे में-

अकल बड़ी या भैंस?

इस मुहावरे का इस्तेमाल लोग ताकत और बुद्धि की तुलना करने के लिए करते हैं, जहां भैंस को ताकत का प्रतीक बताया जाता है. आपको बता दें कि ये मुहावरा गलत है. असल में कहा जाता था कि अक्ल बड़ी या व्यस. यहां व्यस एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है उम्र. इस तरह मुहावरे का अर्थ था कि किसी व्यक्ति की मेंटल एबीलिटीज को उम्र से नहीं आंकना चाहिए. 

उड़ती चिड़िया के कितने पर?

आम लोकोक्तियों में एक ये कहावत भी मशहूर है कि उड़ती चिड़िया के पर गिनना, जिसका इस्तेमाल है बुद्धिमान और चतुर लोगों के लिए होता है, जो अपने जीवन में सिर्फ दिमाग से काम लेते हैं. अक्सर जिन लोगों का जीवन में अच्छा अनुभव होता है, उनके लिए भी इस लोकोक्ति का इस्तेमाल करते हैं.

धोबी का कुत्ता कहां का?

जो लोग बिना काम के इधर-उधर घूमते हैं, उनके लिए इस मुहावरे का इस्तेमाल होता है, लेकिन असल में इस मुहावरे की सच्चाई कुछ और ही है. दरअसल, पुराने समय में धोबी मैले कपड़े धोने के लिए बैट या डंडे का इस्तेमाल करते और उसे घर ले जाने के बजाए घाट पर छिपा जाते थे, ताकि कोई दूसरा ना उठा ले. दरअसल इस बैट/डंडे को हिंदी में कुतका कहा जाता है. जब कुतका कोई और ले जाता, तब कहावत आई कि धोबी का कुतका, न घर का न घाट का. अब आप समझिए कि जब धोबी के मैले कपड़ों को गधे पर ढ़ोकर ले जाते थे, तो मुहावरे में कुत्ता कहां से आया? 

कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली?

ये कहावत किसी की आर्थिक या सामाजिक स्थिति की तुलना करने के लिए कही जाती है कि कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली, जबकि इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है. दरअसल, राजा भोज के शासन काल में गांगेय देव और जयदेव तेलंग दोनों ही राजा भोज के खिलाफ बार-बार षडयंत्र करते थे और युद्ध में राजा भोज से हारकर चले जाते थे. इसी घटना से कहावत सामने आई, हालांकि इस कहावत में थोड़ा घुमा-फिराकर लोगों ने गांगेय देव को गंगू और जयदेव तेलंग को तेली बना दिया.

ऊंट के मुंह में जीरा

ये कहावत भी वैसा नहीं है, जैसा कहा जाता था. असर में कहावत है ऊंट के मुंह में सीरा. सीरा का मतलब है चाश्नी या गुड का लिक्विड. अब आप बताईए जब ऊंट जैसा बड़ा जानवर चाश्नी पीएगा, तब ही खुश रहेगा, लेकिन जीरा खाकर ऊंट करेगा क्या? दरअसल जीरा वाली कहावत का असली मतलब है कि आवश्यकता से कम वस्तु या सेवा मिलना. जबकि ऊंट एक ऊंची हाइट का जानवर है. सीरा वाली कहावत के पीछे का अर्थ कुछ ऐसा था कि बड़े लोग, बड़ी अचीवमेंट. 

MORE NEWS

Home > अजब गजब न्यूज > अक्ल बड़ी या भैंस? उड़ती चिड़िया के कितने पर? कहां राजा भोज ? धोबी का कुत्ता कहां का? जानिए सब सवालों के जवाब

Written By: Kajal Jain
Last Updated: 2026-04-16 18:13:12

Mobile Ads 1x1

अक्सर कुछ लोग अपनी बात को क्रिएटिव ढंग से कहने के लिए मुहावरे और लोकोक्तियों का सहारा लेते हैं. पुराने समय में, जब लोग अपनी बात को किसी कारण सीधे तौर पर नहीं कह सकते पाते थे तो मुहावरों का सहारा लेते थे. इनमें से कुछ मुहावरे सवालिया निशान छोड़ गए तो कुछ मुहावरे मजाकिया अंदाज में आज भी लोगों को खूब हंसाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजमर्रा में बोले जाने वाले ज्यादातर मुहावरों में गलत शब्द हैं? इतना ही नहीं कुछ मुहावरों का असली मतलब वो नहीं, जो आप सोचते हैं. एक बेहद मशहूर कहावत- अक्ल बड़ी या भैंस? में भी गलती है, जबकि उड़ती चिड़िया के पर गिनना, जैसी कहावतों का असली मतलब कुछ अलग ही है. जानें इसके बारे में-

अकल बड़ी या भैंस?

इस मुहावरे का इस्तेमाल लोग ताकत और बुद्धि की तुलना करने के लिए करते हैं, जहां भैंस को ताकत का प्रतीक बताया जाता है. आपको बता दें कि ये मुहावरा गलत है. असल में कहा जाता था कि अक्ल बड़ी या व्यस. यहां व्यस एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है उम्र. इस तरह मुहावरे का अर्थ था कि किसी व्यक्ति की मेंटल एबीलिटीज को उम्र से नहीं आंकना चाहिए. 

उड़ती चिड़िया के कितने पर?

आम लोकोक्तियों में एक ये कहावत भी मशहूर है कि उड़ती चिड़िया के पर गिनना, जिसका इस्तेमाल है बुद्धिमान और चतुर लोगों के लिए होता है, जो अपने जीवन में सिर्फ दिमाग से काम लेते हैं. अक्सर जिन लोगों का जीवन में अच्छा अनुभव होता है, उनके लिए भी इस लोकोक्ति का इस्तेमाल करते हैं.

धोबी का कुत्ता कहां का?

जो लोग बिना काम के इधर-उधर घूमते हैं, उनके लिए इस मुहावरे का इस्तेमाल होता है, लेकिन असल में इस मुहावरे की सच्चाई कुछ और ही है. दरअसल, पुराने समय में धोबी मैले कपड़े धोने के लिए बैट या डंडे का इस्तेमाल करते और उसे घर ले जाने के बजाए घाट पर छिपा जाते थे, ताकि कोई दूसरा ना उठा ले. दरअसल इस बैट/डंडे को हिंदी में कुतका कहा जाता है. जब कुतका कोई और ले जाता, तब कहावत आई कि धोबी का कुतका, न घर का न घाट का. अब आप समझिए कि जब धोबी के मैले कपड़ों को गधे पर ढ़ोकर ले जाते थे, तो मुहावरे में कुत्ता कहां से आया? 

कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली?

ये कहावत किसी की आर्थिक या सामाजिक स्थिति की तुलना करने के लिए कही जाती है कि कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली, जबकि इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है. दरअसल, राजा भोज के शासन काल में गांगेय देव और जयदेव तेलंग दोनों ही राजा भोज के खिलाफ बार-बार षडयंत्र करते थे और युद्ध में राजा भोज से हारकर चले जाते थे. इसी घटना से कहावत सामने आई, हालांकि इस कहावत में थोड़ा घुमा-फिराकर लोगों ने गांगेय देव को गंगू और जयदेव तेलंग को तेली बना दिया.

ऊंट के मुंह में जीरा

ये कहावत भी वैसा नहीं है, जैसा कहा जाता था. असर में कहावत है ऊंट के मुंह में सीरा. सीरा का मतलब है चाश्नी या गुड का लिक्विड. अब आप बताईए जब ऊंट जैसा बड़ा जानवर चाश्नी पीएगा, तब ही खुश रहेगा, लेकिन जीरा खाकर ऊंट करेगा क्या? दरअसल जीरा वाली कहावत का असली मतलब है कि आवश्यकता से कम वस्तु या सेवा मिलना. जबकि ऊंट एक ऊंची हाइट का जानवर है. सीरा वाली कहावत के पीछे का अर्थ कुछ ऐसा था कि बड़े लोग, बड़ी अचीवमेंट. 

MORE NEWS